
पुझल झील में डूबे दो स्कूली छात्र, हालिया घटना से मचा हड़कंप
तमिलनाडु के थिरुवल्लूर जिले में स्थित प्रसिद्ध पुझल (रेड हिल्स) झील के पास एक दर्दनाक हादसे में दो 14 वर्षीय स्कूली छात्रों की डूबने से मौत हो गई। बचाव टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों बच्चों के शव बरामद कर लिए हैं। इस दुखद घटना के बाद से इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।
ब्रिटिश काल में बनी जीवनदायिनी झील
पुझल झील, जिसे रेड हिल्स झील के नाम से भी जाना जाता है, एक मानव निर्मित मीठे पानी की झील है। इसका निर्माण 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान किया गया था। यह चेन्नई शहर को पेयजल आपूर्ति करने वाले तीन प्रमुख वर्षा-पोषित जलाशयों में से एक है, जिसमें अन्य दो जलाशय चेंबारमक्कम झील और पोरूर झील शामिल हैं। यह विशाल झील बारिश और अन्य स्रोतों के पानी को संरक्षित करने वाले एक बड़े प्राकृतिक स्टोरेज टैंक की तरह काम करती है।
विशाल जल भंडारण और ऐतिहासिक जोन टावर
यह झील लगभग 3300 मिलियन क्यूबिक फीट पानी स्टोर करने की भारी क्षमता रखती है, जिसे बाद में ट्रीट करके पाइपलाइनों के जरिए चेन्नई के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुँचाया जाता है। इस झील का एक प्रमुख आकर्षण 'जोन टावर' है, जिसका निर्माण वर्ष 1881 में किया गया था। इस ऐतिहासिक टावर का उपयोग मुख्य रूप से झील के जलस्तर और गहराई की गणना करने के लिए किया जाता है।
प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल
मानव उपयोगिता और जल आपूर्ति के अलावा, यह झील पर्यावरण और जैव विविधता के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र स्थानीय जलपक्षियों और दूर-दराज से आने वाले प्रवासी पक्षियों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है। विशेष तौर पर शरद और सर्दियों के मौसम में, सेंट्रल एशियन फ्लाईवे (CAF) के रास्ते हजारों की संख्या में trans-continental प्रवासी पक्षी खुले पानी और प्रचुर मात्रा में भोजन की तलाश में इस झील का रुख करते हैं।

महा नवमी पर खुले काठमांडू के ऐतिहासिक तलेजू भवानी मंदिर के कपाट
बड़ा दशैं (दशहरा) पर्व के अवसर पर नेपाल के काठमांडू स्थित प्रसिद्ध और ऐतिहासिक तलेजू भवानी मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। वर्ष में केवल एक बार महा नवमी के दिन खुलने वाले इस ऐतिहासिक मंदिर में देवी भवानी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए हजारों की संख्या में भक्त उमड़े।
मल्ला राजवंश से जुड़ा समृद्ध इतिहास
तलेजू भवानी मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में मल्ला राजा महेंद्र मल्ला ने करवाया था। 12वीं से 18वीं शताब्दी के दौरान काठमांडू घाटी पर शासन करने वाले मल्ला राजवंश में देवी तलेजू भवानी को अपनी कुलदेवी और सुरक्षात्मक देवी के रूप में पूजा जाता था। हिंदू धर्म में देवी तलेजू भवानी को शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा का ही एक स्वरूप माना जाता है। पूरे साल बंद रहने वाला यह मंदिर पारंपरिक दशैं पर्व की नवमी तिथि को ही खुलता है, जिस कारण इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
नेवार पैगोडा वास्तुकला की अद्भुत मिसाल
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह मंदिर अपनी विशिष्ट नेवार पैगोडा शैली की वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। तीन मंजिला पैगोडा छत, बारीक नक्काशीदार लकड़ी के ईव्स और सुनहरे कलश इस मंदिर की भव्यता में चार चांद लगाते हैं। यह मंदिर 12-स्तरीय चबूतरे (प्लिंथ) पर बना है, जो ब्रह्मांड की परतों और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतिनिधित्व करता है। इसके चार मुख्य प्रवेश द्वारों पर पत्थर के शेर पहरा देते हैं, जबकि आंतरिक गर्भगृह में दस हाथों वाली देवी की सुनहरी प्रतिमा स्थापित है।
श्री यंत्र पर आधारित पवित्र बनावट
मंदिर की पूरी संरचना और स्थापत्य योजना पवित्र ज्यामितीय आरेख 'श्री यंत्र' पर आधारित है, जिसे स्वयं देवी का भौतिक रूप माना जाता है। नक्काशीदार लकड़ी की खिड़कियां और प्रवेश द्वारों के ऊपर बने तोरण इसकी प्राचीन कलात्मकता को दर्शाते हैं। महा नवमी के इस विशेष दिन पर श्रद्धालुओं ने पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ पूजा-अर्चना की और सुरक्षा, समृद्धि तथा शांति की प्रार्थना की।

साइलेंट किलर ऑस्टियोपोरोसिस: अब युवाओं को भी शिकार बना रही खोखली हड्डियों की बीमारी
आमतौर पर बुजुर्गों और मेनोपॉज के बाद महिलाओं में देखी जाने वाली ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की कमजोरी) की बीमारी अब युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। इसे 'साइलेंट डिसीज' कहा जाता है क्योंकि बिना फ्रैक्चर के इसके लक्षण आसानी से नजर नहीं आते। खानपान में सुधार, व्यायाम और समय पर जांच ही इससे बचाव का मुख्य जरिया हैं।
क्या है ऑस्टियोपोरोसिस और इसके कारण
'ऑस्टियोपोरोसिस' का शाब्दिक अर्थ 'छिद्रयुक्त या खोखली हड्डी' होता है। स्वस्थ हड्डियों की बनावट सूक्ष्मदर्शी से देखने पर मधुमक्खी के छत्ते जैसी दिखाई देती है, जबकि ऑस्टियोपोरोसिस होने पर ये छिद्र काफी बड़े हो जाते हैं। हमारा शरीर पुरानी हड्डियों के ऊतकों को नष्ट कर नए ऊतक बनाता है। लेकिन जब नई हड्डियों के बनने की गति पुरानी हड्डियों के नष्ट होने की दर से धीमी हो जाती है, तो बोन डेंसिटी (अस्थि घनत्व) कम होने लगती है। यह समस्या मुख्य रूप से 50 वर्ष से अधिक उम्र, महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी, स्टेरॉयड दवाओं के अत्यधिक सेवन और थायराइड के असंतुलन के कारण होती है।
'साइलेंट किलर' के रूप में पहचान
ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर एक 'साइलेंट बीमारी' कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरणों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। अधिकांश लोगों को इसका पता तब चलता है जब उन्हें कोई फ्रैक्चर हो जाता है। हालांकि, गंभीर स्थिति में कमर दर्द (रीढ़ की हड्डी के दबने से), समय के साथ धीरे-धीरे लंबाई में कमी आना और झुककर चलने जैसी शारीरिक दिक्कतें दिखाई देने लगती हैं। यह बीमारी सबसे ज्यादा रीढ़ की हड्डी, कूल्हे (Hip) और कलाई को प्रभावित करती है।
बचाव और उपचार के रास्ते
हड्डियों को जीवनभर मजबूत बनाए रखने के लिए समय रहते जीवनशैली में बदलाव करना बेहद आवश्यक है। आहार में कैल्शियम और विटामिन-डी से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना, रोजाना धूप सेकना और वजन उठाने वाले (Weight-bearing) व्यायाम करना बेहद फायदेमंद साबित होता है। यदि डॉक्टरी सलाह पर सही समय पर DEXA स्कैन जैसी जांच कराई जाए और आवश्यक सप्लीमेंट्स या दवाइयां ली जाएं, तो हड्डियों को टूटने से बचाया जा सकता है।

'ऑस्ट्राहिंद 2026' का आगाज: केरल में साथ आए भारत-ऑस्ट्रेलिया के शूरवीर
भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'ऑस्ट्राहिंद 2026' (AUSTRAHIND 2026) का 5वां संस्करण तिरुवनंतपुरम (केरल) में शुरू हो चुका है। इस अभ्यास में पहली बार न्यूजीलैंड का पर्यवेक्षक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य तटीय और द्वीपीय इलाकों में दोनों सेनाओं की रणनीतिक और परिचालन क्षमता को बढ़ाना है।
गढ़वाल राइफल्स और ऑस्ट्रेलियन 13 ब्रिगेड आमने-सामने
इस उच्चस्तरीय सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना दल का प्रतिनिधित्व 'गढ़वाल राइफल्स' की टुकड़ी और अन्य सेवाओं के कर्मी कर रहे हैं, जबकि ऑस्ट्रेलियाई सेना की ओर से 13वीं ब्रिगेड के सैनिक मैदान में हैं। दोनों देशों की सेनाओं की ओर से लगभग 120-120 सैन्यकर्मी इस युद्धाभ्यास का हिस्सा बने हैं। इसके अलावा, इस वर्ष की एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि यह है कि न्यूजीलैंड का एक पर्यवेक्षक (Observer) प्रतिनिधिमंडल भी पहली बार इस अभ्यास में भाग ले रहा है।
तटीय सुरक्षा और उन्नत तकनीक पर ध्यान केंद्रित
दो सप्ताह तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास का मुख्य ध्यान तटीय और द्वीपीय परिवेश में समन्वित अभियानों, निगरानी (Surveillance), टोही गतिविधियों (Reconnaissance) और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर रहेगा। इसके अलावा मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) स्थितियों से निपटने के साथ-साथ हवाई और समुद्री आयामों को शामिल करते हुए वास्तविक परिचालन स्थितियों में संयुक्त योजना व सामरिक युद्ध अभ्यास (Tactical Drills) किए जाएंगे।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में कदम
ऑस्ट्राहिंद 2026 का आयोजन केवल सैन्य कौशल के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक संदेश है। दोनों सेनाओं के बीच आपसी विश्वास और अंतर-संचालनीयता (Interoperability) बढ़ने से भविष्य में किसी भी सुरक्षा चुनौती या प्राकृतिक आपदा के समय त्वरित व प्रभावी प्रतिक्रिया देना संभव हो सकेगा।

हाईवे यात्रियों को एनएचएआई का तोहफा: 'राजमार्गयात्रा' ऐप पर आया फीडबैक फीचर
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपने 'राजमार्गयात्रा' मोबाइल ऐप पर एक नया 'टोल प्लाजा फीडबैक' फीचर लॉन्च किया है। इसके जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले यात्री टोल प्लाजा के अपने अनुभव को रेटिंग दे सकेंगे, समस्याओं की रिपोर्ट दर्ज कर सकेंगे और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सुझाव दे सकेंगे।
पारदर्शी और सरल फीडबैक प्रक्रिया
इस नए फीचर के तहत टोल प्लाजा पार करने के बाद ऐप उपयोगकर्ताओं को अपने अनुभव साझा करने का सीधा विकल्प मिलेगा। एनुअल पास यूजर्स को टोल पार करते ही फीडबैक देने के लिए नोटिफिकेशन मिलेगा, जबकि अन्य सभी यात्री ऐप के मेन्यू में जाकर किसी भी टोल प्लाजा को रेटिंग दे सकते हैं। यात्री टोल सुविधाओं, कर्मचारियों के व्यवहार या यात्रा के दौरान आई कठिनाइयों पर अपनी टिप्पणी दर्ज कर सकेंगे। NHAI प्राप्त फीडबैक का विश्लेषण कर सीधे उन क्षेत्रों की निगरानी और सुधार करेगा जहां बदलाव की जरूरत है।
राजमार्गयात्रा ऐप की अन्य प्रमुख विशेषताएं
एनएचएआई द्वारा विकसित 'राजमार्गयात्रा' ऐप हिंदी, अंग्रेजी और 13 से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध एक ऑल-इन-वन डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसमें एकीकृत 'रूट प्लानर' के जरिए पूरे सफर का टोल शुल्क जाना जा सकता है और निकटतम पेट्रोल पंप, अस्पताल व होटलों की जानकारी हासिल की जा सकती है। इसके अलावा, उपभोक्ता ऐप से ही FASTag रिचार्ज, एनुअल पास प्रबंधन और ओवर-स्पीडिंग अलर्ट जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
त्वरित शिकायत निवारण और आपातकालीन सुरक्षा
राजमार्गों पर गड्ढों, सड़क की स्थिति या गंदे शौचालयों जैसी समस्याओं के समाधान के लिए ऐप में जियो-टैग फोटो और वीडियो अपलोड करने की सुविधा मौजूद है। इन शिकायतों का समयबद्ध सीमा में निपटान किया जाता है और देरी होने पर मामला उच्च अधिकारियों तक स्वतः पहुंच जाता है। आपात स्थिति में यात्री ऐप में दिए गए 24x7 हेल्पलाइन नंबर '1033' पर एक क्लिक के जरिए तुरंत सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
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