
ओखला बर्ड सेंचुरी में दिखा दुर्लभ 'सफेद सारस', उमड़े पक्षी प्रेमी
दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर स्थित ओखला बर्ड सेंचुरी में हाल ही में एक दुर्लभ 'सफेद सारस' (White Stork) देखा गया है। इस खूबसूरत प्रवासी पक्षी की उपस्थिति ने पक्षी प्रेमियों, पर्यावरणविदों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों को आर्द्रभूमि (Wetland) की ओर आकर्षित किया है। यह घटना क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती है।
सफेद सारस की अनूठी विशेषताएं
सिकोनिडे (Ciconiidae) परिवार से ताल्लुक रखने वाला सफेद सारस एक बड़ा जलपक्षी है। यह मुख्य रूप से अपने आकर्षक पंखों, लंबी लाल चोंच और लंबे लाल पैरों के कारण आसानी से पहचाना जाता है। खड़े होने पर इसकी लंबाई लगभग 95 से 110 सेंटीमीटर और पंखों का फैलाव 183 से 217 सेंटीमीटर तक होता है। ये पक्षी उड़ते समय अपनी गर्दन सीधी फैलाकर और पैरों को पीछे खींचकर हवा में तैरते हुए ऊर्जा की बचत करते हैं।
लंबी दूरी के प्रवासी पक्षी
यूरोप, एशिया माइनर, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व में पाए जाने वाले ये सारस सर्दियों के मौसम में प्रवास करते हैं। ठंड की शुरुआत होते ही ये अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय इलाकों, मध्य पूर्व और भारतीय उपमहाद्वीप की ओर रुख करते हैं। ये पक्षी आमतौर पर उथले जलाशयों, घास के मैदानों और कृषि क्षेत्रों में भोजन की तलाश करते हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट में इन्हें 'लीस्ट कंसर्न' (कम चिंतनीय) श्रेणी में रखा गया है।
ओखला बर्ड सेंचुरी का महत्व
दिल्ली से उत्तर प्रदेश में यमुना नदी के प्रवेश द्वार पर स्थित यह लगभग 4 वर्ग किलोमीटर का अभयारण्य प्रवासी पक्षियों के लिए एक आदर्श पड़ाव है। बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा 'महत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र' (IBA) के रूप में मान्यता प्राप्त यह सेंचुरी दुर्लभ जीवों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाती है।
सफेद सारस का ओखला जैसे संरक्षित क्षेत्र में पहुंचना यह साबित करता है कि शहरी फैलाव के बीच भी ये नमी वाले इलाके प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित शरणगाह बने हुए हैं।

नीति आयोग ने लॉन्च किया 'इंडिया साइंस एंड टेक्नोलॉजी स्कोरबोर्ड'
नीति आयोग के साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिवीजन ने देश के विज्ञान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को ट्रैक करने के लिए एक इंटरैक्टिव डेटा प्लेटफॉर्म 'इंडिया साइंस एंड टेक्नोलॉजी स्कोरबोर्ड' लॉन्च किया है। इसके जरिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी प्रदर्शन क्षमता, शोध आउटपुट और नीतियों की तुलना कर सकते हैं।
डेटा का एकीकृत महामंच
यह स्कोरबोर्ड देश भर के शोध संस्थानों, प्रकाशनों, पेटेंट आवेदन, स्टार्टअप्स और अनुसंधान निधि (R&D Funding) से जुड़ी जानकारियों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराता है। इसमें केंद्रीय, राज्य स्तरीय और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ आरएंडडी लैब्स, डीप-टेक स्टार्टअप्स और अटल टिंकरिंग लैब्स तक का संपूर्ण डेटा शामिल किया गया है। इसके माध्यम से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी ताकत, कमियों और विकास की संभावनाओं का सटीक मूल्यांकन कर सकेंगे।
11 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर फोकस
नीति आयोग का यह मंच राष्ट्रीय महत्व के 11 प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों पर केंद्रित है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स और आधुनिक कृषि जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इन क्षेत्रों में शोध के उत्पादन और राज्यवार प्रगति की तुलना आसानी से की जा सकती है।
बेंचमार्किंग और राज्यों की तुलना
इस प्लेटफॉर्म की सबसे खास बात इसकी बेंचमार्किंग प्रणाली है। इसके जरिए यूजर किसी भी दो राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के बीच अनुसंधान आउटपुट, शोध क्षेत्रों और विभिन्न सेक्टर्स के प्रदर्शन का सीधा तुलनात्मक अध्ययन कर सकते हैं। पेटेंट के मोर्चे पर यह पेटेंट आवेदनों की संख्या, पेटेंट क्षमता और राज्यों के बीच आपसी सहयोग की जानकारी भी विस्तार से प्रदान करता है।
नीतियों और नवाचारों का साझाकरण
यह स्कोरबोर्ड केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न राज्यों की साइंस एंड टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और इनोवेशन नीतियों का दस्तावेजीकरण भी करता है। इसके माध्यम से राज्य एक-दूसरे की सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों (Best Practices) का अध्ययन कर उन्हें अपने यहां लागू कर सकते हैं। नीति निर्माताओं के लिए यह उपकरण साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाने और राज्य स्तर पर शोध और नवाचार को बढ़ावा देने में बेहद मददगार साबित होगा।

फिलीपींस का मयॉन ज्वालामुखी फटा, आसमान में 3,000 मीटर ऊंचा राख का गुबार
फिलीपींस के सबसे सक्रिय मयॉन ज्वालामुखी में हाल ही में एक मध्यम स्तर का विस्फोटक उदगार हुआ, जिससे आसमान में हजारों मीटर ऊपर तक राख का घना गुबार छा गया। बढ़ते खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने अलर्ट स्तर 3 लागू कर दिया है और प्रभावित इलाकों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
अलर्ट स्तर 3 और सुरक्षा उपाय
फिलीपींस के ज्वालामुखी और भूकंप विज्ञान संस्थान (PHIVOLCS) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चेतावनी स्तर को बढ़ाकर 'लेवल 3' कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में दर्जनों ज्वालामुखी भूकंप और रॉकफॉल की घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। संभावित खतरों के मद्देनजर क्रेटर के आसपास के 6 किलोमीटर के स्थायी खतरनाक दायरे (Danger Zone) में लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है, साथ ही विमानों को भी इस क्षेत्र से दूर रहने की चेतावनी दी गई है। एहतियात के तौर पर हजारों स्थानीय निवासियों को सुरक्षित शिविरों में स्थानांतरित किया गया है।
मयॉन ज्वालामुखी का भौगोलिक महत्व
फिलीपींस के लुजोन द्वीप पर अल्बाय प्रांत में स्थित मयॉन एक एक्टिव स्ट्रेटोवोलcano (संस्तर ज्वालामुखी) है। यह प्रशांत महासागर की प्रसिद्ध 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) का हिस्सा है। फिलीपींस ट्रेंच के पास स्थित होने के कारण यह क्षेत्र अत्यधिक भूगर्भीय हलचलों के प्रति संवेदनशील है। समुद्र तल से 2,462 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस ज्वालामुखी का आधार लगभग 130 किलोमीटर के दायरे में फैला है। इसकी अद्भुत सममितीय बनावट (Symmetry) इसे दुनिया के सबसे सुंदर ज्वालामुखियों में शुमार करती है।
इतिहास का सबसे विनाशकारी दौर
1616 के बाद से अब तक इस ज्वालामुखी में 30 से अधिक बड़े उदगार दर्ज किए जा चुके हैं। इसका सबसे हिंसक और भयानक उदगार 1814 में हुआ था, जिसमें लगभग 1,200 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और कई शहर इसकी चपेट में आकर दफन हो गए थे। इसके निचले ढलानों पर बड़े पैमाने पर अबाका (Abaca) के बागान हैं, और यूनेस्को (UNESCO) ने इसे 2016 में बायोस्फीयर रिजर्व घोषित किया था।
वर्तमान में लगातार बढ़ रही सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) गैस और राख के उत्सर्जन को देखते हुए वैज्ञानिक इसकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं ताकि किसी भी बड़े खतरे से समय रहते निपटा जा सके।

एशियाई काले भालू द्वारा लाल पांडा के शिकार का पहला दुर्लभ फोटो साक्ष्य
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के शोधकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल के सिंगालिला नेशनल पार्क में एशियाई काले भालू (Asiatic Black Bear) द्वारा संकटग्रस्त लाल पांडा (Red Panda) के शिकार का पहला फोटो साक्ष्य दर्ज किया है। यह दुर्लभ घटना उच्च-हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर नई रोशनी डालती है।
दुर्लभ शिकार की घटना और वैज्ञानिक महत्व
कैमरा-ट्रैप से प्राप्त तस्वीरों की श्रृंखला में देखा गया कि एक लाल पांडा पेड़ पर चढ़ रहा था। अगले ही दिन एक एशियाई काला भालू उसी स्थान पर पहुंचा, पेड़ पर चढ़ा और अपने मुंह में लाल पांडा को दबाकर नीचे उतर आया। अब तक यह माना जाता था कि लाल पांडा पेड़ों की ऊंची शाखाओं को सुरक्षित शरणस्थल (Refuge) के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जहां वे शिकारियों से पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। हालांकि, इस घटना ने साबित कर दिया है कि पेड़ों पर भी वे शिकार के खतरे से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं।
एशियाई काले भालू की शारीरिक और पारिस्थितिक विशेषताएं
एशियाई काला भालू मुख्य रूप से एशिया के घने और पहाड़ी जंगलों में पाया जाता है। इसकी सबसे बड़ी पहचान इसकी छाती पर बना हल्के बादामी या सफेद रंग का 'V' आकार का निशान है। यह भालू पेड़ों पर चढ़ने और तैरने में बेहद कुशल होता है। भारत में यह पूर्वी से लेकर पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में 2,600 से 11,400 फीट की ऊंचाई पर पाया जाता है। यह सर्वभक्षी जीव आम तौर पर फल, कीड़े-मकोड़े और छोटे जानवर खाता है और सर्दियों में शीतनिद्रा (Hibernation) में चला जाता है।
संरक्षण की चुनौतियां और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
वैज्ञानिकों का मानना है कि खाद्य स्रोतों में मौसमी बदलाव, दोनों प्रजातियों के निवास स्थान का एक-दूसरे से जुड़ना और जलवायु परिवर्तन के कारण शीतनिद्रा के पैटर्न में बदलाव जैसी वजहें भालू के इस तरह के आक्रामक व्यवहार का कारण बन सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में एशियाई काले भालू को 'संवेदनशील' (Vulnerable) और लाल पांडा को 'संकटग्रस्त' (Endangered) श्रेणी में रखा गया है। जब एक संकटग्रस्त प्रजाति दूसरी संकटग्रस्त प्रजाति का शिकार करती है, तो वन्यजीव विशेषज्ञों के सामने संरक्षण नीतियों को लेकर एक नई जटिल चुनौती खड़ी हो जाती है।

टाइगर ट्रायम्फ 2026: भारत-अमेरिका का संयुक्त सैन्य अभ्यास विशाखापट्टनम में शुरू
भारत और अमेरिका के सशस्त्र बलों ने विशाखापट्टनम के मैरीटाइम वॉरफेयर सेंटर में द्विपक्षीय त्रि-सेवा अभ्यास 'टाइगर ट्रायम्फ 2026' के 5वें संस्करण की शुरुआत की है। टेबलटॉप एक्सरसाइज (TTX) प्रारूप में आयोजित इस अभ्यास में पहली बार राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) भी हिस्सा ले रहा है।
टेबलटॉप फॉर्मेट और पहली बार NDRF की भागीदारी
इस वर्ष टाइगर ट्रायम्फ 2026 को टेबलटॉप एक्सरसाइज (TTX) के रूप में संचालित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय संकटों और बड़े पैमाने पर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के दौरान संयुक्त योजना, समन्वय और परिचालन अंतर-क्षमता (Interoperability) को बेहतर बनाना है। इस 5वें संस्करण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें भारत की नागरिक आपदा प्रतिक्रिया एजेंसी यानी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) पहली बार हिस्सा ले रही है। इससे सैन्य और नागरिक आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सकेगा।
भारतीय और अमेरिकी दलों की उपस्थिति
इस अभ्यास में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना के विशेषज्ञों के साथ-साथ तीनों सेनाओं के स्पेशल फोर्सेज के जवान शामिल हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी दल में यूएस जॉइंट फोर्स के प्रतिनिधि शामिल हैं, जिनमें वायु सेना, थल सेना, मरीन कॉर्प्स, नौसेना के साथ-साथ अंतरिक्ष (Space), साइबर (Cyber), मेडिकल और विस्फोटक निपटान (EOD) विशेषज्ञ भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक महत्व
टाइगर ट्रायम्फ का यह संस्करण 'कंबाइंड जॉइंट ऑल-डोमेन ऑपरेशंस' को सक्षम करने की दिशा में केंद्रित है। दोनों देशों के सशस्त्र बलों की यह संयुक्त पहल न केवल आपातकालीन स्थितियों में एक-दूसरे के अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का अवसर देती है, बल्कि हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और आपदा राहत अभियानों में भारत-अमेरिका साझेदारी की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
Delight News
निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण
Delight News परिवार से जुड़ें
ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।
📥 Download Android App