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दुनिया में पहली बार: 3D प्रिंटिंग से हॉर्नबिल को मिली नई चोंच

दुनिया में पहली बार: 3D प्रिंटिंग से हॉर्नबिल को मिली नई चोंच

Delight News
📅 17 Oct2026

एम्स्टर्डम के आर्टिस चिड़ियाघर में एक घायल सदन ग्राउंड हॉर्नबिल की टूटी हुई चोंच को बदलने के लिए दुनिया में पहली बार 3D-प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। सीटी स्कैन और पुराने टुकड़ों की मदद से तैयार कृत्रिम चोंच को सर्जरी के जरिए लगाया गया, जिसके बाद पक्षी ने तुरंत इसका उपयोग करना शुरू कर दिया।

दुनिया की पहली अनूठी मेडिकल सर्जरी
नीदरलैंड्स के एम्स्टर्डम स्थित आर्टिस चिड़ियाघर में वन्यजीव चिकित्सा के इतिहास में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक घटना को अंजाम दिया गया है। यहाँ एक घायल सदन ग्राउंड हॉर्नबिल पक्षी की टूटी हुई चोंच को पूरी तरह से ठीक करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया है। यह अपनी तरह का दुनिया का पहला ऐसा मामला है जहां 3D-प्रिंटिंग तकनीक के जरिए किसी पक्षी की चोंच के ऊपरी और निचले दोनों हिस्सों को सफलतापूर्वक बदला गया है।
सीटी स्कैन और उन्नत तकनीक का कमाल
इस जटिल प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने अत्यधिक बारीकी से काम किया है। पक्षी की टूटी हुई चोंच के पुराने टुकड़ों और सीटी स्कैन की सटीक रिपोर्ट की मदद से डिजिटल रूप से एक नए और बिल्कुल सही आकार की चोंच का मॉडल तैयार किया गया। इसके बाद 3D-प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करके दो विशेष कृत्रिम हिस्से प्रिंट किए गए, जो पक्षी के लिए पूरी तरह से अनुकूल साबित हुए।
सर्जरी के तुरंत बाद शुरू किया इस्तेमाल
चिकित्सकों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था कि सर्जरी वाले दिन ही इस हॉर्नबिल पक्षी ने अपनी नई कृत्रिम चोंच का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। आमतौर पर इस तरह की गंभीर सर्जरी के बाद जीवों को रिकवर होने में लंबा समय लगता है, लेकिन इस उन्नत तकनीक ने पक्षी को तुरंत राहत प्रदान की है। वन्यजीव संरक्षण और पशु चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में इस सफलता को एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना: 18,000 से अधिक गांव बने 'आदर्श ग्राम'

प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना: 18,000 से अधिक गांव बने 'आदर्श ग्राम'

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📅 17 Oct2026

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की प्रमुख योजना 'प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना' (PM-AJAY) के तहत अब तक 18,093 गांवों को 'आदर्श ग्राम' घोषित किया जा चुका है। अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से चलाई जा रही इस सौ फीसदी केंद्रीय प्रायोजित योजना को डिजिटल पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए और अधिक पारदर्शी बनाया गया है।

अनुसूचित जाति (SC) समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना' (PM-AJAY) ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश भर में अनुसूचित जाति बहुल 18,093 गांवों को 'आदर्श ग्राम' के रूप में घोषित किया जा चुका है, जिससे इन क्षेत्रों में बुनियादी सेवाओं और विकास कार्यों को अभूतपूर्व गति मिली है।
योजना का परिचय और पृष्ठभूमि
वित्तीय वर्ष 2021-22 में शुरू की गई PM-AJAY एक व्यापक केंद्रीय योजना है, जिसे तीन पुरानी योजनाओं— प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (PMAGY), अनुसूचित जाति उप योजना के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (SCA to SCSP), और बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना (BJRCY)—का विलय करके तैयार किया गया है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित यह योजना गरीबी को कम करने, कौशल विकास के जरिए आजीविका के अवसर बढ़ाने और एससी-बहुसंख्यक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित है।
प्रमुख घटक और कार्यप्रणाली
इस योजना के तहत मुख्य रूप से तीन प्रमुख स्तंभों पर काम किया जाता है:
आदर्श ग्राम विकास: एससी-बहुसंख्यक गांवों को मॉडल गांवों के रूप में विकसित करना, ताकि वहां बुनियादी सुविधाओं की कोई कमी न रहे।
सहायता अनुदान (Grants-in-Aid): राज्य और जिला स्तर पर आजीविका परियोजनाओं, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता देना। इस घटक के तहत वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच राज्यों को लगभग 1,730 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिससे ढाई लाख से अधिक लाभार्थियों को सीधा लाभ मिला है।
छात्रावासों का निर्माण: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले एससी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में मदद के लिए छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत करना। सितंबर 2026 तक देश भर में 785 छात्र छात्रावासों का निर्माण पूरा हो चुका है।
डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शिता
योजना के क्रियान्वयन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने PM-AJAY पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च किए हैं। इससे कागजी कार्रवाई को खत्म करके वास्तविक समय (real-time) पर डिजिटल मॉनिटरिंग और डेटा-संचालित निर्णय लेने में मदद मिल रही है। यह योजना शत-प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है, जो समावेशी विकास और सशक्त भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही है।
तमिलनाडु से बुल्गारिया तक पहुंची जैविक पाम गुड़ पाउडर की पहली खेप

तमिलनाडु से बुल्गारिया तक पहुंची जैविक पाम गुड़ पाउडर की पहली खेप

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📅 17 Oct2026

तमिलनाडु के इरोड जिले से ताड़ के फूलों के रस से बने जैविक 'पाम' (Palmyra) गुड़ पाउडर की 1.755 टन की खेप बुल्गारिया के वार्ना शहर को निर्यात की गई है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले इस ताड़ के पेड़ का भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विशेष महत्व है।

भारत के पारंपरिक जैविक उत्पादों को वैश्विक बाजार में एक नई पहचान मिल रही है। हाल ही में तमिलनाडु के इरोड जिले से ताड़ के पेड़ों के फूलों के रस (ब्लॉसम नेक्टर) से तैयार 1.755 टन जैविक 'पाम' (Palmyra) गुड़ पाउडर का एक consignment बुल्गारिया के वार्ना शहर को निर्यात किया गया है। यह उपलब्धि भारत के स्वदेशी और प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को दर्शाती है।
ताड़ के पेड़ की अनूठी विशेषताएं और भौगोलिक अनुकूलन
ताड़ के पेड़ (Palmyra Palm) को आमतौर पर शुगर पाम, टॉडी पाम या फैन पाम के नाम से जाना जाता है। हालांकि यह मूल रूप से उष्णकटिबंधीय अफ्रीका का पौधा है, लेकिन भारत में इसकी व्यापक स्तर पर खेती और प्राकृतिक रूप से वृद्धि हुई है। भारत के मैदानी इलाकों में इन्हें अक्सर हवा के झोंकों को रोकने के लिए 'विंडब्रेक' के रूप में लगाया जाता है।
यह पेड़ रेतीली, लाल, काली मिट्टी और नदी की जलोढ़ मिट्टी सहित विभिन्न प्रकार की मिट्टी में आसानी से पनप सकता है। 750 मिलीमीटर से कम वार्षिक वर्षा वाले अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए भी यह बेहद उपयुक्त है। यह समुद्र तल से लेकर 800 मीटर की ऊंचाई तक उग सकता है और मुख्य रूप से बीजों के माध्यम से ही इसका प्रसार होता है।
स्वास्थ्यवर्धक लाभ और पारंपरिक महत्व
इस पेड़ का मुख्य उत्पाद इसके पुष्पक्रम के सिरप से मिलने वाला मीठा रस है, जिससे ताड़ी और गुड़ बनाया जाता है। पाम गुड़ (गुड़) गन्ने की सामान्य चीनी की तुलना में कहीं अधिक पौष्टिक होता है। पारंपरिक रूप से भारत का 'नाडर' समुदाय इस पेड़ से अपनी आजीविका चलाता है। इस पेड़ की लकड़ी, फल, रस, तने और पत्तियों का उपयोग विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों, फर्नीचर, निर्माण सामग्री और हस्तशिल्प के निर्माण में किया जाता है।
भारत और बेनिन के बीच उच्च स्तरीय वार्ता, द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी मजबूती

भारत और बेनिन के बीच उच्च स्तरीय वार्ता, द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी मजबूती

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📅 17 Oct2026

भारत और पश्चिमी अफ्रीकी देश बेनिन के बीच पोर्टो-नोवो में रक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आर्थिक क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए उच्च स्तरीय वार्ता आयोजित की गई है। अटलांटिक महासागर के तट पर बसा बेनिन अपनी अनूठी भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है।

भारत और पश्चिम अफ्रीका के प्रमुख देश बेनिन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए हाल ही में पोर्टो-नोवो में महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई है। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक मजबूत करना है, जो वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कूटनीतिक कदमों को दर्शाता है।
पश्चिम अफ्रीका में रणनीतिक स्थिति
बेनिन पश्चिमी अफ्रीका में स्थित एक खूबसूरत देश है, जिसकी राजधानी पोर्टो-नोवो है। इसकी भौगोलिक सीमाएं उत्तर-पूर्व में नाइजर, पूर्व में नाइजीरिया, पश्चिम में टोगो और उत्तर-पश्चिम में बुर्किना फासो से मिलती हैं। इसके दक्षिण में अटलांटिक महासागर की गिनी की खाड़ी (बाइट ऑफ बेनिन) के साथ एक छोटा सा तटीय इलाका भी है, जो इसे व्यापारिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है।
भौगोलिक विशेषताएं और प्राकृतिक संपदा
यहाँ की जलवायु गर्म और आर्द्र उष्णकटिबंधीय है। देश के मुख्य पठार का नाम 'ला टेरे डी बैरे पठार' (La Terre de Barre Plateau) है। बेनिन के उत्तर-पश्चिम में अताकोरा पर्वतमाला स्थित है, जो टोगो पर्वतमाला की ही एक शाखा है। इस देश का सबसे ऊंचा बिंदु माउंट सोकबारो है, जिसकी ऊंचाई 658 मीटर है। नाइजर और ओउमे (Ouémé) यहाँ की प्रमुख नदियां हैं। इसके अलावा, बेनिन चूना पत्थर, संगमरमर और सोने जैसे प्रमुख खनिजों से समृद्ध है, जो इसके आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
ब्लैक कैट्स का पराक्रम: प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड को दी स्थापना दिवस की बधाई

ब्लैक कैट्स का पराक्रम: प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड को दी स्थापना दिवस की बधाई

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📅 17 Oct2026

देश के प्रमुख काउंटर-टेरर फोर्स नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) यानी 'ब्लैक कैट्स' का स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बल के जवानों के अदम्य साहस, सटीकता और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

आतंकवाद के खिलाफ देश की सबसे मजबूत और अभेद्य ढाल माने जाने वाले नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के जवानों ने हाल ही में अपना स्थापना दिवस मनाया है। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लैक कैट्स कमांडोज के शौर्य, सटीकता और राष्ट्र सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की भरपूर सराहना की है। देश की सुरक्षा में तैनात इस विशिष्ट बल का इतिहास और इसकी कार्यशैली हमेशा से देशवासियों में गर्व की भावना जगाती रही है।
आतंकवाद के खिलाफ देश का विशेष बल
एनएसजी भारत का प्रमुख आतंकवाद-रोधी बल है, जिसे विशेष रूप से गंभीर आतंकवादी कृत्यों और असाधारण सुरक्षा स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित और सुसज्जित किया गया है। अपने काले रंग के विशेष कॉटन कवरऑल और बलक्लावा (या हेलमेट) पहनने के कारण इन्हें आमतौर पर 'ब्लैक कैट्स' के नाम से जाना जाता है। इस बल की स्थापना वर्ष 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद की गई थी। बाद में इसे 'राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड अधिनियम, 1986' के तहत वैधानिक दर्जा दिया गया, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करता है।
अनूठी संरचना और कार्यपद्धति
संरचनात्मक रूप से एनएसजी एक दो-स्तरीय मिश्रित बल है। इसका पहला हिस्सा 'विशेष कार्रवाई समूह' (SAG) है, जो पूरी तरह से भारतीय सेना से प्रतिनियुक्ति पर आए जवानों से बनता है और बल का मुख्य आक्रामक हिस्सा है। वहीं, दूसरा हिस्सा 'विशेष रेंजर समूह' (SRG) है, जिसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CRPF, BSF, ITBP, CISF) और राज्य पुलिस से लिया जाता है जो परिधि सुरक्षा, रसद और वीआईपी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। यह बल 'शीघ्र और तीव्र प्रहार' तथा कार्रवाई के बाद तुरंत पीछे हटने के बुनियादी सिद्धांत पर काम करता है।
प्रमुख जिम्मेदारियां और योगदान
एनएसजी के मुख्य उद्देश्यों में आतंकवादी खतरों को बेअसर करना, हवा और जमीन दोनों जगहों पर हाईजैकिंग की स्थितियों से निपटना, बम निस्तारण (आईईडी का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना), बंधक बनाना और वीआईपी सुरक्षा संभालना शामिल है। इसका आदर्श वाक्य 'सर्वत्र सर्वोत्कृष्ट सुरक्षा' है। इसके पास राष्ट्रीय बम डेटा केंद्र (NBDC) जैसी विशेष विंग भी है, जो देश भर की आतंकवादी बमबारी गतिविधियों का विश्लेषण कर कानून प्रवर्तन एजेंसियों को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है। असाधारण परिस्थितियों में देश की रक्षा करने वाली यह फोर्स हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक है।

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