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कामचटका प्रायद्वीप में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, शिवेलुच ज्वालामुखी फटा

कामचटका प्रायद्वीप में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, शिवेलुच ज्वालामुखी फटा

Delight News
📅 18 Oct2026

रूस के सुदूर पूर्वी कामचटका प्रायद्वीप में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया है। इस तेज भूकंपीय हलचल के तुरंत बाद क्षेत्र का प्रसिद्ध शिवेलुच ज्वालामुखी सक्रिय हो गया और उससे कई किलोमीटर ऊंची राख की गुबार उठने लगी।

रूस के सुदूर पूर्व में स्थित कामचटका प्रायद्वीप एक बार फिर भीषण प्राकृतिक हलचल का केंद्र बना है। इस तटीय क्षेत्र में रिक्टर पैमाने पर 7.0 तीव्रता का भीषण भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप के शक्तिशाली झटकों के तुरंत बाद क्षेत्र में स्थित सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक 'शिवेलुच' विस्फोट के साथ धधक उठा, जिससे आसमान में कई किलोमीटर तक राख और धुएं का गुबार फैल गया।
'लैंड ऑफ फायर एंड आइस': कामचटका की भौगोलिक स्थिति
रूस के सुदूर पूर्व में ओखोटस्क सागर, प्रशांत महासागर और बेरिंग सागर के बीच स्थित कामचटका प्रायद्वीप दुनिया के सबसे बड़े प्रायद्वीपों में से एक है। इसे 'अग्नि और बर्फ की भूमि' भी कहा जाता है। प्रशांत महासागर के संवेदनशील 'रिंग ऑफ फायर' (Pacific Ring of Fire) क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह भूगर्भीय गतिविधियों और उथल-पुथल का बड़ा केंद्र है। इस प्रायद्वीप पर 150 से अधिक ज्वालामुखी मौजूद हैं, जिनमें से 29 वर्तमान में भी बेहद सक्रिय हैं।
भूगर्भीय उथल-पुथल और शिवेलुच का विस्फोट
भूकंप का केंद्र तटीय शहर पेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की से कुछ दूरी पर समुद्र में स्थित था। झटकों के बाद शिवेलुच ज्वालामुखी के फटने से एविएशन सेक्टर के लिए चिंताएं बढ़ गईं और विमानों के मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए रेड अलर्ट जारी करना पड़ा। कामचटका का यह पूरा क्षेत्र भू-तापीय ऊर्जा और ज्वालामुखीय गतिविधि के लिए प्रसिद्ध है और इसके अनूठे परिदृश्य के कारण 'कामचटका के ज्वालामुखी' क्षेत्र को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल किया गया है।
जलवायु और तटीय क्षेत्रों पर प्रभाव
कामचटका प्रायद्वीप का मौसम काफी विषम और कठोर होता है, जहां अत्यधिक ठंडी और लंबी सर्दियां तथा गीली व ठंडी गर्मियां होती हैं। पूर्वी पर्वत श्रृंखला में स्थित 'क्लुचेव्स्काया सोपका' इसका सबसे ऊंचा बिंदु है। पैसिफिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट की सीमाओं पर स्थित होने के कारण यहाँ बार-बार शक्तिशाली भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं। हालांकि इस आपदा से किसी बड़े जन-धन के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन लगातार हो रहे आफ्टरशॉक्स के कारण तटीय और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क मोड पर हैं।
मैकक्वेरी द्वीप पर पहुंचा H5N1 बर्ड फ्लू, एलीफेंट सील पर मंडराया संकट

मैकक्वेरी द्वीप पर पहुंचा H5N1 बर्ड फ्लू, एलीफेंट सील पर मंडराया संकट

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📅 18 Oct2026

ऑस्ट्रेलिया ने सब-अंटार्कटिक में स्थित अपने दूरस्थ मैकक्वेरी द्वीप पर H5N1 बर्ड फ्लू के पहले मामले की पुष्टि की है। द्वीप की संवेदनशील एलीफेंट सील और समुद्री पक्षियों की आबादी में इस जानलेवा वायरस के मिलने से पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

सब-अंटार्कटिक क्षेत्र के पारिस्थितिकी संतुलन पर एक बड़ा संकट आन पड़ा है। ऑस्ट्रेलिया ने दूरस्थ मैकक्वेरी द्वीप पर घातक H5N1 बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) के पहले संक्रमण की पुष्टि की है। आधिकारिक परीक्षणों के बाद द्वीप की एलीफेंट सील (Southern Elephant Seal) और समुद्री पक्षियों (kelp gull) में इस जानलेवा वायरस की मौजूदगी पाई गई है, जिससे वन्यजीव विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
दक्षिण प्रशांत में जैविक विविधता का केंद्र
मैकक्वेरी द्वीप प्रशांत महासागर के दक्षिण-पश्चिम भाग में स्थित एक सब-अंटार्कटिक द्वीप है। रणनीतिक और भौगोलिक रूप से यह ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया राज्य का हिस्सा है और न्यूजीलैंड व अंटार्कटिका के लगभग मध्य में स्थित है। वर्ष 1997 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित यह 128 वर्ग किलोमीटर का द्वीप बिना इंसानी आबादी वाला क्षेत्र है। यह स्थान भू-संरक्षण के लिहाज से अनूठा है, क्योंकि धरती पर यही एकमात्र ऐसी जगह है जहाँ पृथ्वी की मेंटल (Mantle) की चट्टानें समुद्र तल से ऊपर दिखाई देती हैं।
वन्यजीवों के लिए प्रजनन का प्रमुख स्थल
यह द्वीप कई दुर्लभ प्रजातियों का घर और मुख्य प्रजनन स्थल है। यहाँ रॉयल पेंगुइन (जो केवल इसी द्वीप पर अंडे देती हैं), किंग पेंगुइन, जेंटू पेंगुइन और सदर्न रॉकहॉपर पेंगुइन की विशाल आबादी निवास करती है। इसके अलावा, फर् सील और सदर्न एलीफेंट सील के लिए यह द्वीप दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ठिकाना माना जाता है। H5N1 वायरस का प्रसार इन जीव-जंतुओं के लिए भारी तबाही का कारण बन सकता है।
पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि एलीफेंट सील इस वायरस के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं। आगामी प्रजनन सीजन के दौरान इस वायरस के कारण सील के शावकों की बड़े पैमाने पर मौत होने की आशंका जताई जा रही है। मैकक्वेरी द्वीप रिज प्रशांत और भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई टेक्टोनिक प्लेटों के मिलने का स्थान भी है, जो अंटार्कटिक सर्कम्पोलर सर्कुलेशन को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे संवेदनशील द्वीप पर वायरस का यह हमला पूरे दक्षिणी महासागर के जैव-पारिस्थितिकी चक्र को प्रभावित कर सकता है।
अंटार्कटिका का 'डूम्सडे ग्लेशियर': समुद्र का जलस्तर दोगुना तेजी से बढ़ाने का खतरा

अंटार्कटिका का 'डूम्सडे ग्लेशियर': समुद्र का जलस्तर दोगुना तेजी से बढ़ाने का खतरा

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📅 18 Oct2026

एक नए अध्ययन के अनुसार, अंटार्कटिका का 'डूम्सडे ग्लेशियर' कहे जाने वाला थवाइट्स ग्लेशियर 2100 तक वैश्विक समुद्र के स्तर में 3 सेंटीमीटर तक की वृद्धि कर सकता है। यह पिछली अनुमानित दर से दोगुना अधिक है, जो तटीय शहरों के लिए बड़ा खतरा है।

जलवायु परिवर्तन का संकट गहराने के साथ ही वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अंटार्कटिका के पश्चिमी तट पर स्थित 'थवाइट्स ग्लेशियर'—जिसे 'डूम्सडे ग्लेशियर' भी कहा जाता है—पहले के अनुमानों की तुलना में दोगुना तेजी से पिघल रहा है। नए अध्ययन के मुताबिक, साल 2100 तक अकेले यह ग्लेशियर वैश्विक समुद्र स्तर में 3 सेंटीमीटर तक की बढ़ोतरी कर सकता है।
विशालकाय क्षेत्रफल और संवेदनशीलता
थवाइट्स ग्लेशियर अमंडसन सागर से लगा एक विशाल और तेज गति से बहने वाला ग्लेशियर है। लगभग 1.92 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला यह ग्लेशियर अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के बराबर है। समुद्र के साथ इसका लगभग 120 किलोमीटर का इंटरफेस है, जो दुनिया में सबसे चौड़ा है। यह ग्लेशियर वर्तमान में ही वैश्विक समुद्र स्तर में होने वाली वार्षिक वृद्धि में 4 प्रतिशत का योगदान देता है।
समुद्र के जलस्तर पर विनाशकारी प्रभाव
यदि थवाइट्स ग्लेशियर पूरी तरह से पिघल जाता है, तो यह वैश्विक महासागरों के जलस्तर को लगभग 65 सेंटीमीटर (2 फीट से अधिक) तक बढ़ा सकता है। इतना ही नहीं, यह ग्लेशियर एक प्राकृतिक बफर की तरह काम करता है जो आसपास के अन्य ग्लेशियरों को रोके रखता है। इसके कमजोर होने या ढहने से 'वेस्ट अंटार्कटिक आइस शीट' (WAIS) भी अस्थिर हो जाएगी, जिससे समुद्र का जलस्तर 3 मीटर तक और बढ़ सकता है।
गर्म होता पानी और भविष्य की चुनौतियां
वैज्ञानिकों के अनुसार वैश्विक तापमान में लगातार वृद्धि के कारण अमंडसन सागर के निचले हिस्सों का पानी गर्म हो रहा है। यह गर्म पानी समुद्र के भीतर ग्लेशियर के निचले हिस्से (आइस शेल्फ) को धीरे-धीरे पिघला रहा है, जिससे इसकी नींव अस्थिर हो रही है। समुद्र का स्तर बढ़ने से दुनिया भर के तटीय शहरों, द्वीपों और बंदरगाहों पर विनाशकारी बाढ़, कटाव और समुद्री तूफानों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
तंजावुर के वृहदेश्वर मंदिर में ASI ने शुरू किया संरक्षण कार्य

तंजावुर के वृहदेश्वर मंदिर में ASI ने शुरू किया संरक्षण कार्य

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📅 18 Oct2026

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने तमिलनाडु के तंजावुर स्थित ऐतिहासिक वृहदेश्वर मंदिर के ऊपरी प्राचीर (रैम्पर्ट) पर विशेष संरक्षण कार्य शुरू कर दिया है। चोल वास्तुकला के इस उत्कृष्ट नमूने को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने देश की प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। ASI ने तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित प्रसिद्ध वृहदेश्वर मंदिर के ऊपरी रैम्पर्ट (प्राचीर) पर संरक्षण और मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है, ताकि इस महान वास्तुकला की भव्यता को सुरक्षित रखा जा सके।
चोल वास्तुकला का स्वर्णिम प्रतीक: वृहदेश्वर मंदिर
भगवान शिव को समर्पित वृहदेश्वर मंदिर को 'पेरिया कोविल', 'राजराजेश्वर मंदिर' और 'राजराजेश्वरम' के नाम से भी जाना जाता है। इस भव्य मंदिर का निर्माण चोल सम्राट राजराजा प्रथम के संरक्षण में 1003 से 1010 ईस्वी के बीच कराया गया था। यह मंदिर 'ग्रेट लिविंग चोला टेम्पल्स' के तहत यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल का हिस्सा है, जिसमें गंगैकोंडा चोलपुरम और ऐरावतेश्वर मंदिर भी शामिल हैं।
बिना चूने के ग्रेनाइट से बनी अनूठी संरचना
यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का एक बेजोड़ और भव्य नमूना है। 40 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस पूरे मंदिर का निर्माण ग्रेनाइट पत्थरों से किया गया है, और हैरानी की बात यह है कि इसे बनाने में किसी भी तरह के मोटार (चूने या सीमेंट) का इस्तेमाल नहीं किया गया है। मंदिर का मुख्य टावर यानी 'विमानम' 66 मीटर ऊंचा है, जो दुनिया में अपने तरह का सबसे ऊंचा और अलंकृत टावर है। इसके शीर्ष पर मौजूद 'कुंबम' (कलश नुमा संरचना) एक ही चट्टान को तराश कर बनाया गया है, जिसका वजन लगभग 80 टन है।
विशाल नंदी और स्थापत्य कला की खासियत
मंदिर के प्रवेश द्वार पर पवित्र नंदी (बैल) की एक विशाल प्रतिमा है, जिसे भी एक ही पत्थर से तराशा गया है। इसकी लंबाई लगभग 4.9 मीटर और ऊंचाई 4.0 मीटर है। बाद के काल के तमिल मंदिरों के विपरीत, जहां गोपुरम (प्रवेश द्वार) मुख्य विमानम से ऊंचे होते हैं, वृहदेश्वर मंदिर में मुख्य विमानम ही सबसे ऊंचा रखा गया है, जो मुख्य गर्भगृह की प्रधानता को रेखांकित करता है।
सरकार ने FSIB का किया पुनर्गठन, SCL दास बने नए अध्यक्ष

सरकार ने FSIB का किया पुनर्गठन, SCL दास बने नए अध्यक्ष

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📅 18 Oct2026

केंद्र सरकार ने वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो (FSIB) का पुनर्गठन करते हुए पूर्व MSME सचिव एस.सी.एल. दास को तीन साल के लिए नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। FSIB सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों में शीर्ष पदों की नियुक्तियों के लिए सिफारिशें करता है।

केंद्र सरकार ने देश के वित्तीय क्षेत्र में शीर्ष नेतृत्व के चयन से जुड़े तंत्र को मजबूत करने के लिए वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो (FSIB) का पुनर्गठन किया है। इस पुनर्गठन के तहत पूर्व MSME सचिव और पूर्व IAS अधिकारी एस.सी.एल. दास को FSIB का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल अधिसूचना जारी होने की तिथि से तीन वर्षों के लिए होगा।
FSIB की संरचना और नया बोर्ड
FSIB वित्तीय सेवा विभाग (DFS), वित्त मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है, जिसने जुलाई 2022 में तत्कालीन बैंक बोर्ड ब्यूरो (BBB) का स्थान लिया था। इस निकाय के बोर्ड में अध्यक्ष के अलावाDFS सचिव, IRDAI अध्यक्ष और RBI के डिप्टी गवर्नर शामिल होते हैं। नए पुनर्गठन में अध्यक्ष के साथ बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों के विशेषज्ञों को अंशकालिक सदस्यों के रूप में भी शामिल किया गया है।
संस्थान की मुख्य भूमिका और कार्य
FSIB का प्राथमिक कार्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs), वित्तीय संस्थानों (FIs) और सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों (PSIs) के बोर्ड में पूर्णकालिक निदेशकों और गैर-कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए उपयुक्त उम्मीदवारों की सिफारिश करना है। यह संस्थान सरकार को निदेशकों की सेवा शर्तों, कार्यकाल विस्तार, पदमुक्ति और स्थानांतरण जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर भी सलाह देता है।
रणनीतिक विकास और भावी सलाह
शीर्ष नियुक्तियों के अलावा, FSIB सरकारी वित्तीय संस्थानों के लिए उपयुक्त प्रबंधन संरचना, प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली (Performance Appraisal System) और आचार संहिता लागू करने की दिशा में कार्य करता है। यह ब्यूरो सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों को व्यापार रणनीतियां तैयार करने, पूंजी जुटाने की योजना बनाने और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए प्रभावी प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करने में भी मार्गदर्शन प्रदान करता है।

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