
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026: असाधारण बाल प्रतिभाओं के लिए नामांकन आमंत्रित
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश के सर्वोच्च बाल नागरिक सम्मान 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' (PMRBP) 2026 के लिए आधिकारिक तौर पर नामांकन आमंत्रित किए हैं। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष 5 से 18 वर्ष के भारतीय बच्चों को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए छह निर्धारित श्रेणियों में प्रदान किया जाता है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश के सर्वोच्च बाल नागरिक सम्मान 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' (PMRBP) 2026 के लिए आधिकारिक तौर पर नामांकन आमंत्रित किए हैं। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष 5 से 18 वर्ष के भारतीय बच्चों को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए छह निर्धारित श्रेणियों में प्रदान किया जाता है।
विस्तृत विश्लेषण
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्वरूप
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार को इसके वर्तमान स्वरूप में वर्ष 2019 में पुनर्गठित किया गया था। इससे पहले इसे 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' और 'राजीव गांधी मानव सेवा पुरस्कार' जैसी विभिन्न श्रेणियों के तहत जाना जाता था। यह पुरस्कार भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा प्रशासित किया जाता है। वर्तमान में इसे भारत में बच्चों के लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष महामहिम राष्ट्रपति द्वारा 'वीर बाल दिवस' (26 दिसंबर) के अवसर पर या उसके आसपास आयोजित होने वाले एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाता है।
पुरस्कार की प्रमुख श्रेणियाँ
यह पुरस्कार मुख्य रूप से छह विशिष्ट क्षेत्रों में बच्चों के असाधारण और उत्कृष्ट प्रदर्शन को मान्यता देता है:
वीरता (Bravery): निस्वार्थ भाव से दूसरों की जान बचाने या अदम्य साहस का प्रदर्शन करने के लिए।
कला और संस्कृति (Art & Culture): संगीत, नृत्य, चित्रकला या अन्य पारंपरिक कलाओं में विशिष्ट प्रतिभा।
पर्यावरण (Environment): पर्यावरण संरक्षण, सस्टेनेबिलिटी या जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में नवाचार या प्रयास।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science & Technology): वैज्ञानिक अनुसंधान, नवीन खोजों या तकनीकी अनुप्रयोगों में योगदान।
सामाजिक सेवा (Social Service): समाज कल्याण, वंचितों के उत्थान या सामुदायिक विकास के लिए कार्य।
खेल (Sports): राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल कूद में उत्कृष्ट प्रदर्शन और पदक जीतना।
पात्रता और चयन के कड़े मानदंड
पुरस्कार के लिए विचार किए जाने वाले आवेदकों को कुछ अनिवार्य योग्यताओं को पूरा करना होता है:
आयु सीमा: नामांकन की अंतिम तिथि तक बच्चे की आयु 5 वर्ष से अधिक और 18 वर्ष से कम होनी चाहिए।
नागरिकता व निवास: आवेदक का अनिवार्य रूप से भारत का नागरिक होना और भारत में ही निवास करना आवश्यक है।
समय सीमा: बच्चे की असाधारण उपलब्धि नामांकन की अंतिम तिथि से ठीक पिछले दो वर्षों के भीतर की होनी चाहिए।
एकल पुरस्कार नियम: किसी भी बच्चे को यह पुरस्कार उसके जीवनकाल में केवल एक ही बार दिया जा सकता है।
मरणोपरांत विचार: सामान्य दिशानिर्देशों के तहत यह पुरस्कार मरणोपरांत नहीं दिया जाता है, लेकिन बेहद असाधारण और अपरिहार्य मामलों में इस पर विचार किया जा सकता है।
पुरस्कार के घटक और प्रोत्साहन
सफल विजेताओं को सरकार द्वारा विभिन्न प्रोत्साहनों से सम्मानित किया जाता है। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को माननीय राष्ट्रपति के हस्ताक्षरित एक प्रमाण पत्र, एक पदक और एक विस्तृत साइटेशन बुकलेट (प्रशस्ति पुस्तिका) प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, इन विजेताओं को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस परेड में भी भाग लेने का अवसर प्राप्त होता है।
परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तथ्य (Fact Box)
नोडल मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार।
पुरस्कार का स्तर: बच्चों के लिए भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
घोषणा/प्रदान करने का दिन: वीर बाल दिवस (26 दिसंबर)।
आयु पात्रता: 5 से 18 वर्ष के बीच।
निर्धारित श्रेणियाँ: कुल 6 श्रेणियाँ (वीरता, कला व संस्कृति, पर्यावरण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा और खेल)।
पूर्ववर्ती स्वरूप: वर्ष 2019 में इसे एकीकृत कर 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' नाम दिया गया था।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026: असाधारण बाल प्रतिभाओं के लिए नामांकन आमंत्रित
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश के सर्वोच्च बाल नागरिक सम्मान 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' (PMRBP) 2026 के लिए आधिकारिक तौर पर नामांकन आमंत्रित किए हैं। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष 5 से 18 वर्ष के भारतीय बच्चों को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए छह निर्धारित श्रेणियों में प्रदान किया जाता है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देश के सर्वोच्च बाल नागरिक सम्मान 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' (PMRBP) 2026 के लिए आधिकारिक तौर पर नामांकन आमंत्रित किए हैं। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष 5 से 18 वर्ष के भारतीय बच्चों को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए छह निर्धारित श्रेणियों में प्रदान किया जाता है।
विस्तृत विश्लेषण
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्वरूप
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार को इसके वर्तमान स्वरूप में वर्ष 2019 में पुनर्गठित किया गया था। इससे पहले इसे 'राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' और 'राजीव गांधी मानव सेवा पुरस्कार' जैसी विभिन्न श्रेणियों के तहत जाना जाता था। यह पुरस्कार भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा प्रशासित किया जाता है। वर्तमान में इसे भारत में बच्चों के लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष महामहिम राष्ट्रपति द्वारा 'वीर बाल दिवस' (26 दिसंबर) के अवसर पर या उसके आसपास आयोजित होने वाले एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाता है।
पुरस्कार की प्रमुख श्रेणियाँ
यह पुरस्कार मुख्य रूप से छह विशिष्ट क्षेत्रों में बच्चों के असाधारण और उत्कृष्ट प्रदर्शन को मान्यता देता है:
वीरता (Bravery): निस्वार्थ भाव से दूसरों की जान बचाने या अदम्य साहस का प्रदर्शन करने के लिए।
कला और संस्कृति (Art & Culture): संगीत, नृत्य, चित्रकला या अन्य पारंपरिक कलाओं में विशिष्ट प्रतिभा।
पर्यावरण (Environment): पर्यावरण संरक्षण, सस्टेनेबिलिटी या जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में नवाचार या प्रयास।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science & Technology): वैज्ञानिक अनुसंधान, नवीन खोजों या तकनीकी अनुप्रयोगों में योगदान।
सामाजिक सेवा (Social Service): समाज कल्याण, वंचितों के उत्थान या सामुदायिक विकास के लिए कार्य।
खेल (Sports): राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल कूद में उत्कृष्ट प्रदर्शन और पदक जीतना।
पात्रता और चयन के कड़े मानदंड
पुरस्कार के लिए विचार किए जाने वाले आवेदकों को कुछ अनिवार्य योग्यताओं को पूरा करना होता है:
आयु सीमा: नामांकन की अंतिम तिथि तक बच्चे की आयु 5 वर्ष से अधिक और 18 वर्ष से कम होनी चाहिए।
नागरिकता व निवास: आवेदक का अनिवार्य रूप से भारत का नागरिक होना और भारत में ही निवास करना आवश्यक है।
समय सीमा: बच्चे की असाधारण उपलब्धि नामांकन की अंतिम तिथि से ठीक पिछले दो वर्षों के भीतर की होनी चाहिए।
एकल पुरस्कार नियम: किसी भी बच्चे को यह पुरस्कार उसके जीवनकाल में केवल एक ही बार दिया जा सकता है।
मरणोपरांत विचार: सामान्य दिशानिर्देशों के तहत यह पुरस्कार मरणोपरांत नहीं दिया जाता है, लेकिन बेहद असाधारण और अपरिहार्य मामलों में इस पर विचार किया जा सकता है।
पुरस्कार के घटक और प्रोत्साहन
सफल विजेताओं को सरकार द्वारा विभिन्न प्रोत्साहनों से सम्मानित किया जाता है। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को माननीय राष्ट्रपति के हस्ताक्षरित एक प्रमाण पत्र, एक पदक और एक विस्तृत साइटेशन बुकलेट (प्रशस्ति पुस्तिका) प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, इन विजेताओं को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस परेड में भी भाग लेने का अवसर प्राप्त होता है।
परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तथ्य (Fact Box)
नोडल मंत्रालय: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार।
पुरस्कार का स्तर: बच्चों के लिए भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
घोषणा/प्रदान करने का दिन: वीर बाल दिवस (26 दिसंबर)।
आयु पात्रता: 5 से 18 वर्ष के बीच।
निर्धारित श्रेणियाँ: कुल 6 श्रेणियाँ (वीरता, कला व संस्कृति, पर्यावरण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा और खेल)।
पूर्ववर्ती स्वरूप: वर्ष 2019 में इसे एकीकृत कर 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार' नाम दिया गया था।

रास लफ्फान गैस संयंत्र हादसा: औद्योगिक सुरक्षा और कानूनी विनियामक ढांचा
कतर के रास लफ्फान में बारजान गैस संयंत्र में हुए एक भीषण विस्फोट में 12 भारतीय श्रमिकों की मौत हो गई है। यह घटना वैश्विक स्तर पर काम करने वाले प्रवासी भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा, औद्योगिक परिसरों में खतरनाक प्रक्रियाओं के प्रबंधन और भारत में लागू होने वाले संबंधित सुरक्षा मानकों तथा कानूनी प्रावधानों की समीक्षा को रेखांकित करती है।
कतर के रास लफ्फान में बारजान गैस संयंत्र में हुए एक भीषण विस्फोट में 12 भारतीय श्रमिकों की मौत हो गई है। यह घटना वैश्विक स्तर पर काम करने वाले प्रवासी भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा, औद्योगिक परिसरों में खतरनाक प्रक्रियाओं के प्रबंधन और भारत में लागू होने वाले संबंधित सुरक्षा मानकों तथा कानूनी प्रावधानों की समीक्षा को रेखांकित करती है।
दुर्घटना की पृष्ठभूमि और अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
कतर का रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी वैश्विक स्तर पर तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और गैस-टू-लिक्विड्स (GTL) के उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र है। बारजान गैस परियोजना इसी परिसर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस संयंत्र में हुआ विस्फोट गैस रिसाव या तकनीकी विफलता के कारण होने वाले 'वेपर क्लाउड एक्सप्लोजन' (VCE) का परिणाम हो सकता है। यह घटना विदेशी धरती पर भारतीय कार्यबल की सुरक्षा के साथ-साथ गंभीर औद्योगिक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के सख्त अनुपालन की आवश्यकता को दर्शाती है।
भारत में लागू होने वाले कानून और नियम
भारत के भीतर इस तरह की औद्योगिक और रासायनिक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक बहुस्तरीय विनियामक ढांचा मौजूद है, जो इस प्रकार है:
कारखाना अधिनियम, 1948 (The Factories Act, 1948): यह अधिनियम कारखानों में श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण को विनियमित करता है। इसके तहत ऑपरेटरों के लिए आग और विस्फोट को रोकने, खतरनाक प्रक्रियाओं के मामलों में अनिवार्य सुरक्षा उपाय लागू करने, संभावित खतरों का प्रकटीकरण करने और आपातकालीन योजनाएं (On-site Emergency Plans) तैयार करने का कानूनी दायित्व है।
खतरनाक रसायनों का निर्माण, भंडारण और आयात नियम, 1989 (MSIHC Rules): पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित इन नियमों का मुख्य उद्देश्य रासायनिक दुर्घटनाओं को रोकना है। यह नियम वेपर क्लाउड विस्फोटों और जहरीली गैसों के रिसाव को नियंत्रित करने के लिए रसायनों के सुरक्षित भंडारण और संचालन की सीमाएं तय करता है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विनियम, 2010 (CEA Regulations): यदि किसी ज्वलनशील गैस या मिश्रण के संपर्क में आने वाले विद्युत उपकरण या इग्निशन (ज्वलन) के स्रोत मौजूद हैं, तो यह नियम वहां सख्त सुरक्षा मानक लागू करता है ताकि स्पार्किंग या शॉर्ट-सर्किट से होने वाले विस्फोटों को रोका जा सके।
बॉयलर अधिनियम, 1923 (The Boilers Act, 1923): यह कानून और विभिन्न राज्यों के बॉयलर नियम उच्च दबाव वाले प्रणालियों और बॉयलरों के निरीक्षण, प्रमाणीकरण, सुरक्षित संचालन की शर्तों और ऑपरेटरों की योग्यताओं को निर्धारित करते हैं ताकि दबाव में खराबी के कारण होने वाले हादसों को रोका जा सके।
औद्योगिक सुरक्षा मूल्यांकन उपकरण: HAZOP और LOPA
औद्योगिक संयंत्रों में जोखिम को कम करने और 'सेफ्टी इंस्ट्रूमेंटेड सिस्टम' (SIS) को डिजाइन करने के लिए दो प्रमुख पद्धतियों का उपयोग किया जाता है:
HAZOP (Hazard and Operability Study): यह एक व्यवस्थित और चरणबद्ध प्रक्रिया है जो किसी संयंत्र के डिजाइन के मूल उद्देश्य से होने वाले विचलन (Deviations) की पहचान करती है। सामान्य तौर पर, HAZOP स्थिर-अवस्था (Steady-state) के संचालन पर केंद्रित होता है (जैसे: यदि पाइप में प्रवाह रुक जाए तो क्या होगा)। हालांकि, अस्थायी या संक्रमणकालीन संचालन (Transient operations) जैसे कि प्लांट स्टार्ट-अप या शट-डाउन के लिए 'प्रोसीजरल HAZOP' का उपयोग किया जाता है, जिसमें प्रत्येक प्रक्रिया मैनुअल का गहन विश्लेषण किया जाता है।
LOPA (Layer of Protection Analysis): यह एक अर्ध-मात्रात्मक (Semi-quantitative) उपकरण है जिसका उपयोग यह जांचने के लिए किया जाता है कि किसी दुर्घटना को रोकने के लिए संयंत्र में पर्याप्त स्वतंत्र सुरक्षा परतें (Independent Protection Layers - IPL) मौजूद हैं या नहीं। इन परतों में कुशल ऑपरेटर, स्वचालित अलार्म सिस्टम, रिलीफ वाल्व (Safety Valves), और अंतिम सुरक्षा कवच के रूप में ब्लास्ट वॉल (विस्फोट-रोधी दीवार) शामिल हो सकते हैं।

3I/ATLAS: सौर मंडल में दस्तक देने वाला तीसरा इंटरस्टेलर पिंड
वैज्ञानिकों ने हमारे सौर मंडल में '3I/ATLAS' नामक एक नए इंटरस्टेलर (तारकीय मध्य) धूमकेतु की खोज की है, जो अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक युगांतरकारी घटना है। यह मानव इतिहास में दर्ज किया गया केवल तीसरा ऐसा पिंड है जो किसी अन्य सौर मंडल से यात्रा करता हुआ हमारे ब्रह्मांडीय पड़ोस में दाखिल हुआ है। लगभग 10 से 12 बिलियन (अरब) वर्ष पुराना यह धूमकेतु हमारे अपने सौर मंडल (4.5 अरब वर्ष) से भी कहीं अधिक प्राचीन है, जो वैज्ञानिकों को सुदूर ब्रह्मांड की प्राचीनतम संरचना और रासायनिक इतिहास को समझने का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान कर रहा है।
वैज्ञानिकों ने हमारे सौर मंडल में '3I/ATLAS' नामक एक नए इंटरस्टेलर (तारकीय मध्य) धूमकेतु की खोज की है, जो अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक युगांतरकारी घटना है। यह मानव इतिहास में दर्ज किया गया केवल तीसरा ऐसा पिंड है जो किसी अन्य सौर मंडल से यात्रा करता हुआ हमारे ब्रह्मांडीय पड़ोस में दाखिल हुआ है। लगभग 10 से 12 बिलियन (अरब) वर्ष पुराना यह धूमकेतु हमारे अपने सौर मंडल (4.5 अरब वर्ष) से भी कहीं अधिक प्राचीन है, जो वैज्ञानिकों को सुदूर ब्रह्मांड की प्राचीनतम संरचना और रासायनिक इतिहास को समझने का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान कर रहा है।
विस्तृत विश्लेषण
क्या है 3I/ATLAS और इसकी संरचना?
3I/ATLAS एक विशाल अंतरतारकीय धूमकेतु है, जिसका व्यास लगभग 2.6 किलोमीटर आंका गया है। इसके नाम में मौजूद '3I' यह दर्शाता है कि यह विज्ञान जगत द्वारा खोजा गया तीसरा 'इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट' (Interstellar Object) है। खगोलीय विश्लेषण से पता चला है कि इस धूमकेतु का निर्माण तब हुआ था जब ब्रह्मांड अपनी वर्तमान आयु का महज 13 प्रतिशत ही था। इसकी सबसे अनूठी विशेषता इसकी रासायनिक संरचना है; इसमें मौजूद पानी में हमारे सौर मंडल के धूमकेतुओं की तुलना में लगभग 30 गुना अधिक ड्यूटीरियम (भारी हाइड्रोजन) पाया गया है। इसके अतिरिक्त, इसके कार्बन आइसोटोप (समस्थानिक) के अनुपात भी हमारे स्थानीय खगोलीय पिंडों से पूरी तरह भिन्न हैं, जो इसके बाहरी ब्रह्मांडीय मूल की पुष्टि करते हैं।
अंतरतारकीय पिंडों का इतिहास और तुलना
खगोल विज्ञान के इतिहास में इससे पहले केवल दो इंटरस्टेलर पिंडों की पहचान की गई है। वर्ष 2017 में सबसे पहले '1I/Oumuamua' नामक एक रहस्यमयी सिगार के आकार के पिंड को देखा गया था, जिसने वैज्ञानिकों को अचंभे में डाल दिया था। इसके बाद वर्ष 2019 में दूसरे इंटरस्टेलर पिंड '2I/Borisov' की खोज की गई थी, जो एक सक्रिय धूमकेतु था। 3I/ATLAS इस अत्यंत दुर्लभ श्रेणी में तीसरा सदस्य बन गया है। यह वर्तमान में शनि ग्रह (Saturn) की कक्षा के समीप पहुंच रहा है और खगोलविदों के अनुमान के अनुसार, यह वर्ष 2029 में बौने ग्रह प्लूटो की कक्षा को पार कर जाएगा तथा वर्ष 2035 के आसपास हमारे सौर मंडल की बाहरी सीमा से पूरी तरह बाहर निकल जाएगा।
वैज्ञानिक महत्व और परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की मुख्य और प्रारंभिक परीक्षा (GS3: स्पेस टेक्नोलॉजी) के दृष्टिकोण से यह खोज अत्यधिक महत्व रखती है। यह पिंड इस मायने में अद्वितीय है कि यह हमारे सौर मंडल के जन्म से भी अरबों वर्ष पहले किसी अन्य प्राचीन ग्रहीय प्रणाली में विकसित हुआ था और बाद में वहां से अंतरिक्ष में इजेक्ट (निष्कासित) हो गया था। इसके अध्ययन से प्रारंभिक ब्रह्मांड के वायुमंडल, अन्य तारों के इर्द-गिर्द ग्रहों के निर्माण की प्रक्रिया और अंतरतारकीय माध्यम में पानी के वितरण को समझने में मदद मिलेगी। परीक्षा के लिए इसके रासायनिक संकेतक, जैसे ड्यूटीरियम की उच्च मात्रा और विशिष्ट कार्बन आइसोटोप अनुपात, सबसे प्रमुख वैज्ञानिक तथ्य हैं जो इसे स्थानीय धूमकेतुओं से अलग करते हैं।

भारत का एबीएस फ्रेमवर्क: जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों का अधिकार
जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत भारत के 'एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग' (ABS) फ्रेमवर्क ने वर्ष 2008 से अब तक 266 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई है। इसमें से लगभग 145 करोड़ रुपये उन स्थानीय समुदायों और लाभार्थियों को वितरित किए जा चुके हैं, जो पारंपरिक ज्ञान और जैविक संसाधनों के वास्तविक संरक्षक हैं। यह कदम वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर जैव विविधता के न्यायसंगत लाभ साझाकरण को सुनिश्चित करता है।
जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत भारत के 'एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग' (ABS) फ्रेमवर्क ने वर्ष 2008 से अब तक 266 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई है। इसमें से लगभग 145 करोड़ रुपये उन स्थानीय समुदायों और लाभार्थियों को वितरित किए जा चुके हैं, जो पारंपरिक ज्ञान और जैविक संसाधनों के वास्तविक संरक्षक हैं। यह कदम वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर जैव विविधता के न्यायसंगत लाभ साझाकरण को सुनिश्चित करता है।
एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) और इसका महत्व
एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (एबीएस) एक ऐसा वैश्विक तंत्र है, जिसके तहत जब कोई व्यावसायिक कंपनी या शोधकर्ता किसी क्षेत्र के जैविक संसाधनों (जैसे पौधे, बीज) या उससे जुड़े पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करता है, तो उससे होने वाले आर्थिक या गैर-आर्थिक लाभ का एक हिस्सा वहां के मूल निवासियों के साथ साझा किया जाता है। यह सिद्धांत संयुक्त राष्ट्र के जैव विविधता अभिसमय (CBD) के मुख्य स्तंभों में से एक है।
कानूनी ढांचा और हालिया संशोधन
भारत में इस व्यवस्था को संचालित करने के लिए 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' लागू किया गया था। इस व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित तथा निवेश अनुकूल बनाने के लिए सरकार ने 'जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023' पारित किया। इस नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य घरेलू उद्योगों, आयुष (AYUSH) चिकित्सकों और पारंपरिक ज्ञान धारकों को कुछ विशिष्ट प्रक्रियाओं से छूट देकर अनुपालन के बोझ को कम करना है, जिससे अनुसंधान और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिल सके।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं से जुड़ाव
भारत का यह सफल एबीएस मॉडल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 'नागोया प्रोटोकॉल' (Nagoya Protocol) के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करता है, जिसे 2010 में अपनाया गया था। इसके अतिरिक्त, यह भारत के 'राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) 2024-2030' को मजबूत करता है और 'कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क' के 'लक्ष्य 13' (Target 13) को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है, जो न्यायसंगत लाभ साझाकरण की वकालत करता है।
त्रिस्तरीय संस्थागत संरचना
इस कानून के जमीनी क्रियान्वयन के लिए भारत में एक त्रिस्तरीय प्रशासनिक ढांचा कार्य करता है। राष्ट्रीय स्तर पर 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) नीतियों को मंजूरी देता है; राज्य स्तर पर 'राज्य जैव विविधता बोर्ड' (SBBs) वाणिज्यिक उपयोग के नियमों की निगरानी करते हैं; और स्थानीय स्तर पर 'जैव विविधता प्रबंधन समितियां' (BMCs) पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR) तैयार कर स्थानीय संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करती हैं।
परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तथ्य (Key Facts for Prelims/Mains)
आयोजन और संकलन: वर्ष 2008 से अब तक संचित राशि ₹266 करोड़ से अधिक है, जिसमें से वितरण योग्य ₹145 करोड़ सीधे हितधारकों तक पहुंचे हैं।
जैविक विविधता अधिनियम: यह अधिनियम 1992 के संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता अभिसमय (CBD) की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए 2002 में अधिनियमित हुआ था।
नागोया प्रोटोकॉल: यह आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच और उनके उपयोग से होने वाले लाभों के निष्पक्ष साझाकरण से संबंधित एक पूरक समझौता है, जो 2014 में लागू हुआ था।
संस्थागत विकेंद्रीकरण: देश के प्रत्येक स्थानीय निकाय (पंचायत और नगरपालिका) स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) का गठन अनिवार्य है।
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