
भीमबांध अभयारण्य में 63 करोड़ का टूरिज्म प्रोजेक्ट, कानूनी विवाद गहराया
बिहार सरकार ने भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य के भीतर ₹62.87 करोड़ की लागत से बड़े पैमाने पर पर्यटन सुविधाएं विकसित करने के लिए टेंडर जारी किया है। हालांकि, संरक्षित क्षेत्रों में निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट के कड़े प्रतिबंधों और वैधानिक नियमों के कारण यह परियोजना कानूनी विवादों के घेरे में आ गई है।
अभयारण्य में मेगा टूरिज्म प्रोजेक्ट की योजना
जारी किए गए टेंडर दस्तावेजों के अनुसार, इस महाकांक्षी परियोजना में अभयारण्य के भीतर हेलीपैड, 104 लग्जरी कॉटेज, 12 ट्री-हाउस, रेस्टोरेंट, कैफे, स्पा और बड़े सम्मेलनों व शादियों के लिए ऑडिटोरियम तक बनाने का प्रस्ताव है।
इस परियोजना के तहत भीमबांध को हॉस्पिटैलिटी और हेलीपैड के लिए, बेलाटांड को साहसिक गतिविधियों के लिए, चोरमारा को योग व वेलनेस ग्राम के लिए और भट्टा कोल को वाइल्डलाइफ सफारी व नेचर ट्रेल्स के लिए चिन्हित किया गया है।
कानूनी अड़चनें और सुप्रीम कोर्ट के आदेश
इस प्रोजेक्ट को लेकर सबसे बड़ा सवाल कानूनी प्रतिबंधों को लेकर उठ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने संरक्षित क्षेत्रों में व्यावसायिक और निर्माण गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाया है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत किसी भी अधिसूचित अभयारण्य के भीतर बिना वैधानिक और पर्यावरणीय मंजूरियों के पक्का निर्माण नहीं किया जा सकता।
भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य की भौगोलिक व जैविक समृद्धि
बिहार के मुंगेर, जमुई और लखीसराय जिलों में खड़गपुर पहाड़ियों के लगभग 682 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला भीमबांध अभयारण्य अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैविक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। दक्षिण में गंगा नदी के तट और छोटानागपुर पठार के उत्तरी किनारे पर स्थित यह अभयारण्य गंगा, गंडक, कोसी और सोन नदी प्रणालियों से पोषित होता है।
यह अभयारण्य मुख्य रूप से अपने प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों के लिए जाना जाता है। यहाँ उत्तरी उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती साल के वन पाए जाते हैं। इसके अलावा यह तेंदुआ, स्लोथ बियर, लकड़बग्घा, भेड़िया, बड़ी भारतीय नागरिक बिल्ली (लार्ज इंडियन सिवेट) और भौंकने वाले हिरण (बारकिंग डियर) जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित प्राकृतिक आवास है।

भूजल संकट दूर करेगा 'पुनः भरण' ऐप, जानें इसकी खासियत
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने भूजल पुनर्भरण योजना को वैज्ञानिक दिशा देने के लिए 'पुनः भरण' मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। जीआईएस और जियोस्पेशियल तकनीक पर आधारित यह ऐप स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण को बढ़ावा देगा। BISAG-N और राष्ट्रीय जल मिशन द्वारा तैयार यह प्लेटफॉर्म जल प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
जल संरक्षण में जियोस्पेशियल तकनीक का कमाल
'पुनः भरण' ऐप को भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशंस एंड जियो-इन्फॉर्मेटिक्स (BISAG-N) ने राष्ट्रीय जल मिशन (NWM) के सहयोग से विकसित किया है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म भूजल प्रबंधन को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
ऐप की प्रमुख विशेषताएं
यह ऐप उपयोगकर्ताओं को अपने आसपास 3 किलोमीटर के दायरे में संभावित कृत्रिम पुनर्भरण क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करता है। इसके जरिए स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर सबसे उपयुक्त जल पुनर्भरण संरचनाओं (जैसे चेक डैम, तालाब या रीचार्ज वेल) का चयन किया जा सकता है।
इसके साथ ही, यह गांव के स्तर पर कृत्रिम पुनर्भरण संरचना मानचित्र, जीआईएस (GIS) टूल और विभिन्न थीमेटिक लेयर्स तक पहुंच प्रदान करता है। ऐप में वर्षा के आंकड़े, भूजल स्तर, जल उपज, ढलान और जल निकासी जैसे कई डेटासेट का उपयोग किया गया है ताकि सटीक योजना बनाई जा सके।
BISAG-N की भूमिका
इस ऐप के विकास में मुख्य भूमिका निभाने वाला BISAG-N, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है। गुजरात के गांधीनगर में स्थित यह संस्थान सैटेलाइट संचार, जियो-इन्फॉर्मेटिक्स और जियो-स्पेशियल तकनीक के क्षेत्र में काम करता है।
'पुनः भरण' ऐप देश में टिकाऊ जल प्रबंधन, भूजल स्तर सुधार और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

पश्चिमी घाट में मिली अनोखी खोज: सूक्ष्म घोंघे की नई प्रजाति
वैज्ञानिकों ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले स्थित तिलारी क्षेत्र में सूक्ष्म भूमि घोंघे (माइक्रोस्कोपिक लैंड स्नेल) की एक नई और दुर्लभ प्रजाति खोज निकाली है। इस नई प्रजाति का नाम 'डाइकारैक्स तिलारिएंसिस' रखा गया है। यह उत्तरी पश्चिमी घाट क्षेत्र से खोज की गई अपनी प्रजाति का दूसरा स्थानिक (एंडेमिक) घोंघा है।
जैव विविधता का नया खजाना
वैज्ञानिकों ने इस नई प्रजाति को 'डाइकारैक्स तिलारिएंसिस' (Dicharax tilariensis) नाम दिया है। इसका यह नाम उस खास तिलारी क्षेत्र के सम्मान में रखा गया है जहाँ इसे पहली बार देखा गया। वर्तमान में यह दुर्लभ प्रजाति समुद्र तल से 700 से 800 मीटर की ऊँचाई पर स्थित 'स्वप्नवेल पॉइंट' के आसपास के बेहद सीमित इलाके में ही पाई गई है। केवल एक ही जगह मिलने के कारण इसे तिलारी क्षेत्र का स्थानिक (एंडेमिक) जीव माना जा रहा है।
कहाँ और कैसे रहता है यह सूक्ष्म जीव
यह नन्हा घोंघा मुख्य रूप से क्षेत्र के अर्ध-सदाबहार जंगलों (Semi-evergreen forests) में अपना बसेरा बनाता है। यह मुख्य रूप से जंगल की जमीनी सतह पर सूखी पत्तियों, सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों और नमी से भरी मिट्टी के बीच सूक्ष्म वातावरण (माइक्रोहैबिटेट) में जीवित रहता है। पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में इस तरह के जीवों की अहम भूमिका होती है।
बनावट और अनोखी शारीरिक विशेषताएँ
आकार में बेहद छोटा होने के बावजूद इस घोंघे की शारीरिक संरचना काफी अद्भुत है। इसका शंख (शेल) चमकीला सफेद रंग का है, जिस पर हल्का गुलाबी या भूरापन झलगता है। अगर इसके आकार की बात करें तो इसकी चौड़ाई मात्र 4.21 से 4.87 मिलीमीटर और ऊँचाई 3.01 से 3.52 मिलीमीटर के बीच होती है। इसके शंख पर एक ऊँचा स्पायर, बारीक धारियों का एक खास पैटर्न और एक तीखा उभार बना होता है जो इसे अपनी श्रेणी के अन्य जीवों से अलग बनाता है।
अनुसंधान का महत्व
उत्तरी पश्चिमी घाट के प्राकृतिक पर्यावरण से इस जीनस की यह दूसरी स्थानिक प्रजाति दर्ज की गई है। इस नई खोज से साबित होता है कि पश्चिमी घाट का वन क्षेत्र आज भी अनगिनत सूक्ष्म जीवों और अनदेखी प्रजातियों का घर बना हुआ है। प्राकृतिक संरक्षण और इस क्षेत्र की अनोखी जैव विविधता को बचाने की दिशा में यह एक बेहद अहम कदम माना जा रहा है।

जापान के सकुराजिमा ज्वालामुखी में विस्फोट: नीले आसमान में उठा राख का गुबार
जापान के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक सकुराजिमा में हाल ही में एक जोरदार विस्फोट हुआ है, जिससे साफ नीले आसमान में राख का एक विशाल और घना गुबार छा गया। कगोशिमा शहर के पास स्थित इस स्ट्रेटोवोलकैनो में नियमित रूप से अलग-अलग स्तर के विस्फोट होते रहते हैं।
भौगोलिक स्थिति और संरचना
सकुराजिमा ज्वालामुखी दक्षिणी जापान के क्यूशू द्वीप के दक्षिणी छोर पर कगोशिमा शहर के करीब स्थित है। यह कगोशिमा खाड़ी (किंकोवान खाड़ी) में ऐरा काल्डेरा (Aira Caldera) के दक्षिणी किनारे पर मौजूद है। समुद्र तल से लगभग 1,117 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस ज्वालामुखी की परिधि लगभग 50 किलोमीटर है। एक अभिसारी प्लेट सीमा (Convergent Plate Margin) पर स्थित होने के कारण यह एक 'स्ट्रेटोवोलकैनो' (Stratovolcano) है, जो लावा और राख की विभिन्न परतों से मिलकर बना है।
द्वीप से मुख्य भूमि बनने का सफर
सकुराजिमा ज्वालामुखी का निर्माण लगभग 13,000 साल पहले शुरू हुआ था। साल 1914 से पहले सकुराजिमा कगोशिमा खाड़ी के बीच में स्थित एक द्वीप था। हालांकि, 1914 में हुए एक बहुत बड़े ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान निकले भारी मात्रा में लावे और मलबे के जमाव के कारण यह द्वीप जापान की मुख्य भूमि से जुड़ गया।
दो प्रमुख चोटियां और अनूठी विशेषताएं
सकुराजिमा एक एंडेसिटिक (Andesitic) ज्वालामुखी है, जिसका अर्थ है कि इसके लावे में गैस की मात्रा अधिक होती है और यह काफी गाढ़ा (Viscous) होता है। इसके दो मुख्य ज्वालामुखीय शिखर हैं—उत्तरी चोटी (कितादाके), जो पुरानी है और फिलहाल निष्क्रिय है, तथा दक्षिणी चोटी (मिनामीदाके), जो नई है और वर्तमान में सक्रिय है।
लगातार सक्रियता और प्राकृतिक स्थिति
यह जापान के सबसे खतरनाक और सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। वर्ष 1955 के बाद से सकुराजिमा में हर साल औसतन 100 से 200 बार छोटे-बड़े विस्फोट होते रहते हैं। इनमें से अधिकांश विस्फोट 'स्ट्रोमबोलियन' (Strombolian) प्रकार के होते हैं, जो मुख्य रूप से ज्वालामुखी के शिखर को ही प्रभावित करते हैं। प्रशासन और वैज्ञानिक इस इलाके में लगातार गश्त और निगरानी बनाए रखते हैं ताकि आसपास रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

भारत और मैक्सिको के बीच व्यापार समझौते का रास्ता साफ: साइन हुई ToR
भारत और मैक्सिको ने दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने के लिए 'शर्तों की रूपरेखा' (ToR) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। मैक्सिको में संपन्न इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों और व्यापारिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
भौगोलिक स्थिति और सीमाएं
उत्तरी अमेरिका के दक्षिणी हिस्से में स्थित मैक्सिको अपनी अनूठी भौगोलिक बनावट और सामरिक स्थिति के लिए जाना जाता है। इसके उत्तर में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और दक्षिण-पूर्व में ग्वाटेमाला तथा बेलीज की सीमाएं लगती हैं। इसके अलावा, इसके दक्षिण और पश्चिम में प्रशांत महासागर तथा पूर्व में मैक्सिको की खाड़ी और कैरिबियन सागर स्थित हैं, जो इसे एक महत्वपूर्ण समुद्री तटरेखा प्रदान करते हैं। मैक्सिको की राजधानी मैक्सिको सिटी है।
प्रमुख भौगोलिक विशेषताएं और 'रिंग ऑफ फायर'
मैक्सिको दुनिया के सबसे सक्रिय भूगर्भीय क्षेत्रों में से एक 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) का हिस्सा है, जिसके कारण इस क्षेत्र में अक्सर भूकंपीय गतिविधियां और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं। देश के भूगोल में बाजा प्रायद्वीप (Baja Peninsula) और यूकाटन प्रायद्वीप (Yucatan Peninsula) प्रमुख रूप से शामिल हैं। यहाँ की मुख्य पर्वत श्रृंखला 'सिएरा माद्रे' (Sierra Madre) है। रियो ग्रांडे नदी और कोलोराडो नदी (जो अमेरिका के साथ साझा होती है) यहाँ की प्रमुख नदियां हैं, जबकि लेक चापाला और लेक कुइत्जियो यहाँ की प्रमुख झीलें हैं।
प्राकृतिक संसाधनों का खजाना
प्राकृतिक संसाधनों के मामले में मैक्सिको बेहद समृद्ध देश है। यहाँ पेट्रोलियम, चांदी, एंटीमनी, तांबा, सोना, सीसा, जस्ता और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं। वैश्विक बाजार में मैक्सिको चांदी और अन्य खनिजों के बड़े उत्पादकों में गिना जाता है।
व्यापार समझौते के मायने
भारत और मैक्सिको के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू होने से दोनों देशों के उद्योगों, तकनीकी आदान-प्रदान और बाजार पहुंच को बढ़ावा मिलेगा। कृषि, तकनीक, फार्मास्यूटिकल्स और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ने से दोनों अर्थव्यवस्थाओं को बड़ा लाभ पहुंचेगा।
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