
राखीगढ़ी से मिले मानव कंकाल: सिंधु-सरस्वती सभ्यता के रहस्यों पर बड़ा वैज्ञानिक अनुसंधान
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हरियाणा के राखीगढ़ी (टीला संख्या 7) से हाल ही में खोजे गए प्राचीन मानव कंकालों को विस्तृत वैज्ञानिक जांच के लिए भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (AnSI) को सौंप दिया है। हालिया समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत किया गया यह हस्तांतरण सिंधु-सरस्वती सभ्यता के लोगों के जीवन, आहार और आनुवंशिकी (जेनेटिक्स) को समझने में मील का पत्थर साबित होगा।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हरियाणा के राखीगढ़ी (टीला संख्या 7) से हाल ही में खोजे गए प्राचीन मानव कंकालों को विस्तृत वैज्ञानिक जांच के लिए भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (AnSI) को सौंप दिया है। हालिया समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत किया गया यह हस्तांतरण सिंधु-सरस्वती सभ्यता के लोगों के जीवन, आहार और आनुवंशिकी (जेनेटिक्स) को समझने में मील का पत्थर साबित होगा।
विस्तृत विश्लेषण
हालिया घटनाक्रम और संस्थागत सहयोग
Greater नोएडा स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की उत्खनन शाखा-II ने क्षेत्र सत्र 2025-26 के दौरान राखीगढ़ी के टीला संख्या 7 से आठ प्राचीन कब्रों की खोज की है। इनमें से तीन पूर्ण मानव कंकाल और अन्य अवशेषों को कोलकाता स्थित भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (AnSI) की प्राचीन मानव कंकाल भंडार और प्रयोगशाला में स्थानांतरित किया गया है। संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्यरत इन दोनों शीर्ष संस्थानों के बीच हुआ यह सहयोग बहुविषयक (Multidisciplinary) अनुसंधान को बढ़ावा देगा।
राखीगढ़ी का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व
हरियाणा के हिसार जिले में घग्गर-हाकरा नदी घाटी (प्राचीन सरस्वती नदी) में स्थित राखीगढ़ी लगभग 550 हेक्टेयर में फैला है। यह सिंधु-सरस्वती सभ्यता का सबसे बड़ा ज्ञात शहरी केंद्र और बस्ती है, जो आकार में मोहनजोदड़ो से भी बड़ा है। यहाँ से प्रारंभिक हड़प्पा काल से लेकर परिपक्व हड़प्पा काल तक के निरंतर बसावट के साक्ष्य मिलते हैं, जो इसकी दीर्घकालिक ऐतिहासिक प्रासंगिकता को दर्शाते हैं।
पुरातात्विक उत्खनन से प्राप्त साक्ष्य
राखीगढ़ी के उत्खनन से एक सुव्यवस्थित और नियोजित नगरीय विन्यास का पता चलता है। यहाँ से उत्कृष्ट जल निकासी व्यवस्था, पक्की ईंटों के मकान, शिल्प उत्पादन केंद्र, और व्यापक व्यापार नेटवर्क के प्रमाण मिले हैं। टीला संख्या 7, जिसे विशेष रूप से कब्रिस्तान (Burial Ground) के रूप में पहचाना गया है, प्राचीन अंतिम संस्कार की रीतियों और सामाजिक संरचना को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रमुख आयाम
भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (AnSI) इन कंकालों पर अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का अनुप्रयोग करेगा। इसके तहत प्राचीन डीएनए (aDNA) विश्लेषण, क्रैनियोफेशियल रिकंस्ट्रक्शन (चेहरे की संरचना का पुनर्निर्माण), और आइसोटोप विश्लेषण किया जाएगा। इससे प्राचीन निवासियों के स्वास्थ्य, पोषण, बीमारियों के पैटर्न, प्रवास (Migration) और समकालीन आबादी के साथ उनके आनुवंशिक संबंधों के बारे में प्रामाणिक डेटा प्राप्त हो सकेगा।
परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तथ्य (Exam-Oriented Facts)
भौगोलिक स्थिति: राखीगढ़ी भारत के हरियाणा राज्य के हिसार जिले में स्थित है। यह स्थल घग्गर-हाकरा नदी तंत्र के क्षेत्र में आता है।
आकार और विस्तार: लगभग 550 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तृत राखीगढ़ी को भारतीय उपमहाद्वीप में सिंधु-सरस्वती सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल माना जाता है।
खोज और उत्खनन: इस स्थल की प्रारंभिक खोज अमरेंद्र नाथ द्वारा की गई थी, और बाद में डेक्कन कॉलेज के प्रोफेसर वसंत शिंदे और हाल के वर्षों में एएसआई द्वारा इसका विस्तृत उत्खनन किया गया।
टीला संख्या 7 का महत्व: यह क्षेत्र विशेष रूप से राखीगढ़ी का कब्रिस्तान (Necropolis) है, जहाँ से पहले भी प्रेमी जोड़े (Couple Burial) और अब 2025-26 में आठ नई कब्रें और तीन पूर्ण कंकाल मिले हैं।
संबंधित संस्थान: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (AnSI) दोनों ही भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत काम करते हैं। AnSI का मुख्यालय कोलकाता में स्थित है।
वैज्ञानिक तकनीकें: प्राचीन कंकालों के अध्ययन में डीएनए निष्कर्षण के लिए कान की पेट्रस हड्डी (Petrus Bone) का उपयोग सबसे सटीक माना जाता है, जिससे प्राचीन जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequencing) संभव होता है।

डिजिटल संप्रभुता से वैश्विक नेतृत्व: भारत का उभरता तकनीकी महाशक्ति ढांचा
पिछले एक दशक में भारत उपभोक्ता बाजार से आगे बढ़कर एक वैश्विक टेक-पावर बन चुका है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), स्वदेशी नवाचारों और सेमीकंडक्टर, क्वांटम व एआई (AI) जैसे मिशन-मोड अभियानों के जरिए देश ने एक विश्वसनीय तकनीकी तंत्र स्थापित किया है, जो 'विकसित भारत 2047' के विजन का आधार स्तंभ है।
खबर का निचोड़
पिछले एक दशक में भारत उपभोक्ता बाजार से आगे बढ़कर एक वैश्विक टेक-पावर बन चुका है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), स्वदेशी नवाचारों और सेमीकंडक्टर, क्वांटम व एआई (AI) जैसे मिशन-मोड अभियानों के जरिए देश ने एक विश्वसनीय तकनीकी तंत्र स्थापित किया है, जो 'विकसित भारत 2047' के विजन का आधार स्तंभ है।
विस्तृत विश्लेषण
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और वित्तीय समावेशन
भारत ने अपने 'इंडिया स्टैक' के माध्यम से वैश्विक स्तर पर डिजिटल गवर्नेंस का एक अनूठा मॉडल प्रस्तुत किया है। आधार, यूपीआई (UPI) और डिजीलॉकर जैसे टूल्स ने नागरिक सेवाओं की पहुंच को पूरी तरह लोकतांत्रिक बना दिया है। यूपीआई वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम्स में से एक है, जिसे वैश्विक स्तर पर भी कई देशों द्वारा अपनाया या सराहा जा रहा है। यह ढांचा 'सस्ती, सुरक्षित और समावेशी' तकनीक का सबसे बड़ा उदाहरण है।
सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक में आत्मनिर्भरता
तकनीकी संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर और क्वांटम डोमेन में महत्वपूर्ण रणनीतिक निवेश किए हैं। 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) के तहत देश में फैब्रिकेशन और असेंबली इकोसिस्टम का तेजी से विकास हो रहा है। इसके समानांतर, 'राष्ट्रीय क्वांटम मिशन' (NQM) के जरिए अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग, संचार और साइबर सुरक्षा तकनीकों को स्वदेशी रूप से विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की निर्भरता कम होगी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग
'इंडिया एआई मिशन' (IndiaAI Mission) के माध्यम से देश कंप्यूटिंग क्षमता, स्टार्टअप्स को फंडिंग और डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क को मजबूत कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा जैसे कोर सेक्टर्स में एआई के सामाजिक व आर्थिक लाभों को सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही, 'नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन' (NSM) के तहत देश भर के प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में स्वदेशी रूप से असेंबल किए गए सुपरकंप्यूटर्स को स्थापित किया गया है, जो उच्च-स्तरीय शोध को गति दे रहे हैं।
स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक साख
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभरते डीप-टेक स्टार्टअप्स ने इनोवेशन के विकेंद्रीकरण को साबित किया है। साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग और 5G/6G तकनीकों में भारत की बढ़ती क्षमता ने उसे वैश्विक टेक कंपनियों और सरकारों के लिए एक 'भरोसेमंद साझेदार' (Trusted Partner) के रूप में स्थापित किया है। यह प्रगति 'विकसित भारत 2047' के दीर्घकालिक आर्थिक और भू-राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तथ्य (UPSC/SSC Special)
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM): इसे डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के तहत एक समर्पित व्यापार प्रभाग के रूप में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजाइन का वैश्विक केंद्र बनाना है।
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM): इस मिशन को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसके तहत क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्यूनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग और मौसम विज्ञान जैसे चार प्रमुख हब (Hubs) विकसित किए जा रहे हैं।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के तीन स्तंभ: मुख्य रूप से पहचान (आधार), भुगतान (UPI), और डेटा विनिमय (डिजीलॉकर/अकाउंट एग्रीगेटर) इसके मूल आधार हैं। जी-20 (G20) की भारत की अध्यक्षता के दौरान वैश्विक स्तर पर इस फ्रेमवर्क को काफी सराहना मिली थी।
नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM): इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संयुक्त रूप से संचालित इस मिशन का उद्देश्य देश में सुपरकंप्यूटिंग ग्रिड का निर्माण करना है। इसके तहत 'परम शिवाय' भारत में असेंबल किया गया पहला स्वदेशी सुपरकंप्यूटर था।
विकसित भारत @2047: यह स्वतंत्रता के 100वें वर्ष (2047) तक भारत को एक पूरी तरह से विकसित राष्ट्र बनाने का सरकारी रोडमैप है, जिसमें आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश और तकनीकी प्रगति इसके मुख्य उत्प्रेरक हैं।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग के वैश्विक और परिवर्तनकारी प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि योग वैश्विक स्तर पर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक सकारात्मकता का संचार कर रहा है। इस दौरान उन्होंने मन की शांति और श्वास नियंत्रण पर आधारित एक महत्वपूर्ण संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग के वैश्विक और परिवर्तनकारी प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि योग वैश्विक स्तर पर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक सकारात्मकता का संचार कर रहा है। इस दौरान उन्होंने मन की शांति और श्वास नियंत्रण पर आधारित एक महत्वपूर्ण संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया।
सुभाषितम् का संदर्भ और निहितार्थ
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया सुभाषितम्—“चित्तप्रशमनोपायो योग इत्यभिधीयते। प्राणस्पन्दनिरोधो वा द्वेधा योगस्य धारणा॥”—मूलतः योग वशिष्ठ से प्रेरित माना जाता है। यह सुभाषितम् स्पष्ट करता है कि योग केवल शारीरिक मुद्राओं (आसनों) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चित्त (मन) को पूर्णतः शांत करने का एक प्रामाणिक साधन है। इसके अंतर्गत मानसिक स्थिरता प्राप्त करने की दो प्रमुख विधियों का उल्लेख किया गया है: पहली विधि मन को सीधे शांत करना है और दूसरी विधि प्राणायाम के माध्यम से श्वास के प्रवाह (प्राणस्पन्दन) को नियंत्रित व नियमित करना है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY) का ऐतिहासिक और प्रशासनिक महत्व
प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का एक सुदृढ़ ऐतिहासिक और कूटनीतिक महत्व है। भारत के प्रयासों के चलते 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने रिकॉर्ड 177 सह-प्रायोजक देशों के समर्थन से 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया था। प्रथम योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था। यह आयोजन आयुष मंत्रालय (Ministry of Ayush) द्वारा नोडल एजेंसी के रूप में संचालित किया जाता है, जो भारत की 'सॉफ्ट पावर' (Soft Power) डिप्लोमेसी का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है।
परीक्षा के लिए प्रासंगिक प्रमुख तथ्य (Key Facts for UPSC/SSC)
नोडल मंत्रालय: आयुष मंत्रालय, भारत सरकार।
प्रथम आयोजन: 21 जून 2015 (नई दिल्ली में आयोजित मुख्य समारोह ने दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए थे)।
तिथि का चयन: 21 जून को 'उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन' (Grishm Sankranti/Summer Solstice) होता है, जिसका भारतीय संस्कृति और अध्यायन में विशेष महत्व है।
योग वशिष्ठ का सिद्धांत: प्रधानमंत्री द्वारा उद्धृत श्लोक मानसिक स्वास्थ्य प्रबंधन (Mental Health Management) और 'योग सूक्तों' के दार्शनिक आधार को दर्शाता है, जिसे मुख्य परीक्षा के निबंध और एथिक्स (GS Paper 4) के उत्तरों में मूल्य संवर्धन (Value Addition) के लिए उपयोग किया जा सकता है।
सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति: यह विषय वैश्विक कूटनीति (GS Paper 2 - अंतर्राष्ट्रीय संबंध) में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के प्रभाव को प्रदर्शित करने का एक उत्तम उदाहरण है।

प्रोजेक्ट चीता और कूनो राष्ट्रीय उद्यान: राष्ट्रपति का दौरा और मुख्य परीक्षा तथ्य
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 21 जून, 2026 को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) का दौरा किया। राष्ट्रपति ने उद्यान के चीता प्रबंधन क्षेत्र का अवलोकन किया और वन मंडलाधिकारी से 'प्रजेक्ट चीता' की प्रगति, चुनौतियों तथा वन्यजीव संरक्षण के उपायों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
खबर का निचोड़:
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 21 जून, 2026 को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) का दौरा किया। राष्ट्रपति ने उद्यान के चीता प्रबंधन क्षेत्र का अवलोकन किया और वन मंडलाधिकारी से 'प्रोजेक्ट चीता' की प्रगति, चुनौतियों तथा वन्यजीव संरक्षण के उपायों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
विस्तृत विश्लेषण
राष्ट्रपति का कूनो दौरा और वर्तमान संदर्भ
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का कूनो राष्ट्रीय उद्यान का दौरा भारत के महत्वाकांक्षी वन्यजीव पुनरुद्धार कार्यक्रम को वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करता है। राष्ट्रपति ने चीता बाड़ों और प्रबंधन केंद्रों का निरीक्षण कर मैदानी स्तर पर तैनात अधिकारियों और वनकर्मियों का हौसला बढ़ाया। यह दौरा कूनो में चीतों के सफल पुनर्वास और उनके प्राकृतिक आवास प्रबंधन की समीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रोजेक्ट चीता: पृष्ठभूमि और उद्देश्य
प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) विश्व की पहली अंतर-महाद्वीपीय बड़े मांसाहारी जीव स्थानांतरण (Translocation) परियोजना है। वर्ष 1952 में भारत से चीतों को आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित कर दिया गया था। इस प्रजाति को भारतीय पारिस्थितिकी तंत्र में पुनर्स्थापित करने के लिए सितंबर 2022 में नामीबिया से और फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में लाया गया था। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारत में घास के मैदानों (Grasslands) के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करना है।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान की भौगोलिक व पारिस्थितिक स्थिति
कूनो राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश के श्योपुर और मुरैना जिलों में फैला हुआ है। यह विंध्य पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है और लगभग 748 वर्ग किलोमीटर के मुख्य क्षेत्र (Core Area) में विस्तृत है। कूनो नदी इसके बीच से गुजरती है, जो उद्यान के लिए जल का प्राथमिक स्रोत है। यहाँ की वनस्पति मुख्य रूप से शुष्क पर्णपाती वन (Dry Deciduous Forests) और खुले घास के मैदानों से युक्त है, जो चीतों के दौड़ने और शिकार करने के लिए सबसे अनुकूल मानी जाती है।
परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मुख्य तथ्य
प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC और राज्य लोक सेवा आयोगों के लिए इस विषय से जुड़े निम्नलिखित तथ्य अत्यंत प्रासंगिक हैं:
नोडल एजेंसी: प्रोजेक्ट चीता का क्रियान्वयन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा मध्य प्रदेश वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सहयोग से किया जा रहा है।
आईयूसीएन (IUCN) स्थिति: अफ्रीकी चीता (Acinonyx jubatus) को IUCN की रेड लिस्ट में 'असुरक्षित' (Vulnerable) श्रेणी में रखा गया है, जबकि एशियाई चीता 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' (Critically Endangered) है। भारत में लाए गए सभी चीते अफ्रीकी मूल के हैं।
शाकाहारी जीवों का घनत्व: कूनो में चीतों के भोजन के लिए चीतल, सांभर, नीलगाय और चौसिंगा जैसे शाकाहारी जीवों के घनत्व को बढ़ाने के लिए विशेष प्रबंधन किया गया है।
पर्यावरणीय महत्व: चीता एक 'फ्लैगशिप' और 'अम्ब्रेला' प्रजाति है। इसके संरक्षण से न केवल चीतों बल्कि घास के मैदानों में रहने वाले अन्य वन्यजीवों और वनस्पतियों का भी स्वतः संरक्षण सुनिश्चित होता है।

आरबीआई का नया सर्कुलर: लीड बैंक योजना के नियमों में बड़ा बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लीड बैंक योजना (LBS) पर एक संशोधित सर्कुलर जारी किया है, जो पुराने सभी निर्देशों का स्थान लेगा। इस नए ढांचे का उद्देश्य जिला स्तरीय क्रेडिट योजना, समिति की बैठकों और वित्तीय समावेशन के कार्यों को अधिक सुव्यवस्थित, प्रभावी और समकालीन आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाना है।
खबर का निचोड़
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लीड बैंक योजना (LBS) पर एक संशोधित सर्कुलर जारी किया है, जो पुराने सभी निर्देशों का स्थान लेगा। इस नए ढांचे का उद्देश्य जिला स्तरीय क्रेडिट योजना, समिति की बैठकों और वित्तीय समावेशन के कार्यों को अधिक सुव्यवस्थित, प्रभावी और समकालीन आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाना है।
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पृष्ठभूमि और योजना का उद्देश्य
लीड बैंक योजना भारत में जिला स्तर पर ऋण योजना और बैंकिंग समन्वय की एक महत्वपूर्ण रूपरेखा है। इसके तहत प्रत्येक जिले के लिए एक बैंक को 'लीड बैंक' के रूप में नामित किया जाता है, जो जिला और राज्य स्तर की प्राथमिकताओं के साथ शाखा स्तर की बैंकिंग गतिविधियों को एकीकृत करता है। बदलते आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए आरबीआई ने इसके प्रशासनिक और कार्यान्वयन ढांचे को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया है।
जिला स्तरीय ऋण योजना का पुनर्गठन
संशोधित मानदंडों के तहत जिला स्तरीय क्रेडिट प्लानिंग को अधिक व्यावहारिक और डेटा-संचालित बनाया गया है। अब बैंकों को स्थानीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक आवश्यकताओं, जैसे कि कृषि, एमएसएमई (MSME) और प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों की तात्कालिक मांगों को ध्यान में रखकर अपनी वार्षिक ऋण योजनाएं (ACP) तैयार करनी होंगी। इसका मुख्य उद्देश्य ऋण आवंटन में आने वाली विसंगतियों को दूर करना है।
समिति बैठकों का डिजिटलीकरण और नियमितता
आरबीआई ने जिला स्तरीय समन्वय समितियों (DLCC) और राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों (SLBC) की बैठकों के संचालन में अधिक कड़ाई और पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए हैं। बैठकों के एजेंडे, समीक्षा प्रक्रियाओं और डेटा प्रस्तुतीकरण को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित करने पर बल दिया गया है ताकि वित्तीय प्रगति की वास्तविक समय (रियल-टाइम) में निगरानी की जा सके।
वित्तीय समावेशन और जमीनी पहुंच पर ध्यान
संशोधित परिपत्र में वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों को नए सिरे से परिभाषित किया गया है। लीड बैंकों को अब केवल खाते खोलने तक सीमित न रहकर डिजिटल वित्तीय साक्षरता, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (जैसे बीमा और पेंशन) के प्रसार और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग आउटलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेह बनाया गया है, जिससे वित्तीय तंत्र की पहुंच अंतिम पायदान तक हो सके।
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