Delight News Logo
Latest सामान्य ख़बरें सरकारी नौकरी करेंट अफेयर्स परीक्षा ज्ञान
तवांग मठ में भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों का हुआ भव्य स्वागत

तवांग मठ में भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों का हुआ भव्य स्वागत

Delight News
📅 02 Nov2026

अरुणाचल प्रदेश के ऐतिहासिक गदेन नामग्यालल्हात्से (तवांग मठ) में भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों (Sacred Relics) का पारंपरिक और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया। भारत के सबसे बड़े इस मठ में पवित्र अस्थियों के दर्शन के लिए श्रद्धालु और बौद्ध भिक्षु बड़ी संख्या में एकत्रित हुए।

पूर्वी हिमालय की सुरम्य पहाड़ियों में स्थित अरुणाचल प्रदेश के प्रसिद्ध तवांग मठ में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला। भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों के तवांग आगमन पर उनका पारंपरिक एवं भव्य धार्मिक स्वागत किया गया। इस पावन अवसर पर समूचा मठ परिसर बुद्धं शरणं गच्छामि के पवित्र मंत्रों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनियों से गुंजायमान हो उठा।
गदेन नामग्यालल्हात्से (तवांग मठ) का इतिहास
अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में स्थित यह मठ भारत का सबसे बड़ा और तिब्बत के ल्हासा स्थित पोताला महल के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ है। इसे 'गदेन नामग्यालल्हात्से' (Gaden Namgyal Lhatse) के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है "पूर्ण विजय का दिव्य स्वर्ग"। इस ऐतिहासिक मठ की स्थापना 17वीं शताब्दी में मेराक लामा लोद्रे ग्यात्सो ने 5वें दलाई लामा की इच्छा के अनुसार की थी। यह महायान और वज्रयान बौद्ध धर्म की गेलुग परंपरा का एक प्रमुख केंद्र है।
वास्तुकला और मुख्य सभा भवन 'दुखांग'
तवांग मठ की संरचना अत्यंत भव्य और कलात्मक है। इसका सबसे प्रमुख और केंद्रीय भवन सभा भवन है, जिसे 'दुखांग' (Dukhang) कहा जाता है। तीन मंजिला दुखांग के अंदरूनी हिस्सों की दीवारों पर देवी-देवताओं और बौद्ध संतों की आकर्षक चित्रकारी (Mural Paintings) की गई है। भवन के मध्य में भगवान बुद्ध की एक विशाल और भव्य स्वर्ण-मंडित मूर्ति विराजमान है, जिसके दोनों ओर उनके मुख्य शिष्य मोद्गल्यायन और सारिपुत्र की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
देवी श्री देवी की थंका और दुर्लभ पांडुलिपियां
दुखांग के मुख्य वेदी के बाईं ओर रेशम में लिपटा हुआ एक चांदी का कास्कट रखा है, जिसमें मुख्य देवी 'श्री देवी' (पाल्देन ल्हामो) का थंका चित्र सुरक्षित है। यह थंका 5वें दलाई लामा द्वारा संस्थापक मेराक लामा को उपहार स्वरूप दिया गया था। इसके अतिरिक्त, मठ के पुस्तकालय में केंग्यूर और तेंग्यूर जैसी दुर्लभ और प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों का अमूल्य संग्रह मौजूद है, जिनमें से कई के अक्षर सोने की स्याही से लिखे गए हैं।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
तवांग मठ न केवल बौद्ध भिक्षुओं के अध्ययन और धार्मिक साधना का प्रमुख केंद्र है, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध बौद्ध संस्कृति और निरंतरता का प्रतीक भी है। भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों की इस प्रदर्शनी और आगमन ने इस क्षेत्र में शांति, करुणा और वैश्विक भ्रातृत्व के संदेश को पुनः नया विस्तार दिया है।
ओलिव रिडेल कछुओं की सुरक्षा के लिए ओडिशा तट पर मछली पकड़ने पर रोक

ओलिव रिडेल कछुओं की सुरक्षा के लिए ओडिशा तट पर मछली पकड़ने पर रोक

Delight News
📅 02 Nov2026

संकटग्रस्त ओलिव रिडले समुद्री कछुओं के संरक्षण और प्रजनन सीजन को सुरक्षित बनाने के लिए ओडिशा के निर्धारित तटीय इलाकों में अगले सात महीनों के लिए मछली पकड़ने और मशीनीकृत नावों के संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

समुद्री जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में ओडिशा सरकार ने एक सख्त और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दुनिया भर में संकटग्रस्त श्रेणी में शामिल ओलिव रिडले समुद्री कछुओं के प्रजनन और संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए ओडिशा के चुनिंदा तटीय क्षेत्रों में सात महीने के लिए मछली पकड़ने की गतिविधियों और मशीनीकृत नावों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
कौन हैं ओलिव रिडले कछुए और उनकी विशेषताएं?
ओलिव रिडले कछुए दुनिया भर में पाए जाने वाले सभी समुद्री कछुओं में आकार में सबसे छोटे और सबसे अधिक मात्रा में पाए जाने वाले कछुए हैं। इनके कवच (Carapace) का रंग जैतून जैसा हरा (Olive Green) होता है, जिसके कारण इनका नाम ओलिव रिडले पड़ा है। ये आमतौर पर खुले महासागरों में अकेले रहना पसंद करते हैं और शाकाहारी व मांसाहारी दोनों प्रकार का भोजन करते हैं। यह कछुए साल भर में भोजन और प्रजनन स्थलों के बीच हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा तय करते हैं।
अनोखी सामूहिक घोंसला बनाने की प्रक्रिया (अरिबाड़ा)
ये कछुए अपनी अनूठी सामूहिक नेस्टिंग के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं, जिसे 'अरिबाड़ा' (Arribada) कहा जाता है। इस दौरान हजारों की संख्या में मादा कछुए एक साथ एक ही तट पर अंडे देने के लिए पहुंचती हैं। ओडिशा का गहिरमाथा मरीन सेंचुरी (Gahirmatha Marine Sanctuary) समुद्री कछुओं का दुनिया का सबसे बड़ा रूकरी यानी प्रजनन केंद्र माना जाता है।
वैश्विक वितरण और संरक्षण की स्थिति
ओलिव रिडले कछुए मुख्य रूप से प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागर के गर्म पानी में पाए जाते हैं। इनकी घटती संख्या और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर इन्हें विशेष संरक्षण प्राप्त है।
आईयूसीएन रेड लिस्ट (IUCN Red List): सुभेद्य (Vulnerable)
साइट्स (CITES): परिशिष्ट I (Appendix I)
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची 1 (Schedule 1)
प्रतिबंध का उद्देश्य
मशीनीकृत नावों और ट्रेवलिंग गियर के कारण अक्सर ये कछुए जाल में फंसकर घायल हो जाते हैं या उनकी मौत हो जाती है। सात महीने के इस सख्त प्रतिबंध का उद्देश्य अंडों से बच्चों के निकलने की प्रक्रिया (Hatching season) को सुरक्षित बनाना और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना है।
सोरायसिस के मरीजों को मोतियाबिंद का अधिक खतरा, नई स्टडी में हुआ खुलासा

सोरायसिस के मरीजों को मोतियाबिंद का अधिक खतरा, नई स्टडी में हुआ खुलासा

Delight News
📅 02 Nov2026

एक हालिया अध्ययन के अनुसार, सोरायसिस से पीड़ित मरीजों में मोतियाबिंद (Cataracts) और इससे जुड़ी सर्जरी का जोखिम काफी बढ़ जाता है। हालांकि, यह जोखिम रोगियों की उपचार पद्धतियों (Treatment modality) के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

त्वचा से जुड़ी पुरानी और ऑटोइम्यून बीमारी 'सोरायसिस' को लेकर एक चौंकाने वाला चिकित्सीय खुलासा सामने आया है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि सोरायसिस के मरीजों में मोतियाबिंद होने और इसके लिए सर्जरी करवाने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। अध्ययन के मुताबिक, यह जोखिम इस बात पर भी निर्भर करता है कि मरीज के इलाज के लिए किस प्रकार की चिकित्सा पद्धति का उपयोग किया जा रहा है।
सोरायसिस क्या है और इसके कारण क्या हैं?
सोरायसिस एक दीर्घकालिक (Chronic) ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसके कारण त्वचा की कोशिकाएं बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं। सामान्य तौर पर त्वचा की कोशिकाओं को विकसित होकर झड़ने में एक महीना लगता है, लेकिन सोरायसिस के मामलों में यह प्रक्रिया महज तीन से चार दिनों में पूरी हो जाती है। परिणाम यह होता है कि कोशिकाएं झड़ने के बजाय त्वचा की सतह पर जमा होने लगती हैं, जिससे खुजलीदार और पपड़ीदार चकत्ते बन जाते हैं। यह आनुवंशिकी, प्रतिरक्षा प्रणाली और पर्यावरणीय कारकों के मेल से उत्पन्न होती है।
प्रमुख लक्षण और ट्रिगर्स
इस बीमारी के मुख्य लक्षणों में मोटी लाल त्वचा के पैच, चांदी जैसी सफेद पपड़ी, सूखी और फटी हुई त्वचा, तथा नाखून खराब होना शामिल है। कई मरीजों को इसके साथ 'सोरायटिक आर्थराइटिस' की समस्या भी होती है, जिसमें जोड़ों में दर्द और जकड़न पैदा होती है। इसके प्रमुख ट्रिगर्स में भावनात्मक तनाव, संक्रमण, त्वचा पर चोट, मौसम में बदलाव और लिथियम या बीटा-ब्लॉकर्स जैसी कुछ दवाइयां शामिल हैं। यह बीमारी किसी को छूने से नहीं फैलती, यानी यह संक्रामक (Contagious) नहीं है।
वर्तमान उपचार और प्रबंधन
फिलहाल सोरायसिस का कोई पूर्ण इलाज (Cure) संभव नहीं है, लेकिन इसके उपचार का मुख्य उद्देश्य सूजन को कम करना, त्वचा कोशिकाओं की वृद्धि को धीमा करना और पपड़ी को हटाना होता है। इसके लिए स्टेरॉयड क्रीम, मॉइस्चराइजर, विटामिन D3 और A के मलहम, एंथ्रालाइन और medicated शैंपू का उपयोग किया जाता है। मोतियाबिंद के बढ़ते खतरे के सामने आने के बाद अब डॉक्टरों को सोरायसिस के दीर्घकालिक प्रबंधन में आंखों के स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता महसूस हो रही है।
भूटान ने पीएम मोदी को समर्पित किया स्तूप, 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' को भारत का समर्थन

भूटान ने पीएम मोदी को समर्पित किया स्तूप, 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' को भारत का समर्थन

Delight News
📅 02 Nov2026

भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' (GMC) प्रोजेक्ट में भारत के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए स्तूप संख्या 76 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया है। रिकॉर्ड 9 घंटे में 40,000 स्वयंसेवकों द्वारा बनाए गए 108 बौद्ध स्तूपों (जांगचुप चोर्टेन) में से एक को पीएम मोदी को समर्पित किया गया।

भारत और भूटान के प्रगाढ़ संबंधों में एक और सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने महत्वाकांक्षी 'गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी' (GMC) परियोजना को भारत के अटूट समर्थन के लिए आभार जताते हुए एक अनूठी पहल की है। उन्होंने गेलेफू में मात्र नौ घंटे के रिकॉर्ड समय में निर्मित 108 बौद्ध स्तूपों (जांगचुप चोर्टेन) में से स्तूप संख्या 76 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया है।
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) क्या है?
भूटान नरेश की परिकल्पना पर आधारित गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी हिमालय की तलहटी में बसाया जाने वाला एक क्रांतिकारी और भविष्यवादी शहर है। भारत के असम राज्य की सीमा से सटे दक्षिणी मैदानों में फैले 4,046 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में बनने वाला यह शहर भूटान के कुल भूभाग का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है। फरवरी 2024 में एक रॉयल चार्टर के जरिए इसे अत्यधिक स्वायत्तता वाला विशेष प्रशासनिक क्षेत्र (SAR) घोषित किया गया था। यहाँ एक स्वतंत्र न्यायपालिका और शासन व्यवस्था होगी, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्य करेगी।
अनोखा मास्टरप्लान और डिजाइन
गेलेफू शहर को पर्यावरण संरक्षण, आध्यात्मिकता और आधुनिकता का अद्भुत संगम बनाया जा रहा है। इसका मास्टरप्लान एक के बाद एक जुड़ने वाले 'रहने योग्य पुलों' (Inhabitable Bridges) और मंडाला-आकार के 11 पड़ोस (Neighborhoods) के रूप में तैयार किया गया है। शहर में बहने वाली 35 नदियों और नालों की सुरक्षा के लिए विशेष सीढ़ीदार धान के खेत बनाए जाएंगे, जो बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ जैव विविधता गलियारे का भी काम करेंगे। इसके अलावा, योजना में एक नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, विश्वविद्यालय, पूर्वी और पश्चिमी चिकित्सा केंद्र, और जलविद्युत बांध शामिल हैं।
स्तूप समर्पण और रिकॉर्ड निर्माण का महत्व
गेलेफू में माऊ छू (Aie) नदी के किनारे लगभग 40,000 प्रशिक्षित स्वयंसेवकों ने एक ही दिन में मात्र नौ घंटे में 15 मीटर ऊंचे 108 स्तूपों का निर्माण कर इतिहास रच दिया। स्तूप संख्या 76 को पीएम मोदी को समर्पित करने के पीछे खास वजह यह भी है कि वे हाल ही में 76 वर्ष के हुए हैं। यह समर्पण इस बात का प्रतीक है कि भारत इस दूरदर्शी माइंडफुलनेस सिटी के बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास में एक प्रमुख भागीदार के रूप में खड़ा है।
भारत-भूटान संबंधों में नया मोड़
गेलेफू परियोजना न केवल भूटान के आर्थिक भविष्य की दिशा तय करेगी, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के साथ व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को अभूतपूर्व बढ़ावा देगी। भारत के सक्रिय समर्थन ने दोनों देशों के बीच सामरिक और रणनीतिक साझेदारी को एक नई गहराई प्रदान की है।
LRS के तहत भारत से बाहर भेजा गया फंड $20 बिलियन के पार

LRS के तहत भारत से बाहर भेजा गया फंड $20 बिलियन के पार

Delight News
📅 02 Nov2026

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत साल 2026 के पहले आठ महीनों में विदेश भेजा गया धन $20 बिलियन के आंकड़े को पार कर गया है। विदेशी शिक्षा, यात्रा और संपत्ति निवेश के कारण आउटवर्ड रेमिटेंस में यह उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत देश से बाहर भेजे जाने वाले धन (Outward Remittance) में बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। साल 2026 के शुरुआती आठ महीनों के दौरान ही इस योजना के तहत विदेश भेजा गया फंड 20 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है।
क्या है लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS)?
लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम की शुरुआत भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा 4 फरवरी 2004 को की गई थी। यह विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) 1999 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भारत से बाहर भेजे जाने वाले पैसों के दिशा-निर्देश तय करता है।
प्रेषण सीमा और पात्रता नियम
LRS के तहत भारत में रहने वाले सभी निवासी व्यक्तियों (जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं) को एक वित्तीय वर्ष (अप्रैल से मार्च) में 2,50,000 अमेरिकी डॉलर (USD) तक की राशि बिना किसी जटिल प्रक्रिया के विदेश भेजने की अनुमति होती है। एक वित्तीय वर्ष में लेनदेन की संख्या या आवृत्ति पर कोई सीमा नहीं रखी गई है। यह राशि चालू खाता (Current Account) या पूंजीगत खाता (Capital Account) दोनों प्रकार के लेनदेन के लिए भेजी जा सकती है।
किन कार्यों के लिए पैसा भेजने की अनुमति है?
इस योजना के अंतर्गत विदेश में बैंक खाता खोलना, अचल संपत्ति खरीदना, विदेशी शेयरों या पोर्टफोलियो में निवेश (ODI/OPI) करना शामिल है। इसके अलावा निजी विदेश यात्राएं (नेपाल और भूटान को छोड़कर), विदेशों में पढ़ाई, चिकित्सा उपचार, और अनिवासी भारतीय (NRI) रिश्तेदारों को ऋण देना भी पूरी तरह मान्य है।
इन गतिविधियों पर लागू है पूर्ण प्रतिबंध
LRS के तहत कुछ विशिष्ट गतिविधियों के लिए पैसा बाहर भेजने पर सख्त प्रतिबंध है। लॉटरी टिकट खरीदना, विदेशी मुद्रा में ट्रेडिंग (Forex Trading) करना, भारतीय कंपनियों के FCCBs खरीदना, आतंकवाद से जुड़ी संस्थाओं को धन भेजना या FATF द्वारा 'गैर-सहयोगी देशों' के रूप में चिह्नित राष्ट्रों में फंड ट्रांसफर करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
भारतीय अर्थव्यवस्था और बाहरी क्षेत्र का संकेत
LRS के तहत 20 बिलियन डॉलर से अधिक का यह प्रवाह भारतीय नागरिकों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती खर्च क्षमता, विदेशी परिसंपत्तियों में रुचि और वैश्विक शिक्षा व पर्यटन के प्रति रुझान को दर्शाता है।

Delight News

निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण

Delight News एक प्रमुख डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म है जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और जनता तक बिल्कुल सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय हिंदी खबरें पहुंचाना है। हम बिना किसी पक्षपात के राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीति, खेल, शिक्षा, सरकारी नौकरी और करंट अफेयर्स से जुड़ी हर छोटी-बड़ी ताजा खबरें आप तक सबसे पहले पहुंचाते हैं।
📬 हमसे संपर्क करें
delightnews.in@gmail.com Official YouTube Channel Official Instagram Profile

📍 अपनी लोकेशन Set करें



Privacy Policy & Terms

Delight News परिवार से जुड़ें

📱 और भी बेहतर अनुभव के लिए!

ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।

📥 Download Android App