
First BIMSTEC Home Ministers’ Meeting 2026 Opens in New Delhi
On 14 October 2026, the inaugural BIMSTEC Home Ministers’ Meeting commenced in New Delhi, bringing together senior officials from the eight member states. The session focused on enhancing regional security cooperation, counter‑terrorism measures, and border management. The meeting underscored the commitment of BIMSTEC partners to strengthen diplomatic ties and collaborative frameworks.

'माय भारत' मंच: युवा सशक्तिकरण और विकसित भारत का रोडमैप
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के अंतर्गत 'माय भारत' (MY Bharat) मंच ने 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत अभियान' के तहत देश भर में युवा संसदों और मेलों का आयोजन किया है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म 15 से 29 वर्ष के युवाओं को कौशल विकास, नेटवर्किंग और सामुदायिक परिवर्तन का अवसर प्रदान करता है।
सारांश
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के अंतर्गत 'माय भारत' (MY Bharat) मंच ने 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत अभियान' के तहत देश भर में युवा संसदों और मेलों का आयोजन किया है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म 15 से 29 वर्ष के युवाओं को कौशल विकास, नेटवर्किंग और सामुदायिक परिवर्तन का अवसर प्रदान करता है।
परिचय एवं नवीनतम पहल
हाल ही में 'माय भारत' (MY Bharat) मंच द्वारा 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत अभियान' के अंतर्गत देश भर के 1,469 स्थानों पर पड़ोस युवा संसदों (Neighbourhood Youth Parliaments) और युवा मेलों का आयोजन किया गया है। यह पहल देश के युवाओं को सकारात्मक दिशा देने, नशा मुक्त समाज के निर्माण और जमीनी स्तर पर जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित की गई है।
संस्थागत ढांचा और उद्देश्य
यह मंच युवा मामलों के विभाग, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के तहत स्थापित एक स्वायत्त निकाय है। इसे भारत सरकार द्वारा सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम XXI, 1860 के तहत एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य 15 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के गतिशील युवाओं की आवश्यकताओं को पूरा करना और उन्हें 'विकसित भारत' के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनने के लिए एक डिजिटल रूप से सशक्त मंच प्रदान करना है।
मंच की मुख्य विशेषताएं और कार्यप्रणाली
माय भारत प्लेटफॉर्म प्रौद्योगिकी आधारित एक संस्थागत तंत्र है जो युवाओं को सरकार, व्यवसाय और गैर-लाभकारी संगठनों के विभिन्न कार्यक्रमों व सीखने के अवसरों से जोड़ता है। यह मंच युवाओं को अपने कौशल-सेट और गतिविधियों को सूचीबद्ध करते हुए व्यक्तिगत प्रोफाइल बनाने की अनुमति देता है। इसके माध्यम से युवा एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं, संभावित मेंटर्स से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं तथा उद्योग जगत के साथ अपने पेशेवर नेटवर्क का विस्तार कर सकते हैं।
परीक्षाोपयोगी और प्रशासनिक महत्व
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय सामाजिक न्याय, मानव संसाधन विकास और सुशासन के अंतर्गत अत्यंत प्रासंगिक है। देश के जनसांख्यिकी लाभांश (Demographic Dividend) का सही दिशा में उपयोग करने, कौशल उन्नयन और युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए इस प्रकार के तकनीकी प्लेटफॉर्म एक प्रभावी प्रशासनिक और नीतिगत उपकरण हैं।

सारस क्रेन: अखिल भारतीय जनगणना, पारिस्थितिकी और संरक्षण स्थिति
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने भारत के सबसे ऊंचे उड़ने वाले पक्षी 'सारस क्रेन' (Sarus Crane) की आबादी का आकलन करने के लिए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण की घोषणा की है। आर्द्रभूमि (Wetlands) और कृषि-पारिस्थितिकी प्रणालियों के स्वास्थ्य के सूचक इस पक्षी को आवास विनाश, कीटनाशकों के उपयोग और बिजली की तारों से टकराने जैसे गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
सारांश
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने भारत के सबसे ऊंचे उड़ने वाले पक्षी 'सारस क्रेन' (Sarus Crane) की आबादी का आकलन करने के लिए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण की घोषणा की है। आर्द्रभूमि (Wetlands) और कृषि-पारिस्थितिकी प्रणालियों के स्वास्थ्य के सूचक इस पक्षी को आवास विनाश, कीटनाशकों के उपयोग और बिजली की तारों से टकराने जैसे गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
परिचय एवं वर्तमान संदर्भ
अक्टूबर 2026 में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने देश भर में सारस क्रेन की जनसंख्या का सटीक अनुमान लगाने, उनके प्रजनन स्थलों का मानचित्रण करने और संरक्षण नीतियों के लिए एक नया राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने हेतु अखिल भारतीय सारस क्रेन सर्वेक्षण का आयोजन किया है। यह पहल विश्व प्रवासी पक्षी दिवस के अवसर पर शुरू की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिक वैज्ञानिकों, स्थानीय समुदायों और वन विभागों के सहयोग से डेटा अंतराल को भरना है।
प्रमुख शारीरिक विशेषताएं एवं व्यवहार
सारस क्रेन (Antigone antigone) दुनिया का सबसे ऊंचा उड़ने वाला पक्षी है, जिसकी ऊंचाई लगभग 1.5 से 1.8 मीटर तक होती है। यह भारत में पाई जाने वाली क्रेन की एकमात्र स्थायी निवासी (Resident Breeding) प्रजाति है। इसका शरीर मुख्य रूप से स्लेटी (धूसर) रंग का होता है, जबकि सिर और ऊपरी गर्दन पर लाल रंग की त्वचा होती है। यह पक्षी एकनिष्ठ (Monogamous) होता है और जीवनभर एक ही साथी के साथ जोड़ा बनाकर रहता है।
आवास एवं वितरण
सारस क्रेन मुख्य रूप से आर्द्रभूमियों, दलदलों, उथले जल निकायों, घास के मैदानों और सिंचित कृषि क्षेत्रों (विशेषकर धान के खेतों) में निवास करते हैं। भारत में इनका मुख्य वितरण गंगा के मैदानी भागों, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा में है। इनमें से सर्वाधिक आबादी उत्तर प्रदेश में पाई जाती है, जहां इसे आधिकारिक राज्य पक्षी (State Bird) का दर्जा प्राप्त है।
प्रमुख खतरे एवं संरक्षण स्थिति
यह प्रजाति मुख्य रूप से आर्द्रभूमि के क्षरण, कृषि भूमि के उपयोग में परिवर्तन, रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग, हाई-टेंशन बिजली लाइनों से टकराकर करंट लगने, तथा आवारा कुत्तों द्वारा अंडों व चूजों के शिकार जैसे खतरों का सामना कर रही है। संरक्षण की दृष्टि से इसे आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट में 'सुभेद्य' (Vulnerable) श्रेणी में रखा गया है। इसके अतिरिक्त, यह साइट्स (CITES) के परिशिष्ट-II और भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत उच्च स्तरीय कानूनी सुरक्षा प्राप्त है।
परीक्षाोपयोगी एवं प्रशासनिक महत्व
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह विषय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के अंतर्गत अत्यंत प्रासंगिक है। सारस क्रेन कृषि-आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर स्पीशीज (Indicator Species) है। स्थानीय किसानों के साथ मिलकर सामुदायिक संरक्षण (Community Conservation) को बढ़ावा देना तथा ओवरहेड पावर लाइनों का सुरक्षित प्रबंधन करना प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण उपाय प्रस्तुत करता है।

विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट: भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर और वैश्विक परिदृश्य
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी प्रमुख फ्लैगशिप रिपोर्ट 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' (WEO) के अक्टूबर 2026 संस्करण में भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। मजबूत घरेलू मांग, सेवाओं में गति और ढांचागत सुधारों के बल पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
सारांश
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी प्रमुख फ्लैगशिप रिपोर्ट 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' (WEO) के अक्टूबर 2026 संस्करण में भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। मजबूत घरेलू मांग, सेवाओं में गति और ढांचागत सुधारों के बल पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
परिचय एवं पृष्ठभूमि
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा वर्ष में दो बार (अप्रैल और अक्टूबर में) 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' (WEO) रिपोर्ट जारी की जाती है। यह रिपोर्ट वैश्विक उत्पादन, मुद्रास्फीति, वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP), चालू खाता संतुलन और बेरोजगारी दर जैसे प्रमुख संकेतकों पर आंकड़े तथा पूर्वानुमान प्रदान करती है। हाल ही में अक्टूबर 2026 में जारी रिपोर्ट में आईएमएफ ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास अनुमान में उल्लेखनीय सुधार किया है।
भारत हेतु मुख्य आर्थिक अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जो पूर्व अनुमानों से अधिक है। आईएमएफ के अनुसार, भारत में उपभोग मांग, निजी निवेश में उछाल तथा जीवंत सेवा क्षेत्र के कारण यह मजबूत आर्थिक गति बनी हुई है। रिपोर्ट में भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति 2026 में 5 प्रतिशत रहने तथा चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी के 1.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
वैश्विक आर्थिक रुझान
वैश्विक स्तर पर आर्थिक वृद्धि दर 2026 में 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.4 प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान है। उभरते और विकासशील एशियाई देशों की वृद्धि दर 2026 में 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ऊर्जा लागत में वृद्धि, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक आर्थिक स्थिति खंडित और दबाव में है।
परीक्षाोपयोगी एवं प्रशासनिक महत्व
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और वैश्विक आर्थिक गतिशीलता के अंतर्गत महत्वपूर्ण है। वैश्विक मंदी और अनिश्चितता के दौर में भारत की 7 प्रतिशत की स्थिर वृद्धि दर देश की रणनीतिक स्वायत्तता, व्यापक आंतरिक बाजार और आर्थिक नीतियों की सुदृढ़ता को रेखांकित करती है।

अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष: निजी क्षेत्र में अनुसंधान का सशक्तिकरण
भारत सरकार की प्रमुख पहल अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष (RDIF) ने 19 द्वितीय-स्तरीय कोष प्रबंधकों (SLFMs) के पहले समूह की घोषणा की है। 1 लाख करोड़ रुपये के कॉर्पस वाले इस फंड का उद्देश्य अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए शून्य या कम ब्याज दरों पर दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराना है।
सारांश
भारत सरकार की प्रमुख पहल अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष (RDIF) ने 19 द्वितीय-स्तरीय कोष प्रबंधकों (SLFMs) के पहले समूह की घोषणा की है। 1 लाख करोड़ रुपये के कॉर्पस वाले इस फंड का उद्देश्य अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए शून्य या कम ब्याज दरों पर दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराना है।
परिचय एवं पृष्ठभूमि
अक्टूबर 2026 में अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष (RDIF) ने 19 द्वितीय-स्तरीय फंड मैनेजरों के पहले समूह की स्वीकृति के साथ अपनी परिचालन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। यह पहल भारत में अनुसंधान और विकास क्षेत्र में वित्तीय अंतर को दूर करने और उच्च-जोखिम वाले नवाचारों के लिए पेशेंट कैपिटल (दीर्घकालिक पूंजी) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
प्रशासनिक एवं शासी संरचना
इस योजना का नोडल विभाग विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) है। इसका संचालन अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के तहत गठित एक विशेष उद्देश्य कोष (Special Purpose Fund) और स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई द्वारा किया जा रहा है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाला ANRF शासी बोर्ड इस योजना को रणनीतिक दिशा प्रदान करता है।
कार्यान्वयन और वित्तपोषण ढांचा
RDIF की कुल बजटीय निधि 1 लाख करोड़ रुपये है। फंड सीधे उद्योगों या स्टार्टअप्स में निवेश न करके द्वितीय-स्तरीय फंड मैनेजरों (SLFMs) के माध्यम से पूंजी का वितरण करेगा। ये SLFMs वैकल्पिक निवेश कोष (AIF), विकास वित्त संस्थान (DFI) और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) हो सकते हैं, जो आरडीआई योगदान के बराबर निजी पूंजी जुटाने में भी मदद करेंगे।
मुख्य उद्देश्य और लक्षित क्षेत्र
इस फंड का मुख्य लक्ष्य सनराइज क्षेत्रों तथा रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में निजी अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना है। यह उच्च प्रौद्योगिकी तत्परता स्तरों (TRL) वाले परिवर्तनकारी प्रोजेक्ट्स का वित्तपोषण करने, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के अधिग्रहण और डीप-टेक फंड ऑफ फंड्स की स्थापना को सुविधाजनक बनाने पर केंद्रित है।
परीक्षाोपयोगी एवं प्रशासनिक महत्व
प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय भारतीय अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीतियों, और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प से सीधे तौर पर जुड़ा है। यह व्यवस्था सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भारत को वैश्विक अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए एक आधुनिक प्रशासनिक मॉडल प्रस्तुत करती है।
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