
पैदल चलना अब मौलिक अधिकार: फुटपाथ पर आपका हक सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने वालों के अधिकारों को जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का अभिन्न हिस्सा माना है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित फुटपाथ पर चलना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। यह निर्णय शहरी बुनियादी ढांचे की कमी और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के प्रति सरकार की जवाबदेही तय करता है। अब सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करना राज्य का अनिवार्य संवैधानिक दायित्व बन गया है।
खबर का सार
सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने वालों के अधिकारों को जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का अभिन्न हिस्सा माना है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित फुटपाथ पर चलना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। यह निर्णय शहरी बुनियादी ढांचे की कमी और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के प्रति सरकार की जवाबदेही तय करता है। अब सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करना राज्य का अनिवार्य संवैधानिक दायित्व बन गया है।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा: संवैधानिक सुरक्षा कवच
भारत के तेजी से बढ़ते शहरों में कंक्रीट के जंगल तो बन गए, लेकिन उन जंगलों के बीच चलने वाले इंसान की राह हर दिन कठिन होती जा रही है। आए दिन सड़कों पर पैदल यात्रियों के साथ होने वाली दुर्घटनाएं केवल लापरवाही नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे की विफलता का परिणाम हैं। इसी चिंता को संज्ञान में लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक रुख अपनाते हुए पैदल चलने को जीवन के मौलिक अधिकार के अंतर्गत मान्यता दी है।
अनुच्छेद 21 और चलने की आजादी
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है, उसमें 'गरिमा के साथ जीने का अधिकार' भी शामिल है। सुरक्षित फुटपाथों के बिना जीवन का यह अधिकार अधूरा है। जब एक पैदल यात्री को सड़क के जोखिम भरे किनारों पर चलने के लिए मजबूर किया जाता है, तो राज्य उसके जीवन के अधिकार की रक्षा करने में विफल रहता है। अब पैदल चलना मात्र एक गतिविधि नहीं, बल्कि एक संवैधानिक संरक्षण प्राप्त अधिकार है।
अव्यवस्था के खिलाफ न्यायिक रुख
देश के अधिकांश महानगरों में फुटपाथ या तो अतिक्रमण का शिकार हैं, या फिर वहां बिजली के खंभे, खोमचे और निर्माण सामग्री का कब्जा है। सुप्रीम कोर्ट ने इन जमीनी वास्तविकताओं पर प्रहार करते हुए कहा है कि सड़कों पर केवल गाड़ियों का अधिकार नहीं है। बुनियादी ढांचे के नियोजन में पैदल चलने वालों की प्राथमिकताओं को दरकिनार करना अब कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं होगा। स्थानीय निकायों और सरकारी एजेंसियों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि फुटपाथ बाधा मुक्त, साफ और सुरक्षित हों।
भविष्य की राह और सुरक्षा
यह फैसला केवल एक कानूनी व्याख्या नहीं, बल्कि शहरों के डिजाइन को बदलने का एक आह्वान है। आने वाले समय में, यह अधिकार शहरी विकास परियोजनाओं को प्रभावित करेगा। पैदल पथों का निर्माण और उनका रखरखाव अब किसी औपचारिकता का हिस्सा नहीं, बल्कि अनिवार्य जन सेवा का हिस्सा बन गया है। जब पैदल यात्री सुरक्षित महसूस करेगा, तभी शहर वास्तव में रहने योग्य बनेंगे। यह निर्णय उन लाखों लोगों की जीत है जो हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर सड़कों पर निकलते हैं, क्योंकि अब उनके पास अधिकार का मजबूत आधार है।

भारत की 'जगुआर' को संजीवनी: ब्रिटेन से आ रहे 9 लड़ाकू विमान
भारतीय वायुसेना अपने इकलौते और सबसे भरोसेमंद 'जगुआर' लड़ाकू विमानों के बेड़े को आसमान में बनाए रखने के लिए ब्रिटेन से 9 रिटायर्ड जगुआर विमान खरीद रही है। इन विमानों का इस्तेमाल उड़ान भरने के लिए नहीं, बल्कि इनके स्पेयर पार्ट्स और कलपुर्जों (Cannibalisation) को निकालकर भारतीय जगुआर बेड़े को दुरुस्त रखने के लिए किया जाएगा। दुनिया में अब सिर्फ भारत ही इस घातक विमान को ऑपरेट करता है।
खबर का निचोड़ (Summary)
भारतीय वायुसेना अपने इकलौते और सबसे भरोसेमंद 'जगुआर' लड़ाकू विमानों के बेड़े को आसमान में बनाए रखने के लिए ब्रिटेन से 9 रिटायर्ड जगुआर विमान खरीद रही है। इन विमानों का इस्तेमाल उड़ान भरने के लिए नहीं, बल्कि इनके स्पेयर पार्ट्स और कलपुर्जों (Cannibalisation) को निकालकर भारतीय जगुआर बेड़े को दुरुस्त रखने के लिए किया जाएगा। दुनिया में अब सिर्फ भारत ही इस घातक विमान को ऑपरेट करता है।
आसमान के 'शमशेर' को मिला ब्रिटिश बूस्टर
भारतीय वायुसेना का एक ऐसा योद्धा जो दशकों से दुश्मनों के छक्के छुड़ाता आ रहा है, उसे अब एक नया जीवनदान मिलने जा रहा है। हम बात कर रहे हैं 'जगुआर' लड़ाकू विमान की, जिसे भारतीय वायुसेना में 'शमशेर' के नाम से भी जाना जाता है। खबर आई है कि भारत ब्रिटेन से 9 रिटायर्ड जगुआर लड़ाकू विमान हासिल करने की तैयारी में है। लेकिन ट्विस्ट यह है कि ये विमान भारत की तरफ से सीधे जंग के मैदान में नहीं उतरेंगे, बल्कि पर्दे के पीछे रहकर भारतीय बेड़े को मजबूती देंगे।
'कैनिबलाइजेशन': विमानों का अनोखा अंगदान
इस पूरी डील के पीछे वायुसेना की एक बेहद स्मार्ट और सोची-समझी रणनीति काम कर रही है, जिसे तकनीकी भाषा में 'कैनिबलाइजेशन' (Cannibalisation) कहा जाता है। चूंकि जगुआर विमानों का प्रोडक्शन सालों पहले बंद हो चुका है, इसलिए बाजार में इनके नए स्पेयर पार्ट्स मिलना लगभग नामुमकिन है। ऐसे में ब्रिटेन से आने वाले इन 9 सेवामुक्त विमानों को पूरी तरह से खोल दिया जाएगा। इनके इंजन, इलेक्ट्रॉनिक्स, विंग्स और अन्य कीमती कलपुर्जों को निकालकर भारतीय वायुसेना के उन जगुआर विमानों में फिट किया जाएगा जो फिलहाल पार्ट्स की कमी से जूझ रहे हैं। यह एक तरह से विमानों का 'अंगदान' है, जो उड़ते हुए विमानों को नई जिंदगी देगा।
दुनिया का इकलौता रखवाला है भारत
सेपेकैट (SEPECAT) जगुआर एक ऐसा जुड़वां इंजन वाला हमलावर विमान है, जिसे 1970 के दशक में ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर तैयार किया था। वक्त बदला और खुद ब्रिटेन-फ्रांस समेत पूरी दुनिया ने इस विमान को रिटायर कर दिया। लेकिन भारतीय वायुसेना ने इसकी बेजोड़ मारक क्षमता के कारण इसे अपने पास बनाए रखा। आज के समय में भारत पूरी दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो इस खूंखार और ऐतिहासिक लड़ाकू विमान को आज भी एक्टिवली ऑपरेट कर रहा है। ये विमान परमाणु हमला करने से लेकर दुश्मन की सीमा में घुसकर सटीक बमबारी करने में माहिर हैं।
क्यों जरूरी थी यह डील?
भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल जगुआर विमानों के कई स्क्वाड्रन मौजूद हैं। इन विमानों को साल 2030 से 2035 तक एक्टिव रखने का प्लान है, जब तक कि स्वदेशी तेजस मार्क-2 और अन्य आधुनिक विमान इनकी जगह नहीं ले लेते। तब तक के लिए इन विमानों को पूरी तरह फिट रखना बेहद जरूरी है। ब्रिटेन से आ रहे ये 9 पुराने एयरफ्रेम भारत के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं। यह डील न सिर्फ भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को बरकरार रखेगी, बल्कि बेहद कम लागत में देश के रक्षा बजट को भी एक बड़ी राहत देगी।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित
माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में नागरिकों के लिए सुरक्षित और सुव्यवस्थित फुटपाथों पर पैदल चलने की स्वतंत्रता को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार (Fundamental Right) घोषित किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पैदल यात्रियों का अधिकार सड़कों पर चलने वाले मोटर चालित वाहनों के विशेषाधिकारों से सर्वोपरि और प्राथमिक होगा।
खबर का निचोड़ (Summary)
माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में नागरिकों के लिए सुरक्षित और सुव्यवस्थित फुटपाथों पर पैदल चलने की स्वतंत्रता को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार (Fundamental Right) घोषित किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पैदल यात्रियों का अधिकार सड़कों पर चलने वाले मोटर चालित वाहनों के विशेषाधिकारों से सर्वोपरि और प्राथमिक होगा।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis)
न्यायिक निर्णय और संवैधानिक व्याख्या
उच्चतम न्यायालय की पीठ ने इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि भारत के प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भय और खतरे के सड़कों के किनारे बने फुटपाथों पर चलने का अधिकार है। न्यायालय ने इसे जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक अभिन्न हिस्सा माना है। इस निर्णय के माध्यम से न्यायपालिका ने यह संदेश दिया है कि आधुनिक शहरीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास के केंद्र में आम नागरिक होने चाहिए न कि केवल गाड़ियां। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि देश में सड़कों का निर्माण होता है तो स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारों का यह कानूनी कर्तव्य है कि वे उन सड़कों के साथ सुरक्षित फुटपाथों का भी निर्माण और रखरखाव सुनिश्चित करें।
राज्य और प्रशासनिक उत्तरदायित्व
सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला केवल एक सैद्धांतिक व्याख्या नहीं है बल्कि यह कार्यपालिका और नगर निकायों के लिए एक बाध्यकारी निर्देश के रूप में सामने आया है। इस निर्णय के बाद राज्यों की प्रशासनिक मशीनरी को अपनी शहरी नियोजन नीतियों में व्यापक बदलाव करने होंगे। अब तक नगरीय निकायों द्वारा फुटपाथों के रख-रखाव को एक वैकल्पिक जन कल्याण कार्य के रूप में देखा जाता था लेकिन इस न्यायिक आदेश के बाद यह एक प्रवर्तनीय कर्तव्य बन गया है। इसका तात्पर्य यह है कि यदि कोई स्थानीय प्रशासन सुरक्षित फुटपाथ प्रदान करने में विफल रहता है तो नागरिक इसके उल्लंघन के विरुद्ध कानूनी उपचार का मार्ग अपना सकते हैं।
सार्वजनिक संस्कृति और नीतिगत सुधार
न्यायालय ने अपने फैसले में इस बात पर भी विशेष बल दिया है कि बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ सार्वजनिक संस्कृति और नागरिक व्यवहार में बदलाव लाना भी उतना ही आवश्यक है। वर्तमान में भारतीय शहरों में फुटपाथों पर अतिक्रमण और वाहनों की अवैध पार्किंग एक गंभीर समस्या बनी हुई है जिससे पैदल यात्रियों के जीवन को निरंतर खतरा बना रहता है। इस ऐतिहासिक न्यायिक हस्तक्षेप से उम्मीद की जा रही है कि यह देश के नीति निर्माताओं को अधिक समावेशी और मानव-केंद्रित शहरी परिवहन नीतियां बनाने के लिए प्रेरित करेगा जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकेगी।

भारत ने रक्षा क्षेत्र में रचा इतिहास: स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण
भारत ने आज रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के नेतृत्व में अपनी पहली अत्याधुनिक स्वदेशी लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण पूरा कर लिया है। यह परीक्षण ओडिशा के तट पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। यह मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना तेजी से (मैक 5 से अधिक) उड़ान भरने और विभिन्न पैंतरेबाज़ी करने में पूरी तरह सक्षम है। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों के विशेष क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास इतनी उन्नत और घातक सैन्य तकनीक उपलब्ध है।
खबर का निचोड़
भारत ने आज रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के नेतृत्व में अपनी पहली अत्याधुनिक स्वदेशी लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण पूरा कर लिया है। यह परीक्षण ओडिशा के तट पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। यह मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना तेजी से (मैक 5 से अधिक) उड़ान भरने और विभिन्न पैंतरेबाज़ी करने में पूरी तरह सक्षम है। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों के विशेष क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास इतनी उन्नत और घातक सैन्य तकनीक उपलब्ध है।
हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण का विस्तृत विवरण
ऐतिहासिक परीक्षण और मुख्य बिंदु
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय और पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह परीक्षण भारतीय सैन्य इतिहास में एक मील का पत्थर है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित इस हाइपरसोनिक मिसाइल को भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) के लिए डिज़ाइन किया गया है। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपनी अचूक सटीकता और उच्च पैंतरेबाज़ी (maneuverability) का प्रदर्शन करते हुए तय दूरी और सभी मिशन लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया। विभिन्न रडार प्रणालियों, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम और टेलीमेट्री स्टेशनों ने इसके प्रक्षेपवक्र (trajectory) की निगरानी की और इसके डेटा की पुष्टि की।
क्या होती है हाइपरसोनिक तकनीक?
हाइपरसोनिक मिसाइलें वे हथियार होती हैं जो ध्वनि की गति से कम से कम पांच गुना तेजी से (यानी मैक 5 या लगभग 6,125 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की रफ्तार से) यात्रा कर सकती हैं। ये मिसाइलें दो प्रकार की होती हैं: हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल। आज जिस मिसाइल का परीक्षण किया गया है, वह अपनी तीव्र गति के साथ-साथ हवा में ही अपना रास्ता बदलने (पैंतरेबाज़ी करने) की अनूठी क्षमता रखती है। पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, इनका मार्ग पहले से तय नहीं होता, जिससे दुश्मन के मौजूदा वायु रक्षा प्रणालियों और रडार के लिए इन्हें ट्रैक करना और हवा में नष्ट करना लगभग असंभव हो जाता है।
भारत के लिए इसका रणनीतिक महत्व
इस सफल परीक्षण का भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। भारत अब अमेरिका, रूस और चीन जैसे उन अत्यंत सीमित देशों की कतार में खड़ा हो गया है जिनके पास हाइपरसोनिक हथियार संचालन की क्षमता है। क्षेत्रीय सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए यह तकनीक भारत के लिए बेहद जरूरी थी। यह मिसाइल भारत की 'न्यूनतम विश्वसनीय निवारक' (Minimum Credible Deterrence) की नीति को मजबूत करती है, जिससे किसी भी संभावित बाहरी खतरे को समय रहते विफल किया जा सके।
'आत्मनिर्भर भारत' और स्वदेशीकरण को बढ़ावा
यह परियोजना पूरी तरह से घरेलू स्तर पर डिजाइन, विकसित और निर्मित की गई है। इसमें रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs), निजी उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह सफलता भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण के संकल्प को सिद्ध करती है। उन्नत सामग्री (advanced materials), उच्च तापमान प्रतिरोधी प्रणालियों और जटिल प्रणोदन (propulsion) प्रणालियों के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि देश को भविष्य के युद्धों के लिए पूरी तरह सक्षम बनाती है।
संभावित परीक्षा उपयोगी प्रश्न
प्रश्न 1 (प्रारंभिक परीक्षा के लिए):
हाइपरसोनिक मिसाइलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ये मिसाइलें ध्वनि की गति से कम से कम पांच गुना (मैक 5) या उससे अधिक की गति से उड़ान भरने में सक्षम होती हैं।
2. पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में इनकी पैंतरेबाज़ी (maneuverability) की क्षमता इन्हें दुश्मन के रडार से बचाने में मदद करती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
(क) केवल 1
(ख) केवल 2
(ग) 1 और 2 दोनों
(घ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (ग) 1 और 2 दोनों
प्रश्न 2 (मुख्य परीक्षा के लिए):
"हाल ही में भारत द्वारा स्वदेशी लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण देश की रक्षा रणनीतिक स्वायत्तता में एक नए युग की शुरुआत है।" इस तकनीक की विशेषताओं को बताते हुए भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके प्रभावों की समीक्षा कीजिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने भरी युवाओं के सपनों में उड़ान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में यूथ सम्मेलन को संबोधित करते हुए 'विकसित भारत रोजगार योजना' के तहत 15 लाख लाभार्थियों के खातों में 2,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि ट्रांसफर की। पीएम ने फ्रांस, स्लोवाकिया और जी-7 शिखर सम्मेलन की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की युवा शक्ति, टैलेंट और स्किल का लोहा मान रही है।
खबर का निचोड़ (Summary)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में यूथ सम्मेलन को संबोधित करते हुए 'विकसित भारत रोजगार योजना' के तहत 15 लाख लाभार्थियों के खातों में 2,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि ट्रांसफर की। पीएम ने फ्रांस, स्लोवाकिया और जी-7 शिखर सम्मेलन की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की युवा शक्ति, टैलेंट और स्किल का लोहा मान रही है।
विज्ञान भवन में गूंजी युवा शक्ति की हुंकार
राजधानी दिल्ली का विज्ञान भवन आज एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के कोने-कोने से जुड़े युवाओं को संबोधित किया। यह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि नए भारत के युवा सपनों को एक नई उड़ान देने का मंच था। इस खास यूथ सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने न केवल युवाओं का उत्साह बढ़ाया, बल्कि 'विकसित भारत रोजगार योजना' के अंतर्गत एक सिंगल क्लिक के जरिए 15 लाख लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे 2 हजार 400 करोड़ रुपये की भारी-भरकम प्रोत्साहन राशि भी भेजी। इस दौरान प्रधानमंत्री का युवाओं के साथ सीधा और आत्मीय संवाद भी देखने को मिला।
वैश्विक मंच पर भारत के टैलेंट का डंका
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं की ऊर्जा की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सामने बैठे युवा साथियों में उन्हें भारत के उज्ज्वल और सशक्त भविष्य की साफ तस्वीर दिखाई दे रही है। अपनी हालिया विदेश यात्रा का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे के बाद, जब उन्होंने जी-7 शिखर सम्मेलन में दुनिया के सबसे विकसित देशों के दिग्गज नेताओं से मुलाकात की, तो वहां सिर्फ और सिर्फ भारत की युवा शक्ति की चर्चा हो रही थी। आज दुनिया के बड़े-बड़े मंचों पर भारत के टैलेंट, स्किल और क्षमता की गूंज सुनाई दे रही है।
सपनों को सच करने का मजबूत सेतु
प्रधानमंत्री ने साफ किया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य देश के हर युवा की क्षमता को एक बेहतरीन अवसर में बदलना है। इसी दूरदर्शी सोच के साथ 'विकसित भारत रोजगार योजना' की शुरुआत की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ एक पारंपरिक रोजगार योजना नहीं है, बल्कि अपनी पहली नौकरी की दहलीज पर खड़े युवाओं के अरमानों को पंख देने की एक बड़ी मुहिम है। यह योजना नए टैलेंट और आधुनिक उद्योगों के बीच एक मजबूत पुल की तरह काम कर रही है, जो आने वाले समय में देश के विकास को एक नई रफ्तार देगी।
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