Delight News Logo
Latest सामान्य ख़बरें सरकारी नौकरी करेंट अफेयर्स परीक्षा ज्ञान
RoSCTL योजना: वस्त्र निर्यात संवर्धन एवं कर प्रतिपूर्ति ढांचा

RoSCTL योजना: वस्त्र निर्यात संवर्धन एवं कर प्रतिपूर्ति ढांचा

Delight News
📅 22 Sep2026

आरओएसजीटीएल (RoSCTL) योजना भारतीय वस्त्र और परिधान क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात प्रोत्साहन ढांचा है। यह योजना उत्पादन प्रक्रिया में निहित राज्य और केंद्रीय करों का प्रतिपूर्ति करती है, जिससे निर्यातकों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में समान अवसर प्राप्त होते हैं।

शीर्षक (Title): RoSCTL योजना: वस्त्र निर्यात संवर्धन एवं कर प्रतिपूर्ति ढांचा
सारांश (Summary):
आरओएसजीटीएल (RoSCTL) योजना भारतीय वस्त्र और परिधान क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात प्रोत्साहन ढांचा है। यह योजना उत्पादन प्रक्रिया में निहित राज्य और केंद्रीय करों का प्रतिपूर्ति करती है, जिससे निर्यातकों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में समान अवसर प्राप्त होते हैं।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य
आरओएसजीटीएल (Rebate of State and Central Taxes and Levies) योजना की शुरुआत वस्त्र मंत्रालय द्वारा मार्च 2019 में की गई थी। यह पुरानी 'राज्य लेवी रिबेट' (RoSL) योजना का उन्नत संस्करण है। इसका मुख्य उद्देश्य परिधान और मेड-अप्स के निर्यात पर ड्यूटी ड्रामाक के अतिरिक्त, उत्पादन से पहले लगने वाले सभी अप्रत्यक्ष करों और शुल्कों की प्रतिपूर्ति करना है। इसके तहत बिजली शुल्क, मंडी कर और ईंधन कर जैसे उन स्थानीय करों को शामिल किया जाता है, जिन्हें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) या ड्यूटी ड्रामाक के माध्यम से वापस नहीं पाया जा सकता है।
योजना की कार्यप्रणाली एवं विशेषताएं
यह योजना निर्यातकों को उनके निर्यात के मुक्त-ऑन-बोर्ड (FOB) मूल्य के आधार पर हस्तांतरणीय और बिक्री योग्य ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स प्रदान करती है। ये स्क्रिप्स सीमा शुल्क प्रणाली पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किए जाते हैं, जिनका उपयोग माल के आयात पर मूल सीमा शुल्क (BCD) के भुगतान के लिए किया जाता है। प्रत्येक ई-स्क्रिप्ट की वैधता अवधि इसके निर्माण से एक वर्ष होती है। डीजीएफटी की Denied Entity List में शामिल संस्थाओं को छोड़कर, भारत में निर्मित परिधानों और मेड-अप्स के सभी निर्यातक इस योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र हैं।
आर्थिक महत्व एवं वैश्विक परिप्रेक्ष्य
यह ढांचा इस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत सिद्धांत पर आधारित है कि निर्यात पर करों और शुल्कों का बोझ नहीं होना चाहिए। उत्पादन लागत में छिपे हुए इन अतिरिक्त शुल्कों की रिबेट मिलने से भारतीय वस्त्र निर्माताओं की विनिर्माण लागत कम होती है। इससे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमतें प्रतिस्पर्धी बनती हैं और देश के कुल निर्यात में वस्त्र क्षेत्र का योगदान सुदृढ़ होता है। इस योजना का क्रियान्वयन वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा किया जाता है।
सल्फर की कीमतों में उछाल और भारतीय उर्वरक क्षेत्र

सल्फर की कीमतों में उछाल और भारतीय उर्वरक क्षेत्र

Delight News
📅 22 Sep2026

पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रन संघर्ष के कारण सल्फर की कीमतों में हो रही वृद्धि से भारत में डीएपी और एसएसपी जैसे प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। सल्फर रासायनिक उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से सल्फ्यूरिक एसिड के उत्पादन में किया जाता है।

शीर्षक (Title):
सल्फर की कीमतों में उछाल और भारतीय उर्वरक क्षेत्र
सारांश (Summary):
पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रन संघर्ष के कारण सल्फर की कीमतों में हो रही वृद्धि से भारत में डीएपी और एसएसपी जैसे प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। सल्फर रासायनिक उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से सल्फ्यूरिक एसिड के उत्पादन में किया जाता है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
सल्फर का भौगोलिक वितरण और प्राकृतिक उपलब्धता
सल्फर पृथ्वी की भूपर्पटी में तेरहवां सबसे प्रचुर तत्व है। यह प्राकृतिक रूप से शुद्ध तत्व के रूप में अथवा सल्फेट और सल्फाइड खनिजों के रूप में पाया जाता है। शुद्ध रूप में यह स्वादहीन, गंधहीन, भंगुर और हल्के पीले रंग का ठोस पदार्थ है, जो विद्युत का कुचालक है और पानी में अघुलनशील है। भारत में इसके प्रमुख भंडार पुगा घाटी (जम्मू-कश्मीर), अंडमान के बैरेन द्वीप, आंध्र प्रदेश, केरल और हिमाचल प्रदेश में स्थित हैं।
भू-राजनीतिक संघर्ष और उर्वरक क्षेत्र पर प्रभाव
पश्चिम एशिया तथा रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के परिणामस्वरूप सल्फर की वैश्विक आपूर्ति बाधित हुई है और इसके मूल्य में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है। भारत अपनी उर्वरक आवश्यकताओं के लिए आयातित कच्चे माल पर निर्भर है। सल्फर की कीमतें बढ़ने से डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP), सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) और अन्य जटिल उर्वरकों के निर्माण की लागत बढ़ गई है, जिससे देश के कृषि क्षेत्र और उर्वरक उपलब्धता पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
औद्योगिक और कृषि क्षेत्र में बहुआयामी उपयोग
सल्फर का सबसे बड़ा उपयोग सल्फ्यूरिक एसिड के उत्पादन में होता है, जो अयस्क प्रसंस्करण, उर्वरक निर्माण, तेल रिफाइनरी और अपशिष्ट जल उपचार के लिए अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, रबर के वल्कनीकरण, कृषि धूल (Agricultural dusts), फार्मास्युटिकल उत्पादों, कवकनाशक, डिटरजेंट और सल्फर लैंप जैसे प्रकाश-सृजन माध्यमों में भी सल्फर यौगिकों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।
भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'स्लाइनेक्स-26' का विशाखापत्तनम में आयोजन

भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'स्लाइनेक्स-26' का विशाखापत्तनम में आयोजन

Delight News
📅 22 Sep2026

भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'स्लाइनेक्स-26' का तेरहवां संस्करण विशाखापत्तनम में आयोजित किया जा रहा है। दो दशकों से अधिक पुराना यह सैन्य अभ्यास दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, आपसी विश्वास, अंतर-संचालन और द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'स्लाइनेक्स-26' का विशाखापत्तनम में आयोजन
सारांश
भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'स्लाइनेक्स-26' का तेरहवां संस्करण विशाखापत्तनम में आयोजित किया जा रहा है। दो दशकों से अधिक पुराना यह सैन्य अभ्यास दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, आपसी विश्वास, अंतर-संचालन और द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
विस्तृत विश्लेषण
परिचय और पृष्ठभूमि
भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'स्लाइनेक्स' की शुरुआत वर्ष 2005 में की गई थी। पिछले दो दशकों में इस सैन्य अभ्यास ने दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 'स्लाइनेक्स-26' इस श्रृंखला का तेरहवां संस्करण है, जो वर्तमान में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आयोजित किया जा रहा है।
सहभागिता और संचालन के चरण
इस सामरिक अभ्यास के तहत भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर कॉर्बेट 'INS कवरत्ती' और फ्लीट टैंकर 'INS ज्योति' कर रहे हैं। अभ्यास को दो मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है, जिनमें हार्बर चरण और सी चरण शामिल हैं। हार्बर चरण के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच पेशेवर बातचीत, क्रॉस-डेक विजिट, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान, योग सत्र, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इसके पश्चात आयोजित होने वाला सी चरण समुद्र में समन्वित गतिविधियों के माध्यम से परिचालन तालमेल और अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित होता है।
रणनीतिक और सामरिक महत्व
'स्लाइनेक्स' अभ्यास दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख मंच बन चुका है। यह पहल भारत के 'महासागर' (MAHASAGAR - Maritime Growth for All in the Region) दृष्टिकोण के अनुरूप है। यह अभ्यास एक सुरक्षित, स्थिर और समावेशी समुद्री पर्यावरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है तथा भारत और श्रीलंका के बीच चिरस्थायी समुद्री साझेदारी को और अधिक मजबूत करता है।
दामोदर नदी में हिलसा मछली का मिलना और भौगोलिक महत्व

दामोदर नदी में हिलसा मछली का मिलना और भौगोलिक महत्व

Delight News
📅 22 Sep2026

पश्चिम बंगाल की दामोदर नदी में हिलसा मछलियों का ऊपरी हिस्सों में मिलना विशेषज्ञों के लिए एक अध्ययन का विषय बना हुआ है। छोटा नागपुर पठार से निकलने वाली यह नदी भारत की प्रमुख औद्योगिक और खनिज पट्टी का आधार है, जो झारखंड और पश्चिम बंगाल से बहते हुए हुगली नदी में मिलती है।

शीर्षक (Title):
दामोदर नदी में हिलसा मछली का मिलना और भौगोलिक महत्व
सारांश (Summary):
पश्चिम बंगाल की दामोदर नदी में हिलसा मछलियों का ऊपरी हिस्सों में मिलना विशेषज्ञों के लिए एक अध्ययन का विषय बना हुआ है। छोटा नागपुर पठार से निकलने वाली यह नदी भारत की प्रमुख औद्योगिक और खनिज पट्टी का आधार है, जो झारखंड और पश्चिम बंगाल से बहते हुए हुगली नदी में मिलती है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
परिचय और भौगोलिक स्थिति
दामोदर नदी पूर्वी भारत की एक प्रमुख नदी है और यह गंगा नदी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह झारखंड के पलामू पहाड़ियों (छोटा नागपुर पठार) से निकलती है और दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर बहते हुए पश्चिम बंगाल के मैदानों से गुजरती है। अपने निचले मार्ग में यह कई सहायक नदियों से मिलती है और कोलकाता से 48 किलोमीटर दूर श्यामपुर के पास हुगली नदी में मिल जाती है। इसकी कुल लंबाई 592 किलोमीटर है। इस नदी को ऐतिहासिक रूप से पश्चिम बंगाल के मैदानों में भारी बाढ़ लाने के कारण "बंगाल का शोक" भी कहा जाता था।
औद्योगिक महत्व और संसाधन
दामोदर बेसिन को भारत का औद्योगिक और खनिज हृदयस्थल माना जाता है। यह क्षेत्र झरिया, रानीगंज, बोकारो, करणपुरा और गिरिडीह जैसे गोंडवाना कोयला क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिनमें भारत का अधिकांश उच्च श्रेणी का कोकिंग कोयला भंडार स्थित है। यह घाटी देश के लौह, इस्पात और तापीय विद्युत उद्योगों की नींव है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में बारakar, कोनार, जमुनिया, बोकारो, साली, घारी, गुआइया, खाडिया और भेरा नदियां शामिल हैं।
दामोदर घाटी परियोजना
दामोदर नदी और उसकी सहायक नदियों पर विकसित दामोदर घाटी परियोजना स्वतंत्र भारत की पहली प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। इसका मुख्य उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और विद्युत उत्पादन करना है। इस परियोजना का संचालन भारतीय सरकार के उपक्रम, दामोदर घाटी निगम (DVC) द्वारा किया जाता है, जिसकी स्थापना जुलाई 1948 में की गई थी। इसके अंतर्गत तिलैया, मैथन, कोनार और पंचेत बांधों के साथ-साथ दुर्गापुर बैराज का निर्माण किया गया है।
पैंगगंगा वन्यजीव अभयारण्य में बाघ संरक्षण और भौगोलिक महत्व

पैंगगंगा वन्यजीव अभयारण्य में बाघ संरक्षण और भौगोलिक महत्व

Delight News
📅 22 Sep2026

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में स्थित पैंगगंगा वन्यजीव अभयारण्य हाल ही में एक युवा बाघिन के स्थानांतरण से चर्चा में है। पेंगगंगा नदी से तीन तरफ से घिरा यह 325 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अपनी अनूठी जैव विविधता, बेसल्टिक चट्टानों और समृद्ध वनस्पतियों के कारण वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन का एक प्रमुख केंद्र है।

शीर्षक (Title): पैंगगंगा वन्यजीव अभयारण्य में बाघ संरक्षण और भौगोलिक महत्व
सारांश (Summary): महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में स्थित पैंगगंगा वन्यजीव अभयारण्य हाल ही में एक युवा बाघिन के स्थानांतरण से चर्चा में है। पेंगगंगा नदी से तीन तरफ से घिरा यह 325 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अपनी अनूठी जैव विविधता, बेसल्टिक चट्टानों और समृद्ध वनस्पतियों के कारण वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन का एक प्रमुख केंद्र है।
भौगोलिक अवस्थिति एवं नामकरण
पैंगगंगा वन्यजीव अभयारण्य महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में स्थित है। इस अभयारण्य का नाम पैंगगंगा (या पेंगंगा) नदी के नाम पर रखा गया है, जो वर्धा नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है। यह नदी इस अभयारण्य की तीन सीमाओं को घेरती है, जिससे यहाँ एक विशिष्ट जलीय और स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होता है। अभयारण्य का कुल क्षेत्रफल लगभग 325 वर्ग किलोमीटर है।
भूगर्भिक एवं पुरातात्विक विशेषताएँ
इस क्षेत्र की भूगर्भिक संरचना मुख्य रूप से बेसल्टिक चट्टानों से बनी है, जो क्षेत्र के थर्मल मास यानी ऊष्मीय द्रव्यमान में योगदान करती है। इसके अतिरिक्त, इस अभयारण्य में कई प्राचीन रॉक शेल्टर (शैल्य आश्रय) पाए गए हैं, जो पेट्रोग्लिफ्स (शैलचित्रों) से अलंकृत हैं। ये प्रागैतिहासिक अवशेष इस क्षेत्र में प्राचीन मानवीय गतिविधियों और मानव इतिहास के गहरे साक्ष्य प्रदान करते हैं।
वनस्पति एवं जीव-जंंतु
अभयारण्य की स्थलाकृति में रोलिंग हिल्स (घुमावदार पहाड़ियाँ), नदी घाटियाँ और सघन पर्णपाती वन शामिल हैं, जहाँ मुख्य रूप से सागौन और बांस के वृक्ष पाए जाते हैं। यहाँ की जीव-सम्पदा अत्यंत समृद्ध है, जिसमें बाघ, तेंदुआ, सियार, लोमड़ी, सांभर, नीलगाय, ब्लैक बक, चिंकारा, चौसिंगा और सेही जैसे कई वन्यजीव आश्रय लेते हैं। इसके अलावा, यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है, जहाँ गिद्ध, बुलबुल, फाख्ता, किंगफ़िशर, कोयल और चील जैसी विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
संरक्षण और हालिया विकास
महाराष्ट्र के बाघ संरक्षण कार्यक्रम के तहत इस अभयारण्य में एक युवा बाघिन को स्थानांतरित किया गया है, जिससे यहाँ स्थापित होने वाली बाघ आबादी में तीसरी बड़ी बिल्ली (big cat) शामिल हो गई है। यह कदम क्षेत्र में वन्यजीवों के संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन और पारिस्थितिक गलियारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है।

Delight News

निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण

Delight News एक प्रमुख डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म है जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और जनता तक बिल्कुल सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय हिंदी खबरें पहुंचाना है। हम बिना किसी पक्षपात के राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीति, खेल, शिक्षा, सरकारी नौकरी और करंट अफेयर्स से जुड़ी हर छोटी-बड़ी ताजा खबरें आप तक सबसे पहले पहुंचाते हैं।
📬 हमसे संपर्क करें
delightnews.in@gmail.com Official YouTube Channel Official Instagram Profile

📍 अपनी लोकेशन Set करें



Privacy Policy & Terms

Delight News परिवार से जुड़ें

📱 और भी बेहतर अनुभव के लिए!

ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।

📥 Download Android App