
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड द्वारा नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0 का शुभारंभ
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) द्वारा घरेलू पाइप्ड प्राकृतिक गैस (D-PNG) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 1 अक्टूबर 2026 को 'नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0' की शुरुआत की गई है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) द्वारा घरेलू पाइप्ड प्राकृतिक गैस (D-PNG) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 1 अक्टूबर 2026 को 'नेशनल पीएनजी ड्राइव 3.0' की शुरुआत की गई है।
अभियान का उद्देश्य और मुख्य लक्ष्य
31 मार्च 2027 तक छह महीने तक चलने वाले इस अभियान का मुख्य उद्देश्य घरों तक पीएनजी की पहुंच का विस्तार करना, निष्क्रिय कनेक्शनों को सक्रिय करना और मौजूदा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) बुनियादी ढांचे के उपयोग में सुधार करना है। इसके प्रमुख लक्ष्यों में पचास लाख नए डी-पीएनजी कनेक्शन देना, चालान रहित (unbilled) चालीस लाख कनेक्शनों को सक्रिय उपभोक्ताओं में बदलना तथा पचास लाख अतिरिक्त पंजीकरण करना शामिल है।
स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और ऊर्जा सुरक्षा का महत्व
सरकार पीएनजी को भारत के स्वच्छ, विश्वसनीय और किफायती ऊर्जा की ओर बढ़ने वाले संक्रमण का एक महत्वपूर्ण घटक मानती है। यह एलपीजी से पाइप्ड नेचुरल गैस की ओर बदलाव को सुगम बनाता है, कार्बन-सघन ईंधनों पर निर्भरता को कम करता है और भारत के 'नेट-जीरो' लक्ष्यों का समर्थन करता है। वर्तमान में प्राकृतिक गैस भारत के प्राथमिक ऊर्जा मिश्रण का लगभग 6 प्रतिशत है, जिसे सरकार द्वारा वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
रणनीतिक फोकस और ग्रामीण-अर्धशहरी विस्तार
जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 1.74 करोड़ पीएनजी उपभोक्ता थे, जिनमें से केवल 1.15 करोड़ ही सक्रिय रूप से बिल किए गए उपभोक्ता थे, जो नेटवर्क कनेक्टिविटी और वास्तविक उपयोग के बीच के अंतर को दर्शाता है। इसे ध्यान में रखते हुए, यह अभियान विशेष रूप से अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों पर जोर देता है, जहाँ नए स्थापित नेटवर्क अभी तक उपभोक्ता उपयोग में परिवर्तित नहीं हो पाए हैं।

एसएमई ग्रोथ फंड और आईटीएलए: आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के नए आयाम
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई ग्रोथ फंड (SGF) और 'एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण' (ITLA) देश के औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में दो महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम हैं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई ग्रोथ फंड (SGF) और 'एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण' (ITLA) देश के औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में दो महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम हैं।
एसएमई ग्रोथ फंड और विकास-चरण पूंजी की आवश्यकता
यह फंड केंद्रीय बजट के तहत छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए उपलब्ध दीर्घकालिक इक्विटी पूंजी की कमी को दूर करने के लिए स्थापित किया गया है। वर्तमान में अधिकांश सरकारी समर्थित फंड सूक्ष्म और शुरुआती चरण के उद्यमों पर केंद्रित हैं, जिसके कारण विस्तार की क्षमता रखने वाले मध्यम उद्यमों को पर्याप्त जोखिम पूंजी नहीं मिल पाती थी। एसएमई ग्रोथ फंड इस अंतराल को पाटते हुए व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य और स्केलेबल उद्यमों को 'पेशेंट ग्रोथ इक्विटी कैपिटल' प्रदान करेगा।
वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) के रूप में संरचनात्मक ढांचा
इस फंड को वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) के रूप में संरचित किया गया है, जिसमें सरकार द्वारा 10,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है। यह व्यवस्था संस्थागत पूंजी को जुटाने में सहायता करती है और निवेश को उन उद्यमों की ओर निर्देशित करती है जिनमें महत्वपूर्ण विस्तार क्षमता मौजूद है, जिससे क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को तीव्र गति मिलती है।
एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (आईटीएलए) की भूमिका
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत आईटीएलए देश के परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में खंडित योजना और कार्यान्वयन की समस्या को दूर करने के लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के रूप में कार्य करेगा। यह राष्ट्रीय शीर्ष संस्थान सड़क, रेलवे, बंदरगाह, नागरिक उड्डयन और शहरी गतिशीलता को एक व्यापक 'राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान' के तहत जोड़ेगा, जिससे बहु-मोडल बुनियादी ढांचे का सहज विकास सुनिश्चित हो सकेगा।

यर्सिनिया पेस्टिस जीवाणु से फैलने वाली बुबोनिक प्लेग की विशेषताएँ और संक्रमण
बुबोनिक प्लेग 'यर्सिनिया पेस्टिस' (Yersinia pestis) नामक एक जूनोटिक जीवाणु के कारण होने वाला गंभीर संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से छोटे स्तनधारियों और उनकी पिस्सू (Fleas) प्रजातियों में पाया जाता है।
बुबोनिक प्लेग 'यर्सिनिया पेस्टिस' (Yersinia pestis) नामक एक जूनोटिक जीवाणु के कारण होने वाला गंभीर संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से छोटे स्तनधारियों और उनकी पिस्सू (Fleas) प्रजातियों में पाया जाता है।
रोग के प्रकार और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्लेग मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है—बुबोनिक, सेप्टिसीमिया और न्यूमोनिक प्लेग। बुबोनिक प्लेग का नाम इसमें होने वाली सूजी हुई लसीका ग्रंथियों (बुबोज) के आधार पर रखा गया है। मध्य युग के दौरान 'ब्लैक डेथ' के नाम से कुख्यात इस महामारी ने यूरोप में लाखों लोगों की जान ली थी। सेप्टिसीमिया प्लेग तब होता है जब संक्रमण पूरे शरीर में फैल जाता है, जबकि न्यूमोनिक प्लेग फेफड़ों के संक्रमित होने पर फैलता है।
लक्षण, संचरण और ऊष्मायन अवधि
इस रोग के प्रमुख लक्षणों में अचानक तेज बुखार, ठंड लगना, पेट, हाथ और पैरों में दर्द, सिरदर्द तथा लसीका ग्रंथियों में मवाद से भरे बड़े और सूजे हुए उभार विकसित होना शामिल है। यह जीवाणु मुख्य रूप से संक्रमित कृन्तकों के पिस्सू के काटने, संक्रमित ऊतकों के सीधे संपर्क में आने और सांस के माध्यम से बूंदों के inhalation से फैलता है। बुबोनिक प्लेग की ऊष्मायन अवधि सामान्यतः दो से आठ दिन होती है।
उपचार और घातक दर
यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह बेहद घातक साबित हो सकता है; बुबोनिक प्लेग की मृत्यु दर तीस से साठ प्रतिशत तक होती है, जबकि न्यूमोनिक प्लेग का इलाज न होने पर यह सौ प्रतिशत घातक होता है। हालांकि, सिप्रोफ्लोक्सacin, लेवोफ्लोक्सासिइन, डॉक्सीसाइक्लिन और जेंटामिसीन जैसे एंटीबायोटिक्स के समय पर उपयोग से इस गंभीर बीमारी का प्रभावी इलाज और पूर्ण उपचार संभव है।

अफ्रीकी महाद्वीप की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना, ग्रैंड इथियोपियाई पुनर्जागरण बांध
इथियोपिया के 'ग्रैंड इथियोपियाई पुनर्जागरण बांध' (GERD) के पूर्ण संचालन ने मिस्र के ऐतिहासिक जल वर्चस्व को चुनौती दी है, जिससे यह क्षेत्रीय संसाधन विवाद संप्रभुता और सतत विकास की एक उच्च-दांव भू-राजनीतिक लड़ाई बन गया है।
इथियोपिया के 'ग्रैंड इथियोपियाई पुनर्जागरण बांध' (GERD) के पूर्ण संचालन ने मिस्र के ऐतिहासिक जल वर्चस्व को चुनौती दी है, जिससे यह क्षेत्रीय संसाधन विवाद संप्रभुता और सतत विकास की एक उच्च-दांव भू-राजनीतिक लड़ाई बन गया है।
भौगोलिक स्थिति और संरचनात्मक विशेषताएं
यह परियोजना इथियोपिया के बेनिशंगुल-गुमुज क्षेत्र में सूडान की सीमा के पास नील नदी की मुख्य सहायक नदियों में से एक, ब्लू नाइल पर स्थित है। 6.45 गीगावाट की क्षमता वाला यह अफ्रीका का सबसे बड़ा जलविद्युत संयंत्र है। इस परियोजना में रोलर-कॉम्पेक्टेड कंक्रीट से निर्मित 170 मीटर ऊंचा मुख्य गुरुत्वाकर्षण बांध और 1,875 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला एक विशाल जलाशय शामिल है, जिसमें 74 अरब घन मीटर पानी संग्रहित करने की क्षमता है।
स्वामित्व और विकास का दायरा
इस परियोजना का स्वामित्व 'इथियोपियन इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन' (EEPCO) के पास है। अप्रैल 2011 में शुरू हुए इस महत्वाकांक्षी निर्माण कार्य का मुख्य उद्देश्य देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना और पड़ोसी देशों को हरित ऊर्जा का निर्यात करके आर्थिक विकास को गति देना है।
भू-राजनीतिक विवाद और चिंताएं
मिस्र और सूडान इस विशाल बांध के निर्माण को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे उन्हें मिलने वाले नील नदी के पानी के हिस्से में भारी कमी आएगी। दोनों देशों ने इथियोपिया से तब तक जल भराव रोकने का आग्रह किया है जब तक कि जल उपयोग के तौर-तरीकों पर कोई त्रिपक्षीय समझौता नहीं हो जाता, हालांकि इथियोपिया ने इसे अपने संप्रभु अधिकारों के तहत आवश्यक करार दिया है।

प्रेस स्वतंत्रता और भारतीय प्रेस परिषद की वर्तमान संरचनात्मक चुनौतियाँ
भारतीय प्रेस परिषद (PCI) वर्तमान में अपनी कुल स्वीकृत क्षमता से आधे बल पर कार्य कर रही है, जिसमें एक भी सक्रिय पत्रकार या समाचार पत्र संपादक का शामिल न होना मीडिया विनियमन के क्षेत्र में एक गंभीर विषय है।
भारतीय प्रेस परिषद (PCI) वर्तमान में अपनी कुल स्वीकृत क्षमता से आधे बल पर कार्य कर रही है, जिसमें एक भी सक्रिय पत्रकार या समाचार पत्र संपादक का शामिल न होना मीडिया विनियमन के क्षेत्र में एक गंभीर विषय है।
भारतीय प्रेस परिषद का परिचय और उद्देश्य
यह संस्था प्रेस प्रेस अधिनियम, 1978 के तहत पुनर्गठित एक वैधानिक, अर्द्ध-न्यायिक और स्वायत्त निकाय है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय प्रेस की स्वतंत्रता को संरक्षित करना तथा देश में समाचार पत्रों और समाचार एजेंसियों के मानकों को बनाए रखना और उनमें सुधार करना है। यह संस्था पत्रकारीय नैतिकता के हनन या प्रेस की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप से संबंधित मामलों में सुनवाई करती है।
संरचना और प्रशासनिक गठन
परिषद के अध्यक्ष सामान्यतः सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होते हैं, जिनका चयन लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति और सदस्यों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि की समिति द्वारा किया जाता है। इसके कुल अट्ठाइस सदस्यों में से तेरह सदस्य कामकाजी पत्रकार होते हैं, जिनमें छह संपादक और सात अन्य पत्रकार शामिल होते हैं। इसके अलावा, समाचार पत्र मालिकों, समाचार एजेंसियों, संसद के पांच सदस्यों तथा शिक्षा, कानून और साहित्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल किया जाता है।
विनियामक शक्तियाँ और कार्यप्रणाली
यह परिषद समाचार पत्रों को उनकी स्वतंत्रता बनाए रखने में सहायता करती है और उच्च पेशेवर मानकों के अनुसार पत्रकारों के लिए आचार संहिता तैयार करती है। यह उन सभी विकासक्रमों की समीक्षा करती है जो सार्वजनिक हित के समाचारों के प्रसार को प्रतिबंधित करते हैं। इसके अतिरिक्त, विदेशी स्रोतों से प्राप्त आर्थिक सहायता के मामलों की जाँच करने तथा प्रेस के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों का न्यायसंगत निपटारा करने का अधिकार भी इस संस्था के पास निहित है।
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