
पर्यावरण संतुलन की ओर कदम: तमिलनाडु में 'गोल्डन जैकाल' के संरक्षण की कवायद
तमिलनाडु सरकार ने राज्य की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के लिए सियार यानी 'गोल्डन जैकाल' (Golden Jackal) के संरक्षण की दिशा में विशेष कदम उठाए हैं। भोजन श्रृंखला और आवास सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस जीव की सुरक्षा के लिए जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।
प्राकृतिक आवास और भौगोलिक फैलाव
सियार (कैनिस ऑरियस) मुख्य रूप से नदियों, झीलों, नहरों, घाटियों और तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। यद्यपि यह जीव ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में कम दिखाई देता है, लेकिन भारत में हिमालय की तलहटी से लेकर पश्चिमी घाट तक इसका व्यापक विस्तार है। यह खुले घास के मैदानों, झाड़ियों, मैंग्रोव और कृषि क्षेत्रों के आसपास आसानी से ढल जाता है।
व्यवहार और शारीरिक विशेषताएं
गोल्डन जैकाल मध्यम आकार का कैनिड (कुत्ता प्रजाति का जीव) है, जो भेड़िये जैसा दिखता है। इंसानी आबादी वाले इलाकों में यह मुख्य रूप से रात्रिचर (Nocturnal) व्यवहार प्रदर्शित करता है, जबकि शांत क्षेत्रों में दिन के समय भी देखा जा सकता है। ये जीव एकनिष्ठ (Monogamous) होते हैं और आजीवन अपने जोड़े के साथ रहते हैं। अपने रहने के लिए ये चट्टानों की दरारों या स्वयं खोदी गई मांद (Caverns) का उपयोग करते हैं।
विविध आहार और जैव विविधता में भूमिका
सियार एक सर्वाहारी (Omnivore) और अवसरवादी शिकारी है। इसके आहार में छोटे स्तनधारी जीव, पक्षी, सरीसृप, फल और कैरियन (मृत जीवों का मांस) शामिल हैं। मृत जीवों के अवशेषों को साफ करने और छोटे जीवों की आबादी को नियंत्रित करने के कारण इसे प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है।
संरक्षण की स्थिति और कानूनी सुरक्षा
अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में गोल्डन जैकाल को 'कम चिंताजनक' (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है। यह सीआईटीईएस (CITES) के परिशिष्ट-III में सूचीबद्ध है और भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची-I (Schedule I) के अंतर्गत उच्च स्तरीय कानूनी सुरक्षा प्राप्त है।
तमिलनाडु सरकार की इस मुहिम से न केवल सियारों की आबादी को सुरक्षित स्थान मिलेगा, बल्कि इससे जुड़े अन्य स्थानीय वन्यजीवों और घास के मैदानों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

आईएनएस ब्रह्मपुत्र हादसा: लापरवाही के आरोप में दो नौसेना अधिकारियों पर कोर्ट-मार्शल शुरू
भारतीय नौसेना ने जुलाई 2024 में मुंबई नवल डॉकयार्ड में हुए गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस ब्रह्मपुत्र के आंशिक रूप से पलटने के हादसे में दो अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट-मार्शल कार्यवाही शुरू कर दी है। अधिकारियों पर कर्तव्यों में लापरवाही और जहाज को खतरे में डालने के आरोप लगाए गए हैं।
जुलाई 2024 की घटना और सुरक्षा चूक
जुलाई 2024 में जब आईएनएस ब्रह्मपुत्र मुंबई डॉकयार्ड में मरम्मत और रिफिट के दौर से गुजर रहा था, तब जहाज पर अचानक भीषण आग लग गई थी। अग्निशमन टीमों द्वारा आग बुझाने के लिए उपयोग किए गए भारी मात्रा में पानी के कारण जहाज का संतुलन बिगड़ गया, जिससे वह बाईं ओर झुक गया और अंततः अपनी बर्थ पर पलट गया। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में मरम्मत कार्य में शामिल सीमैन सितेंद्र सिंह की डूबने से मृत्यु हो गई थी।
अधिकारियों पर लगे आरोप और कानूनी प्रक्रिया
नौसेना द्वारा की गई उच्च स्तरीय जांच (बोर्ड ऑफ इंक्वायरी) के बाद संचालन में गंभीर कमियां और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी पाई गई। जहाज के कैप्टन पर कर्तव्यों में लापरवाही बरतने और युद्धपोत को खतरे में डालने (Hazarding a ship) जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट-मार्शल में दोष सिद्ध होने पर अधिकारियों को वरिष्ठता में कमी से लेकर कारावास तक की सजा हो सकती है।
आईएनएस ब्रह्मपुत्र का सामरिक महत्व
कोलकाता स्थित 'गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स' (GRSE) द्वारा निर्मित आईएनएस ब्रह्मपुत्र स्वदेशी तकनीक से निर्मित ब्रह्मपुत्र-क्लास का पहला गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है। 14 अप्रैल 2000 को नौसेना में शामिल किया गया यह युद्धपोत मध्यम और कम दूरी की तोपों, सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और टारपीडो लॉन्चरों से लैस है। यह जहाज 5,300 टन विस्थापन क्षमता और 27 नॉट से अधिक की गति के साथ तटीय गश्त, समुद्री डकैती रोधी अभियानों और समुद्री कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
हादसे के बाद कई महीनों के कठिन प्रयासों के बाद युद्धपोत को सीधा किया गया और मरम्मत प्रक्रिया शुरू की गई। नौसेना ने इस घटना से सीख लेते हुए मरम्मत के दौरान जहाजों की स्थिरता और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों को और कड़ा कर दिया है।

शेयर बाजार की तेजी के बीच 'इंडिया VIX' 15 के पास: क्या अभी खत्म नहीं हुआ डर?
भारतीय शेयर बाजार में लगातार 5 दिनों की तेजी दर्ज की गई है, लेकिन इंडिया वोलेटिलिटी इंडेक्स (India VIX) का 15 अंकों के आसपास बने रहना निवेशकों के मन में छिपी अनिश्चितता को दर्शाता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का यह 'फियर इंडेक्स' अल्पकालिक बाजार जोखिम का संकेत देता है।
क्या है 'इंडिया VIX' और यह कैसे काम करता है?
इंडिया वोलेटिलिटी इंडेक्स (VIX) को आसान शब्दों में शेयर बाजार का 'फियर इंडेक्स' (डर का पैमाना) कहा जाता है। एनएसई द्वारा 2003 में पेश किया गया यह इंडेक्स आने वाले 30 दिनों में बाजार में होने वाले संभावित उतार-चढ़ाव (वोलेटिलिटी) का पूर्वाभास देता है। जहां निफ्टी और सेंसेक्स जैसे सूचकांक शेयरों की कीमतों और बाजार की दिशा को मापते हैं, वहीं VIX केवल जोखिम और अस्थिरता को मापता है। इसका निर्माण निफ्टी ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स के ऑर्डर बुक डेटा और 'ब्लैक-स्कोल्स मॉडल' के आधार पर किया जाता है।
निफ्टी और VIX का विपरीत संबंध
ऐतिहासिक रूप से इंडिया VIX और निफ्टी के बीच एक नकारात्मक संबंध (Negative Correlation) देखा गया है। जब बाजार में किसी अनिश्चितता या वैश्विक घटना के कारण डर बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षात्मक पुट ऑप्शंस (Put Options) की मांग बढ़ा देते हैं, जिससे VIX तेजी से ऊपर जाता है और निफ्टी गिरता है। इसके विपरीत, जब VIX गिरता है, तो बाजार में स्थिरता और विश्वास का माहौल बनता है, जिससे निफ्टी में तेजी आती है।
निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए VIX का महत्व
जोखिम मूल्यांकन: ट्रेडर्स VIX के स्तर को देखकर अपने पोर्टफोलियो का लेवरेज एडजस्ट करते हैं और उपयुक्त स्टॉप-लॉस निर्धारित करते हैं।
ऑप्शंस ट्रेडिंग रणनीतियां: ऑप्शंस बायर्स और सेलर्स VIX का उपयोग प्रीमियम दरों को समझने के लिए करते हैं। VIX उच्च होने पर ऑप्शंस प्रीमियम महंगे हो जाते हैं।
पोर्टफोलियो मैनेजमेंट: म्यूचुअल फंड और पोर्टफोलियो मैनेजर उच्च और निम्न बीटा शेयरों के बीच संतुलन बनाकर पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करते हैं।
वर्तमान में VIX का 15 अंकों पर स्थिर रहना यह संकेत देता है कि हालिया तेजी के बावजूद निवेशक हेजिंग और सुरक्षात्मक दांव बना रहे हैं, ताकि किसी भी अचानक आने वाले वैश्विक या आर्थिक झटके से निपटा जा सके।

चक्रवात मुरसु का कहर: विजयवाड़ा के प्रकाशम बैराज के सभी 70 गेट खोले गए
कृष्णा बेसिन में चक्रवात मुरसु के प्रभाव से हुई भारी बारिश के बाद विजयवाड़ा स्थित प्रसिद्ध प्रकाशम बैराज का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। स्थिति को नियंत्रित करने और बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए प्रशासन ने बैराज के सभी 70 गेट खोलकर पानी की निकासी शुरू कर दी है।
कृष्णा नदी का मुख्य नियामक और ऐतिहासिक महत्व
विजयवाड़ा शहर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित यह बैराज आंध्र प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई और जल नियंत्रण परियोजनाओं में से एक है। 1954 से 1957 के बीच निर्मित और 24 दिसंबर 1957 को उद्घाटन किया गया यह बैराज कृष्णा नदी पर बना हुआ है। इससे पहले यहां ब्रिटिश काल में सर आर्थर कॉटन द्वारा निर्मित पुराना 'कृष्णा एनीकट' (1852-1855) मौजूद था, जो सितंबर 1952 की भीषण बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गया था। इस नए बैराज का नामकरण आंध्र प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री तंगुतुरी प्रकाशम के सम्मान में किया गया था।
तकनीकी संरचना और विशाल जल संचयन क्षमता
लगभग 1,223 मीटर (1.22 किमी) लंबा यह बैराज अपनी विशेष इंजीनियरिंग और मजबूती के लिए जाना जाता है। मुख्य रूप से स्थानीय ग्रेनाइट पत्थरों और सुदृढ़ कंक्रीट संरचना से बने इस बैराज में उच्च शक्ति वाले स्टील से तैयार किए गए गेट लगाए गए हैं, जो पानी के भीषण दबाव को आसानी से झेल सकते हैं। बैराज की बैकवाटर झील में ही प्रसिद्ध भवानी द्वीप (Bhavani Island) स्थित है, जो इस क्षेत्र का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र भी है।
कृषि, नौवहन और पारिस्थितिक संतुलन में योगदान
प्रकाशम बैराज केवल बाढ़ नियंत्रण का साधन नहीं है, बल्कि यह लगभग 10 लाख हेक्टेयर (1 मिलियन हेक्टेयर) कृषि भूमि की सिंचाई करता है, जिसने कृष्णा डेल्टा को पूरे आंध्र प्रदेश का सबसे समृद्ध 'अन्न भंडार' बना दिया है। इसके अलावा, यह ऐतिहासिक बकिंघम नहर को भी पानी की आपूर्ति करता है। विजयवाड़ा शहर से होकर गुजरने वाली इसकी तीन मुख्य नहरें—बंदर नहर, एलुरु नहर और रायवेस नहर—शहर को एक अनोखा जल-मार्ग का नजारा देती हैं।

ट्राई का नया 'नेटवर्क अनुभव' पोर्टल: जानें आपके इलाके में किसका नेटवर्क बेस्ट
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 'नेटवर्क अनुभव' (Network Anubhav) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह एक जियोस्पेशियल और एनालिटिकल डैशबोर्ड है, जो उपभोक्ताओं को अपने क्षेत्र में मोबाइल-फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की स्पीड जांचने, नेटवर्क तुलना करने और स्पैम कॉल के खिलाफ DND सेवाएं इस्तेमाल करने की सुविधा देता है।
उपभोक्ता डेटा और इंडिपेंडेंट ड्राइव टेस्ट का अनूठा संगम
नेटवर्क अनुभव प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से ट्राई के लोकप्रिय ऐप्स 'MySpeed' और 'MyCall' के माध्यम से एकत्र किए गए उपभोक्ता डेटा को एकत्रित करता है। इसके साथ ही, इसमें ट्राई द्वारा समय-समय पर कराए जाने वाले आधिकारिक 'इंडिपेंडेंट ड्राइव टेस्ट' (IDT) के आंकड़ों को भी शामिल किया गया है। यह जियोस्पेशियल नक्शा मोबाइल और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड दोनों के लिए डाउनलोड और अपलोड स्पीड का सटीक विवरण प्रस्तुत करता है, जिससे उपयोगकर्ता किसी भी क्षेत्र में सबसे बेहतर नेटवर्क सेवा प्रदाता का आसानी से चयन कर सकते हैं।
पारदर्शी आंकड़े और स्पीड इंडिकेटर्स
यह पोर्टल उपयोगकर्ताओं द्वारा किए गए स्पीड टेस्ट के आधार पर सटीक और वैज्ञानिक आंकड़े प्रदर्शित करता है। इसमें मीडियन स्पीड (P50) के साथ-साथ मोबाइल ब्रॉडबैंड के लिए P80 (80% टेस्ट में रिकॉर्ड की गई स्पीड) और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के लिए P90 (90% टेस्ट में दर्ज स्पीड) जैसे मानक शामिल हैं। यद्यपि ये आंकड़े सीधे नेटवर्क की गुणवत्ता का अंतिम पैमाना नहीं हैं, लेकिन ये किसी क्षेत्र विशेष में अन्य ग्राहकों के वास्तविक अनुभव का सटीक खाका प्रस्तुत करते हैं।
DND सुविधाएं और नेटवर्क सुधार का रास्ता
नेटवर्क अनुभव प्लेटफॉर्म न केवल स्पीड चेक करने का जरिया है, बल्कि यह डू नॉट डिस्टर्ब (DND) सेवाओं तक वेब पहुंच भी प्रदान करता है। उपभोक्ता इसके माध्यम से कमर्शियल मैसेजिंग के लिए अपनी प्राथमिकताएं दर्ज कर सकते हैं, अनचाहे स्पैम कॉल्स और मैसेजेस की शिकायत दर्ज कर सकते हैं तथा अपनी शिकायत के स्टेटस को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा, इस प्लेटफॉर्म का डेटा टेलीकॉम कंपनियों को उन भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करेगा जहां इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस क्वालिटी में सुधार की आवश्यकता है।
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