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प्रधानमंत्री द्वारा रूसी राष्ट्रपति को भेंट किया गया तिरुक्कुरल

प्रधानमंत्री द्वारा रूसी राष्ट्रपति को भेंट किया गया तिरुक्कुरल

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📅 13 Sep2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हालिया द्विपक्षीय बैठक में रूसी राष्ट्रपति को तमिल ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' का अनुवादित संस्करण भेंट किया गया है। संत तिरुवल्लुवर द्वारा रचित यह प्राचीन ग्रंथ नैतिकता, राजनीति और प्रेम के सिद्धांतों पर आधारित है, जो वैश्विक मंच पर भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

शीर्षक (Title):
प्रधानमंत्री द्वारा रूसी राष्ट्रपति को भेंट किया गया तिरुक्कुरल
सारांश (Summary):
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हालिया द्विपक्षीय बैठक में रूसी राष्ट्रपति को तमिल ग्रंथ 'तिरुक्कुरल' का अनुवादित संस्करण भेंट किया गया है। संत तिरुवल्लुवर द्वारा रचित यह प्राचीन ग्रंथ नैतिकता, राजनीति और प्रेम के सिद्धांतों पर आधारित है, जो वैश्विक मंच पर भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
परिचय एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तिरुक्कुरल प्राचीन दक्षिण भारतीय तमिल साहित्य और दर्शन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रामाणिक और प्रभावशाली ग्रंथ है। इसका सृजन महान संत-कवि तिरुवल्लुवर द्वारा लगभग दो सहस्र वर्ष पूर्व (300 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व के मध्य) किया गया था। 'तिरुक्कुरल' शब्द का शाब्दिक अर्थ 'पवित्र श्लोक' या 'पवित्र युग्म' होता है। यह कृति किसी विशिष्ट संप्रदाय, जाति, वर्ण या नस्ल के बंधनों से परे है और सार्वभौमिक मानवीय नैतिकता का संदेश देती है। हाल ही में इस प्राचीन ग्रंथ के अनुवादित संस्करण का कूटनीतिक उपयोग वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक साख को सुदृढ़ करता है।
ग्रंथ की संरचना और विभाजन
यह ग्रंथ कुल 1,330 संगीतमय द्विपदियों या श्लोकों से सुसज्जित है, जिन्हें 'कुरल' कहा जाता है। प्रत्येक कुरल में सटीक सात शब्दों का विन्यास होता है। इन श्लोकों को कुल 133 अध्यायों में व्यवस्थित किया गया है, जहाँ प्रत्येक अध्याय के अंतर्गत 10 श्लोक निर्धारित हैं। संपूर्ण कृति को तीन मुख्य पुस्तकों या खंडों में विभाजित किया गया है। प्रथम खंड 'धर्म' (अरम) नैतिकता और व्यक्तिगत मूल्यों को संबोधित करता है। द्वितीय खंड 'अर्थ' (पोरुल) समाज की राजनीति, भौतिकवाद और सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था को स्पष्ट करता है। तृतीय खंड 'प्रेम' (इंबम) मानव जीवन में प्रेम के विभिन्न आयामों और अनुभूतियों को रेखांकित करता है।
प्रमुख दार्शनिक विषय और मूल्य
तिरुक्कुरल के केंद्रीय कथ्य में मानव जीवन की वास्तविकताओं और उच्च नैतिक आचरण का प्रकटीकरण मिलता है। तिरुवल्लुवर ने स्पष्ट किया है कि नैतिकता विहीन जीवन मनुष्य को ईर्ष्या, द्वेष, लोभ और अहंकार के पाश में जकड़ लेता है, जिससे सामाजिक पतन होता है। ग्रंथ के शुरुआती अध्याय में ईश्वर को 'शुद्ध बुद्धि', करुणा और ज्ञान के प्रतीक के रूप में परिभाषित किया गया है। प्रेम के विभिन्न रूपों को अत्यंत शालीनता से प्रस्तुत किया गया है। सिविल सेवा परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह ग्रंथ शासन, नैतिकता और लोक सेवा के मूल सिद्धांतों को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रासंगिक है।
रूस द्वारा Su-57E हेतु S-71K क्रूज मिसाइल का अनावरण

रूस द्वारा Su-57E हेतु S-71K क्रूज मिसाइल का अनावरण

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📅 13 Sep2026

रूस ने मिस्र के अल अमीन इंटरनेशनल एयरशो के दौरान अपने Su-57E पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए नई 'एस-71के कोव्योर' एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल का सार्वजनिक अनावरण किया है। यह मिसाइल 300 से 350 किलोमीटर की मारक क्षमता, टर्बोजेट प्रोपल्शन और उन्नत स्टैंड-ऑफ वेपन तकनीक से लैस है।

शीर्षक (Title):
रूस द्वारा Su-57E हेतु S-71K क्रूज मिसाइल का अनावरण
सारांश (Summary):
रूस ने मिस्र के अल अमीन इंटरनेशनल एयरशो के दौरान अपने Su-57E पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए नई 'एस-71के कोव्योर' एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल का सार्वजनिक अनावरण किया है। यह मिसाइल 300 से 350 किलोमीटर की मारक क्षमता, टर्बोजेट प्रोपल्शन और उन्नत स्टैंड-ऑफ वेपन तकनीक से लैस है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
परिचय और पृष्ठभूमि
रूस ने हाल ही में मिस्र में आयोजित अल अमीन इंटरनेशनल एयरशो के दौरान अपनी अत्याधुनिक 'एस-71के कोव्योर' (S-71K Kovyor) एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल को पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया है। इस हथियार को विशेष रूप से रूस के पांचवीं पीढ़ी के उन्नत Su-57E लड़ाकू विमान के लिए विकसित किया गया है। यह मिसाइल रूस की सामरिक वायु क्षमताओं और वायु-से-सतह मारक तकनीक में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ
यह मिसाइल पारंपरिक बेलनाकार आकार के बजाय एक चपटे, चौड़े और विमान जैसी बनावट वाले प्लानफॉर्म पर आधारित है। इसके डिजाइन में असममित संरचना, ट्रेपेज़ोइडल नोज, चिन-माउंटेड ऑप्टिकल सेंसर, कम ऊंचाई पर स्थापित पंख और उल्टे वी-आकार की पूंछ शामिल हैं। आंतरिक ईंधन टैंक और टर्बोजेट प्रोपल्शन के संयोजन के कारण यह पारंपरिक ग्लाइड बम की तुलना में एक सक्रिय क्रूज उड़ान प्रोफ़ाइल प्रदान करती है, जिससे यह लॉन्च विमान से भिन्न अक्ष से लक्ष्य तक पहुंच सकती है।
सामरिक उपयोग और संचालन क्षमता
एस-71के मिसाइल जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली (INS) पर आधारित है और इसमें किसी जटिल टर्मिनल सीकर का अभाव है। इसे मुख्य रूप से पूर्व-प्रोग्राम किए गए निश्चित लक्ष्यों को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। यह मिसाइल उड़ान के दौरान लगभग 8,200 मीटर की ऊंचाई पर क्रूज करने में सक्षम है और इसके बाद जमीन के ऊपर 20 से 75 मीटर तथा जल क्षेत्र के ऊपर 5 से 15 मीटर की बेहद कम ऊंचाई पर नीचे उतरती है, जिससे लगातार रडार ट्रैकिंग कठिन हो जाती है। इसमें 250 किलोग्राम का ओएफएबी-250-270 उच्च-विस्फोटक विखंडन वारहेड लगाया गया है।
कजाखस्तान में दो सौ वर्षों बाद प्रजेवाल्स्की घोड़ों का जन्म

कजाखस्तान में दो सौ वर्षों बाद प्रजेवाल्स्की घोड़ों का जन्म

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📅 13 Sep2026

कजाखस्तान के केंद्रीय घास के मैदानों में दो प्रजेवाल्स्की घोड़ों के बच्चों का जन्म हुआ है, जो दो शताब्दियों से अधिक समय में इस क्षेत्र में पैदा होने वाले पहले जंगली घोड़े हैं। यह प्रजाति पालतू घोड़े की एकमात्र जीवित जंगली रिश्तेदार है और आईयूसीएन रेड लिस्ट में 'संकटग्रस्त' श्रेणी में दर्ज है।

कजाखस्तान में दो सौ वर्षों बाद प्रजेवाल्स्की घोड़ों का जन्म
कजाखस्तान के केंद्रीय घास के मैदानों में दो प्रजेवाल्स्की घोड़ों के बच्चों का जन्म हुआ है, जो दो शताब्दियों से अधिक समय में इस क्षेत्र में पैदा होने वाले पहले जंगली घोड़े हैं। यह प्रजाति पालतू घोड़े की एकमात्र जीवित जंगली रिश्तेदार है और आईयूसीएन रेड लिस्ट में 'संकटग्रस्त' श्रेणी में दर्ज है।
परिचय एवं भौगोलिक वितरण
प्रजेवाल्स्की घोड़ा (Equus ferus przewalskii) वर्तमान में घरेलू घोड़े का एकमात्र जीवित जंगली रिश्तेदार माना जाता है। इस प्रजाति का नामकरण प्रसिद्ध रूसी खोजकर्ता निकोलाई प्रजेवाल्स्की के नाम पर किया गया है। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से यह वन्य जीव रूस, कजाखस्तान, मंगोलिया और उत्तरी चीन के विस्तृत स्टेपी घास के मैदानों में बहुतायत में पाया जाता था। हाल ही में कजाखस्तान के केंद्रीय घास के मैदानों में स्थित पुनरुत्पादन केंद्र में दो शावकों का जन्म हुआ है, जो पिछले दो सौ वर्षों से अधिक समय में कजाखस्तान की भूमि पर पैदा होने वाले पहले जंगली घोड़े हैं।
शारीरिक विशेषताएँ एवं पारिस्थितिक भूमिका
इन घोड़ों की शारीरिक संरचना अद्वितीय होती है, जिसमें छोटा गर्दन, बड़ा सिर, छोटी टांगें और एक मजबूत व सुडौल शरीर शामिल है। इनके शरीर पर काले, खड़े बाल (माने) होते हैं और इनका रंग लाल-भूरे से क्रीम रंग का होता है, जिस पर पीठ पर एक स्पष्ट काली धारी पाई जाती है। ये जानवर मुख्य रूप से शाकाहारी (ग्रामिनिवोरस) होते हैं और घास व विभिन्न पौधों का सेवन करते हैं। ये 'हिंद-गट किण्वक' (hind-gut fermenters) होते हैं, यानी इन्हें जीवित रहने और पाचन के लिए भारी मात्रा में पानी और कम गुणवत्ता वाले भोजन की आवश्यकता होती है। पारिस्थितिकी तंत्र में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये सूखी वनस्पति को चरकर जंगलों में आग के जोखिम को कम करते हैं, इनके खुरों द्वारा मिट्टी की जुताई से नए पौधों को पनपने का अवसर मिलता है और ये परिदृश्य में बीजों का प्रभावी ढंग से प्रसार करते हैं।
संरक्षण स्थिति एवं चुनौतियाँ
प्रजेवाल्स्की घोड़े अत्यधिक कठोर जलवायु परिस्थितियों का सामना करने में पूर्ण रूप से सक्षम हैं, विशेषकर कजाखस्तान जैसी जगहों पर जहां तापमान माइनस तीस डिग्री सेल्सियस से भी नीचे गिर जाता है। ये दिवाचर और अति मिलनसार (ग्रेगरियस) जीव हैं जो आमतौर पर दस से बीस सदस्यों के छोटे झुंडों में निवास करते हैं। संरक्षण की दृष्टि से, अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में इस प्रजाति को 'संकटग्रस्त' (Endangered) श्रेणी के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है। इस प्रकार के पुनरुत्पादन कार्यक्रम इस विलुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।
संत तिरुवल्लुवर और तिरुकुरल: यूपीएससी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण

संत तिरुवल्लुवर और तिरुकुरल: यूपीएससी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण

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📅 12 Sep2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को संत तिरुवल्लुवर की प्राचीन तमिल कृति 'तिरुकुरल' का रूसी अनुवाद भेंट किया गया है। यह कृति सदाचार, शासन, और नैतिकता पर आधारित है, जो भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति और दक्षिण भारतीय साहित्य के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करती है।

शीर्षक (Title): संत तिरुवल्लुवर और तिरुकुरल: यूपीएससी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण
सारांश (Summary): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को संत तिरुवल्लुवर की प्राचीन तमिल कृति 'तिरुकुरल' का रूसी अनुवाद भेंट किया गया है। यह कृति सदाचार, शासन, और नैतिकता पर आधारित है, जो भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति और दक्षिण भारतीय साहित्य के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करती है।
संत तिरुवल्लुवर का परिचय
संत तिरुवल्लुवर तमिल संस्कृति के महान कवि और दार्शनिक माने जाते हैं। उनका जीवनकाल और सटीक जन्मतिथि को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है, परंतु तमिल साहित्य और समाज पर उनका प्रभाव अत्यंत गहरा और अकाट्य रहा है। उन्हें दक्षिण भारत के सबसे सम्मानित मनीषियों में गिना जाता है।
तिरुकुरल की विषयवस्तु और महत्व
उनकी प्रसिद्ध रचना 'तिरुकुरल' में कुल 1330 दोहे संकलित हैं। यह ग्रंथ मुख्य रूप से सदाचार, सुशासन, धन, सामाजिक ज़िम्मेदारी और प्रेम जैसे सार्वभौमिक विषयों पर आधारित है। इस साहित्यिक कृति को 'तमिल वेद' या 'पांचवां वेद' भी कहा जाता है, जो मानव जीवन के हर पहलू का मार्गदर्शन करती है।
सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक प्रसार
ब्रिक्स समिट से पहले भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा इस ग्रंथ का रूसी अनुवाद रूस के राष्ट्रपति को भेंट किया जाना सांस्कृतिक कूटनीति का एक अनूठा उदाहरण है। इसके माध्यम से प्राचीन भारतीय दर्शन, तमिल साहित्य और वैश्विक मंच पर भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूती मिलती है।
ब्रिक्स एजेंडा और वैश्विक कूटनीति में भारत की रणनीतिक भूमिका

ब्रिक्स एजेंडा और वैश्विक कूटनीति में भारत की रणनीतिक भूमिका

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📅 12 Sep2026

ब्रिक्स समूह का वर्तमान एजेंडा भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक आर्थिक सुधार के दौर से गुजर रहा है। भारत के समक्ष मध्य पूर्व संघर्ष और रूस-украina युद्ध के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाने, बहुपक्षीय मंचों पर वैश्विक दक्षिण की आवाज बुलंद करने और वित्तीय संस्थानों में व्यापक सुधार लाने की दोहरी चुनौती है।

ब्रिक्स एजेंडा और वैश्विक कूटनीति में भारत की रणनीतिक भूमिका
सारांश
ब्रिक्स समूह का वर्तमान एजेंडा भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक आर्थिक सुधार के दौर से गुजर रहा है। भारत के समक्ष मध्य पूर्व संघर्ष और रूस-украina युद्ध के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाने, बहुपक्षीय मंचों पर वैश्विक दक्षिण की आवाज बुलंद करने और वित्तीय संस्थानों में व्यापक सुधार लाने की दोहरी चुनौती है।
भू-राजनीतिक चुनौतियाँ और कूटनीतिक संतुलन
समकालीन वैश्विक परिदृश्य में ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष और रूस-украina युद्ध अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर रहे हैं। इन संघर्षों के बीच भारत की विदेश नीति रणनीतिक स्वायत्तता के सिद्धांतों पर आधारित है, जो विभिन्न विरोधी ध्रुवों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की मांग करती है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान एक संयुक्त घोषणा-पत्र जारी करना भारत के राजनयिक कौशल की कड़ी परीक्षा होगी, क्योंकि सदस्य देशों के बीच इन वैश्विक मुद्दों पर मतभेद स्पष्ट रूप से मौजूद हैं।
रूस और चीन के शीर्ष नेतृत्व की यात्राएं भारत को उच्च स्तरीय द्विपक्षीय और बहुपक्षीय परामर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती हैं। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्षेत्रीय संघर्षों की छाया ब्रिक्स के व्यापक आर्थिक और विकासात्मक एजेंडे को प्रभावित न कर सके। भारत पारंपरिक रूप से किसी भी गुटबंदी का समर्थन करने से बचता आया है और इस मंच का उपयोग शांति स्थापना, संवाद और कूटनीतिक समाधान के पक्ष में वैश्विक जनमत तैयार करने के लिए करता है।
बहुपक्षीय वित्तीय सुधार और न्यू डेवलपमेंट बैंक की भूमिका
वैश्विक वित्तीय वास्तुकला में सुधार ब्रिक्स एजेंडे का एक केंद्रीय स्तंभ रहा है। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान, जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक, समकालीन बहुध्रुवीय दुनिया की आर्थिक वास्तविकताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। ब्रिक्स मंच लंबे समय से इन संस्थाओं में मतदान सुधारों और कोटा पुनर्गठन की मांग करता रहा है ताकि विकासशील देशों को उचित निर्णय लेने की शक्ति मिल सके।
न्यू डेवलपमेंट बैंक ब्रिक्स देशों द्वारा स्थापित एक महत्वपूर्ण विकल्प है, जिसका उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस बैंक को मजबूत करने की दिशा में पूंजी आधार का विस्तार करना, नई विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को सदस्य के रूप में शामिल करना और पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों पर निर्भरता कम करना प्राथमिकता है। भारत इस दिशा में एक अधिक समावेशी और पारदर्शी वैश्विक वित्तीय प्रणाली के निर्माण की वकालत करता है जो विकासशील देशों के हितों की रक्षा कर सके।
लचीली आपूर्ति श्रृंखला और स्थानीय मुद्रा में व्यापार
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में हालिया व्यवधानों ने अर्थव्यवस्थाओं की संवेदनशीलता को उजागर किया है, जिससे लचीली और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकास आवश्यक हो गया है। ब्रिक्स सदस्य देश व्यापारिक बाधाओं को कम करने, रसद लागत को अनुकूलित करने और व्यापारिक प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने पर जोर दे रहे हैं। इसके साथ ही, अमेरिकी डॉलर पर वैश्विक व्यापार की अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना एक प्रमुख रणनीतिक लक्ष्य बन गया है।
स्थानीय मुद्रा भुगतान प्रणालियों के विकास से न केवल विनिमय दर के जोखिमों से राहत मिलती है, बल्कि पश्चिमी प्रतिबंधों के प्रभाव से भी अर्थव्यवस्थाओं को सुरक्षा मिलती है। भारत अपने राष्ट्रीय भुगतान निगम के माध्यम से डिजिटल भुगतान अवसंरचना के अनुभवों को अन्य सदस्य देशों के साथ साझा कर रहा है। इससे सीमा पार लेन-देन अधिक सुगम और सुरक्षित हो रहे हैं, जो अंततः अंतर-ब्रिक्स व्यापार को नई गति प्रदान करते हैं।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य सहयोग
डिजिटल समावेशन के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां वैश्विक स्तर पर एक मिसाल बन चुकी हैं। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, पहचान प्रणालियों और डिजिटल भुगतान के मोर्चों पर भारत के मॉडलों को ब्रिक्स मंच के माध्यम से अन्य विकासशील देशों तक पहुंचाया जा रहा है। यह सहयोग ग्लोबल साउथ के देशों को उनकी अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था के निर्माण और वित्तीय समावेशन को तेजी से प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में कोविड-19 महामारी के अनुभवों से सबक लेते हुए ब्रिक्स देशों के बीच टीकों के अनुसंधान, उत्पादन और वितरण के लिए सुदृढ़ तंत्र विकसित करने पर सहमति बन रही है। पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के आदान-प्रदान और स्वास्थ्य अनुसंधान नेटवर्क को मजबूत करने से सामूहिक जनस्वास्थ्य क्षमताओं में वृद्धि होती है। यह सहयोग न केवल आपातकालीन स्वास्थ्य संकटों से निपटने में सहायक है, बल्कि सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जलवायु वित्त, critical minerals और समावेशी कनेक्टिविटी
जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए जलवायु वित्त की आवश्यकता ब्रिक्स एजेंडे का एक अनिवार्य हिस्सा है। विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों को तकनीक और वित्तीय सहायता हस्तांतरित करने की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए ब्रिक्स मंच एक मजबूत दबाव समूह के रूप में कार्य करता है। भारत अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास के एजेंडे को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ा रहा है।
भविष्य की हरित प्रौद्योगिकियों और विनिर्माण क्षेत्रों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन खनिजों पर कुछ देशों की एकाधिकारवादी स्थिति को तोड़ने और पारदर्शी तथा सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। इसके साथ ही, भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं से परे हटकर समावेशी कनेक्टिविटी परियोजनाओं को बढ़ावा देना क्षेत्रीय एकीकरण को मजबूत करता है और आर्थिक विकास के नए द्वार खोलता है।

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