
वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार: संपूर्ण विवरण एवं विश्लेषण
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में वर्ष 2026 के लिए 65 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस वर्ष कुल 131 पुरस्कारों की घोषणा गणतंत्र दिवस पर की गई थी, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। यह आयोजन राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में वर्ष 2026 के लिए 65 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस वर्ष कुल 131 पुरस्कारों की घोषणा गणतंत्र दिवस पर की गई थी, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। यह आयोजन राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है।
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पद्म पुरस्कारों की पृष्ठभूमि और महत्व
भारत सरकार द्वारा वर्ष 1954 में स्थापित पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं। ये पुरस्कार कला, साहित्य, विज्ञान, चिकित्सा, खेल और सार्वजनिक सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण और विशिष्ट सेवा प्रदान करने वाले व्यक्तियों को प्रदान किए जाते हैं। ये सम्मान किसी भी भेदभाव के बिना, योग्यता आधारित सार्वजनिक पहचान के प्रतीक हैं।
पुरस्कारों का श्रेणीकरण
पद्म पुरस्कारों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
पद्म विभूषण: यह भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है, जो किसी भी क्षेत्र में असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है।
पद्म भूषण: यह तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए प्रदान किया जाता है।
पद्म श्री: यह चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है।
सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' है, जो कला, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्रों में अद्वितीय प्रदर्शन के लिए दिया जाता है।
चयन प्रक्रिया और पारदर्शिता
इन पुरस्कारों के लिए नामांकन प्रक्रिया अत्यंत व्यापक है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, केंद्र शासित प्रदेश, विभिन्न मंत्रालय और प्रबुद्ध नागरिक किसी भी योग्य व्यक्ति का नाम प्रस्तावित कर सकते हैं। नामांकन प्राप्त होने के बाद, प्रधानमंत्री द्वारा गठित 'पद्म पुरस्कार समिति' इन नामों की गहन समीक्षा करती है। समिति की अनुशंसाओं पर अंतिम अनुमोदन के लिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले 'गुमनाम नायकों' (Unsung Heroes) को भी राष्ट्रीय मंच पर सम्मान प्राप्त हो सके।
महत्वपूर्ण तथ्य और परीक्षा उपयोगी बिंदु
पुरस्कारों की घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर की जाती है।
पद्म पुरस्कार मरणोपरांत (Posthumously) भी दिए जा सकते हैं।
एक वर्ष में दिए जाने वाले कुल पुरस्कारों की संख्या (मरणोपरांत और विदेशियों को छोड़कर) 120 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
यह सम्मान कोई उपाधि नहीं है और प्राप्तकर्ता इसे अपने नाम के साथ प्रत्यय या उपसर्ग के रूप में उपयोग नहीं कर सकते।
पुरस्कार समारोह सामान्यतः मार्च या अप्रैल के महीने में राष्ट्रपति भवन में आयोजित किए जाते हैं।

BHARATI कार्यक्रम: भारतीय कृषि-खाद्य स्टार्टअप्स को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल
एपीडा (APEDA) द्वारा शुरू किया गया 'BHARATI' (भारत का हब फॉर एग्रीटेक, रेजिलिएंस, एडवांसमेंट एंड इनक्यूबेशन फॉर एक्सपोर्ट इनोवेशन) कार्यक्रम एक महत्वाकांक्षी एक्सपोर्ट एक्सीलरेसन पहल है। इसका उद्देश्य कृषि-खाद्य स्टार्टअप्स और एफपीसी (FPCs) को वैश्विक मानक के अनुरूप ढालकर भारत के 2030 तक 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करना है।
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एपीडा (APEDA) द्वारा शुरू किया गया 'BHARATI' (भारत का हब फॉर एग्रीटेक, रेजिलिएंस, एडवांसमेंट एंड इनक्यूबेशन फॉर एक्सपोर्ट इनोवेशन) कार्यक्रम एक महत्वाकांक्षी एक्सपोर्ट एक्सीलरेसन पहल है। इसका उद्देश्य कृषि-खाद्य स्टार्टअप्स और एफपीसी (FPCs) को वैश्विक मानक के अनुरूप ढालकर भारत के 2030 तक 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कृषि निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करना है।
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कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत एपीडा ने भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बनाने के लिए 'BHARATI' का शुभारंभ किया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में नवाचार (Innovation) और निर्यात-उन्मुख उद्यमिता को प्रोत्साहित करना है। यह पहल न केवल स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता प्रदान करती है, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और स्वच्छता प्रोटोकॉल (SPS) से भी परिचित कराती है।
निर्यात क्षमता का विस्तार और रणनीतिक लक्ष्य
भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक एपीडा-अनुसूचित उत्पादों के निर्यात को 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। BHARATI कार्यक्रम इसी लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो एक मजबूत 'एक्सपोर्ट-रेडी' एंटरप्राइज पाइपलाइन तैयार कर रहा है। यह पहल विशेष रूप से उन चुनौतियों का समाधान करती है जो लघु और मध्यम उद्यमों को वैश्विक बाजारों में प्रवेश करने से रोकती हैं, जैसे कि जटिल अनुपालन प्रक्रियाएं, लॉजिस्टिक्स बाधाएं और ब्रांडिंग की कमी।
पात्रता और समावेशी विकास
इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता इसकी समावेशी प्रकृति है। इसके माध्यम से केवल तकनीकी स्टार्टअप्स ही नहीं, बल्कि किसान उत्पादक कंपनियों (FPCs) और अनुसंधानकर्ताओं को भी एक साझा मंच मिला है। पात्रता के लिए स्टार्टअप का पांच वर्ष से कम पुराना होना और वार्षिक टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना अनिवार्य है। साथ ही, 17 से 75 वर्ष तक के उद्यमियों की भागीदारी यह प्रदर्शित करती है कि कृषि निर्यात में नवाचार किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं है।
कार्यक्रम की कार्यप्रणाली और वैश्विक एक्सपोजर
BHARATI के तहत चयनित स्टार्टअप्स को 120 घंटे का सघन प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिसमें निर्यात तत्परता, नियामक अनुपालन, बिजनेस स्केलिंग और निवेशक जुड़ाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। इसके अतिरिक्त, टॉप-परफॉर्मिंग स्टार्टअप्स को गल्फूड 2026 जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपना उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया है, जो उन्हें सीधे वैश्विक खरीदारों और वितरकों के संपर्क में लाता है। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता वाले ब्रांड के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
नोडल एजेंसी: कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA)।
लक्ष्य: 2030 तक 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर का कृषि निर्यात।
प्रमुख फोकस: स्वच्छता और पादप स्वच्छता (SPS) समाधान और निर्यात-प्रथम दृष्टिकोण।
चयन प्रक्रिया: 700 से अधिक आवेदनों में से प्रथम चरण में 100 स्टार्टअप्स का चयन किया गया।
वैश्विक भागीदारी: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात को बढ़ावा देने के लिए दुबई स्थित 'गल्फूड' जैसे आयोजनों को मंच के रूप में चुना गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी पर संशोधित मुआवजा ढांचा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के मद्देनजर अपने मुआवजा ढांचे में व्यापक संशोधन किया है। अब यह ढांचा सोशल इंजीनियरिंग, डिजिटल अरेस्ट और क्रेडेंशियल चोरी जैसी आधुनिक धोखाधड़ी को भी शामिल करता है। इस पहल का उद्देश्य ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रति विश्वास को सुदृढ़ करना है।
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के मद्देनजर अपने मुआवजा ढांचे में व्यापक संशोधन किया है। अब यह ढांचा सोशल इंजीनियरिंग, डिजिटल अरेस्ट और क्रेडेंशियल चोरी जैसी आधुनिक धोखाधड़ी को भी शामिल करता है। इस पहल का उद्देश्य ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रति विश्वास को सुदृढ़ करना है।
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पृष्ठभूमि और आवश्यकता
वर्ष 2017 में लागू पूर्ववर्ती ढांचा मुख्य रूप से उन अनाधिकृत लेनदेन तक सीमित था जिनमें ग्राहक की कोई भूमिका नहीं होती थी, जैसे कि हैकिंग। हालांकि, डिजिटल परिदृश्य में हुए परिवर्तन के साथ 'सोशल इंजीनियरिंग' (धोखाधड़ी, प्रलोभन या जबरन लेनदेन की स्वीकृति) के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस बदलते परिवेश को देखते हुए RBI ने धोखाधड़ी की परिभाषा का विस्तार किया है।
संशोधित दायरे में शामिल प्रमुख बिंदु
नए दिशानिर्देशों के तहत डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी (OTP) की धोखाधड़ी से प्राप्ति, बैंकिंग क्रेडेंशियल की चोरी और बैंक की लापरवाही या थर्ड-पार्टी सुरक्षा खामियों के कारण होने वाले लेनदेन को मुआवजे के दायरे में लाया गया है। यह व्यवस्था उन मामलों को भी कवर करती है जहां ग्राहक को प्रताड़ित या मजबूर करके लेनदेन के लिए राजी किया गया हो।
मुआवजा और पात्रता मानदंड
पात्रता के लिए, ग्राहक को घटना के पांच कैलेंडर दिनों के भीतर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, बैंक को निर्धारित समय सीमा के भीतर सूचित करना आवश्यक है। यदि कोई लेनदेन रिपोर्ट करने के बाद होता है, तो उसका पूर्ण रिफंड देय होगा। 50,000 रुपये तक के सकल नुकसान पर, ग्राहक को शुद्ध नुकसान का 85% या 25,000 रुपये (जो भी कम हो) का मुआवजा एक बार के लिए दिया जाएगा। इस राशि का अधिकांश हिस्सा स्वयं RBI द्वारा वहन किया जाएगा, शेष का वितरण संबंधित बैंकों के बीच होगा।
अस्वीकृति की शर्तें और ग्राहक की जिम्मेदारी
मुआवजे का लाभ उन ग्राहकों को नहीं मिलेगा जिन्होंने बैंकों द्वारा जारी धोखाधड़ी संबंधी चेतावनियों की अनदेखी की है। इसके अतिरिक्त, यदि किसी ग्राहक ने अपने मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी को बैंक के साथ अपडेट नहीं रखा है, तो इसे ग्राहक की लापरवाही माना जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप मुआवजे का दावा खारिज किया जा सकता है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Key Facts for Exams)
नोडल एजेंसी: इस तंत्र के लिए प्राथमिक रिपोर्टिंग बिंदु 'राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन' है।
शून्य देयता (Zero Liability): धोखाधड़ी की सूचना बैंक को देने के बाद हुए किसी भी अनाधिकृत लेनदेन के लिए ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य होगी।
सोशल इंजीनियरिंग: यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उपयोगकर्ता को मनोवैज्ञानिक हेरफेर के जरिए गोपनीय जानकारी साझा करने या भुगतान करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
RBI का अधिदेश: यह संशोधन भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम के तहत डिजिटल सुरक्षा को अधिक कठोर बनाने के प्रयास का हिस्सा है।
सावधानी का सिद्धांत: मुआवजा तभी देय है जब ग्राहक ने 'बोनफाइड' (सद्भावपूर्ण) प्रयास किए हों और बैंक के सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया हो।

संयुक्त राष्ट्र का स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए वैश्विक मानक
संयुक्त राष्ट्र ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सामाजिक, आर्थिक और नैतिक प्रभावों का आकलन करने हेतु अपने पहले वैश्विक वैज्ञानिक पैनल का गठन किया है। आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर बी. रविंद्रन को इसमें शामिल किया गया है। यह पहल वैश्विक शासन को मजबूत करने, डिजिटल असमानता को कम करने और सुरक्षित एआई विकास को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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संयुक्त राष्ट्र ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सामाजिक, आर्थिक और नैतिक प्रभावों का आकलन करने हेतु अपने पहले वैश्विक वैज्ञानिक पैनल का गठन किया है। आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर बी. रविंद्रन को इसमें शामिल किया गया है। यह पहल वैश्विक शासन को मजबूत करने, डिजिटल असमानता को कम करने और सुरक्षित एआई विकास को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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पैनल का उद्देश्य और महत्व
संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित यह स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल एआई के क्षेत्र में पहली वैश्विक वैज्ञानिक संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य एआई प्रौद्योगिकियों के विकास और अनुप्रयोग का निष्पक्ष वैज्ञानिक विश्लेषण करना है। यह पैनल सरकारों और अंतरराष्ट्रीय निकायों को साक्ष्य-आधारित अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा ताकि एआई के तेजी से बढ़ते प्रसार के बीच एक जिम्मेदार वैश्विक ढांचा तैयार किया जा सके। पैनल की बहु-विषयक विशेषज्ञता एआई के संभावित लाभों और जोखिमों के बीच संतुलन बनाने में सहायक होगी।
वैश्विक शासन की आवश्यकता और चुनौतियां
एआई के वैश्विक शासन की आवश्यकता इसलिए है ताकि विखंडित नियामक दृष्टिकोणों को रोका जा सके और साझा अंतरराष्ट्रीय मानक स्थापित किए जा सकें। वर्तमान में, एआई क्षमताओं का संकेंद्रण कुछ चुनिंदा देशों और निगमों तक सीमित है, जिससे विकासशील देशों के 'डिजिटल उपनिवेश' बनने का खतरा उत्पन्न हो गया है। वैश्विक शासन न केवल डेटा संप्रभुता की रक्षा करेगा, बल्कि एआई के दुरुपयोग जैसे कि साइबर हमले, भ्रामक सूचना अभियान (डिसइंफॉर्मेशन) और घातक जैविक हथियारों के निर्माण से संबंधित जोखिमों को कम करने में भी मदद करेगा।
ट्रस्टेड एआई कॉमन्स और भारत की भूमिका
भारत अपनी 'इंडियाएआई मिशन' के तहत 'ट्रस्टेड एआई कॉमन्स' (Trusted AI Commons) विकसित कर रहा है। यह एक ओपन रिपॉजिटरी होगी जो एआई विकास के लिए आवश्यक डेटासेट, बेंचमार्क और परीक्षण प्रोटोकॉल उपलब्ध कराएगी। यह पहल सुरक्षित और विश्वसनीय एआई विकास की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अंतरराष्ट्रीय पैनल में भारतीय विशेषज्ञों की भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि वैश्विक मानकों के निर्धारण में ग्लोबल साउथ (Global South) के हितों का प्रतिनिधित्व हो सके।
परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तथ्य
आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर बी. रविंद्रन इस संयुक्त राष्ट्र पैनल के सदस्य नियुक्त किए गए हैं।
यह पैनल एआई के नैतिकता, सुरक्षा और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर ध्यान केंद्रित करेगा।
एआई शासन के लिए वैश्विक सहयोग का मुख्य उद्देश्य 'डिजिटल खाई' को पाटना और समावेशी नवाचार को बढ़ावा देना है।
'ट्रस्टेड एआई कॉमन्स' पहल भारत के 'सेफ एंड ट्रस्टेड एआई' विजन का हिस्सा है।

कैस्पियन सागर का सिकुड़ता जलस्तर: भू-राजनीतिक और पर्यावरणीय चुनौतियां
मध्य 1990 के दशक से कैस्पियन सागर ने लगभग 24,000 वर्ग किलोमीटर का सतही क्षेत्र खो दिया है, जो सिसिली द्वीप के बराबर है। बढ़ते तापमान, वाष्पीकरण और मानवीय हस्तक्षेप के कारण इसका जलस्तर लगातार गिर रहा है। यह पारिस्थितिक तंत्र, क्षेत्रीय जैव विविधता और पांच तटीय देशों की आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।
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मध्य 1990 के दशक से कैस्पियन सागर ने लगभग 24,000 वर्ग किलोमीटर का सतही क्षेत्र खो दिया है, जो सिसिली द्वीप के बराबर है। बढ़ते तापमान, वाष्पीकरण और मानवीय हस्तक्षेप के कारण इसका जलस्तर लगातार गिर रहा है। यह पारिस्थितिक तंत्र, क्षेत्रीय जैव विविधता और पांच तटीय देशों की आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।
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भौगोलिक अवस्थिति और महत्व
कैस्पियन सागर विश्व की सबसे बड़ी अंतर्देशीय जल निकाय है, जो यूरोप और एशिया के संगम पर स्थित है। भौगोलिक दृष्टि से यह एक खारे पानी की झील है, जिसका कोई प्राकृतिक आउटलेट (निकास) नहीं है। यह रूस, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ईरान और अजरबैजान से घिरा हुआ है। यह क्षेत्र हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस) के विशाल भंडार के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जो इसे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
जलस्तर में गिरावट के मुख्य कारक
कैस्पियन सागर के सिकुड़ने के पीछे प्राथमिक कारण जलवायु परिवर्तन जनित वैश्विक तापमान में वृद्धि है। इसके परिणामस्वरूप समुद्र की सतह से वाष्पीकरण की दर में अत्यधिक बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही, इस बेसिन में गिरने वाली प्रमुख नदियों, विशेषकर वोल्गा, उराल, कुरा और तेरेक के जल प्रवाह में मानवीय परियोजनाओं और बांध निर्माण के कारण कमी आई है। इन नदियों का जल, जो झील के जल संतुलन को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है, सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के कारण कम हो रहा है।
पारिस्थितिक और आर्थिक प्रभाव
जलस्तर में निरंतर गिरावट से तटवर्ती क्षेत्रों में तटीय क्षरण, आर्द्रभूमि के सूखने और जैव विविधता के नुकसान का खतरा उत्पन्न हो गया है। कैस्पियन सील जैसे स्थानीय प्रजातियों के प्रजनन स्थल नष्ट हो रहे हैं। आर्थिक दृष्टिकोण से, बंदरगाह सुविधाओं, शिपिंग मार्गों और मछली पकड़ने के उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। यदि जलस्तर कम होता रहा, तो यह क्षेत्र में इन पांच देशों के बीच जल संसाधनों के आवंटन और तेल-गैस अन्वेषण संबंधी विवादों को और अधिक जटिल बना सकता है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
कैस्पियन सागर का जलस्तर घटने की प्रक्रिया को 'हाइड्रोलॉजिकल डिसबैलेंस' कहा जाता है। रूस का वोल्गा नदी तंत्र इस सागर के कुल जल इनपुट का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है। यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के लिए यह याद रखना आवश्यक है कि कैस्पियन सागर एक 'बंद बेसिन' (Endorheic basin) है। इसकी उत्तर से दक्षिण की ओर लवणता (Salinity) में भिन्नता पाई जाती है, जहाँ उत्तर में वोल्गा नदी के प्रभाव के कारण जल कम खारा है, जबकि दक्षिण में यह अधिक खारा है।
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